वार्ड का शिलान्यास कर उसका मॉडल देखते व भूमि पूजन करते योगी
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हिमैटोलाजी विभाग में 41 करोड़ की लागत से तीन परियोजनाएं तैयार की गई हैं। इसमें बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन यूनिट (बीएमटी) एवं हिमैटोलोॅजी वार्ड, हिमैटोलॉजी टीचिंग ब्लॉक, डायग्नोस्टिक ब्लॉक तथा स्टेम सेल रिसर्च सेंटर खोला गया है।
बीएमटी के लिए नौ बेड और वार्ड के लिए 40 बेड आरक्षित हैं। विभाग की सभी सुविधाएं एक छत के नीचे होने से मरीजों को फायदा मिलेगा। यहां अब तक 78 ट्रांसप्लांट किए गए हैं।
इससे एप्लास्टिक एनीमिया, थैलेसिमिया, हिमोफिलिया के मरीजों को फायदा मिलेगा। इस कॉलेज से चिकित्सकीय प्रयोगशाला से जुड़े बीएससी एवं एमएससी के 12 कोर्स संचालित किए जाएंगे।
स्वीकृत 120 सीटों के सापेक्ष 52 छात्रों को प्रवेश दिया जा चुका है। 2009 में स्वीकृत इस परियोजना पर राज्य सरकार 1422.86 करोड़ खर्च कर चुकी है। प्रयोगशाला उपकरणों पर 4.52 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
इमरजेंसी मेडिसिन व गुर्दा प्रत्यारोपण केंद्र के लिए पांच मंजिला भवन बनाया जाएगा। दो-दो मंजिल इमरजेंसी मेडिसिन और गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए होगी। एक मंजिल पर मरीज व तीमारदार से जुड़ी सुविधाएं होंगी।
इमरजेंसी मेडिसिन विभाग 210 बेड का बनेगा। इसमें 60 बेड आईसीयू हैं। हार्ट अटैक, ब्रेन स्टोक, खून की उल्टी होने और आकस्मिक महामारी जैसी स्थिति पर मरीजों को यहां भर्ती किया जाएगा।
इसी तरह गुर्दा प्रत्यारोपण केंद्र में 180 बेड होंगे। यहां रोज करीब 100 डायलिसिस और हर सप्ताह छह गुर्दा प्रत्यारोपण होगा। इस भवन पर 180 करोड़ और उपकरणों पर 53 करोड़ खर्च होंगे।
एसजीपीजीआई के सीएमएस प्रो. अमित अग्रवाल ने बताया कि संस्थान में जल्द कई अन्य सुविधाएं मिलेंगी। इसमें पुरानी ओपीडी के स्थान पर 135 नए बेड तैयार करने का प्रस्ताव है। इसी तरह रोबोटिक सर्जरी को 27 करोड़ से रोबोट खरीद और तीन नए माड्यूलर ओटी तैयार होगी।
पोस्ट ऑपरेटिव आईसीयू में आठ बेड का विस्तार, नई न्यूरोलाजिकल लैब, नई डायग्नोसिस ब्लॉक, एमआरएच विभाग में आठ बेडों का विस्तार, यूरोलाजी विभाग में स्टोन सेंटर का विस्तार का काम चल रहा है।