अधिशासी अभियंताओं ने फीडबैक लेने के लिए लाइनमैन को संक्षिप्त विवरण दर्ज करने वाला फॉर्म देकर उपभोक्ताओं से रूबरू कराया। इस दौरान अधिकतर ने कहा कि स्मार्ट मीटर से पहले उनका 1500 रुपये का बिल आता था, जो अब तीन से चार हजार रुपये तक आ रहा है। उपभोक्ताओं का कहना था कि स्मार्ट मीटर तेज चलता है।
जांच में सही पाए गए स्मार्ट मीटर
रहीम नगर खंड के अधिशासी अभियंता दिलीप कुमारधर द्विवेदी ने बताया कि उनके डिवीजन में अब तक सिर्फ आठ उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटर तेज चलने की शिकायत दर्ज कराई है। हालांकि, चेक मीटर (नॉन स्मार्ट) लगवाकर जांच कराई तो ये आरोप भी गलत निकले। कहा कि स्मार्ट मीटर सही तरीके से काम कर उपभोग होने वाली बिजली की यूनिट को जोड़ रहे हैं।
कानपुर रोड खंड के अधिशासी अभियंता भरत सिंह ने बताया कि उनके इलाके में 42 हजार उपभोक्ताओं में से 20 हजार के घर व दुकान पर स्मार्ट मीटर लगा दिया गया है। ये मीटर खुद जलने वाली बिजली की रीडिंग और उसकी मांग दर्ज कर लेते हैं।
कहा कि जो उपभोक्ता दो किलोवाट का कनेक्शन लेकर पांच किलोवाट तक लोड पर बिजली जलाते है, स्मार्ट मीटर उनका अधिक बिल बना रहा। इन्हें अतिरिक्त लोड का फिक्स चार्ज देना पड़ता है। पहले एजेंसी कर्मचारी और उपभोक्ता साठगांठ कर डिमांड को सिस्टम पर फीड नहीं कराते थे।
स्मार्ट मीटर लगाने के प्रोजेक्ट पर लगे पाबंदी
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने प्रबंधन से मांग की है कि यूपी पावर कार्पोरेशन में चल रहे स्मार्ट मीटर लगाने के प्रोजेक्ट पर पाबंदी लगाई जाए। कहा कि फीडबैक में 59 फीसदी उपभोक्ता स्मार्ट मीटर से असंतुष्ट हैं। इन मीटर की गुणवत्ता की भी जांच कराई जाए।
अभी फीडबैक की रिपोर्ट पूरी नहीं
मुख्य अभियंता, लेसा ट्रांसगोमती जोन, प्रदीप कक्कड़ ने बताया कि ऊर्जा मंत्री के निर्देश पर स्मार्ट मीटर का फीडबैक लेने का सिलसिला जारी है। अब तक एक चौथाई उपभोक्ताओं के फीडबैक लिए जा चुके हैं। अभी रिपोर्ट पूरी नहीं हो सकी है।