फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राप्ती की कटान से बने कुंड में डूबे भाई-बहन

विज्ञापन
विज्ञापन
जमुनहा (श्रावस्ती)। माता पिता के साथ गुरुवार शाम ननिहाल चिरैया गांव जा रहे भाई बहन की राप्ती की बाढ़ की कटान से रास्ते में बने कुंड में डूबने से मौत हो गई। आंखों के सामने अपने बच्चों को डूबता देख दंपती बदहवास हैं। दंपती अपने मवेशियों को सुरक्षित करने चिरैया गांव आ रहे थे। सूचना पर पहुंची मल्हीपुर पुलिस ने लाश का पंचनामा भरा कर उसे अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया है।
विज्ञापन

भिनगा कोतवाली क्षेत्र का ग्राम नकहा धर्मनगर राप्ती के बाढ़ की विभीषिका में पूरी तरह से प्रभावित था। पूरा गांव जलमग्न होने के कारण अब यहां मवेशियों के सामने भी चारे का संकट उत्पन्न है। वहीं नकहा धर्मनगर निवासी राजितराम पुत्र छोटेलाल की पत्नी लीलावती को एक पखवारा पूर्व बेटा हुआ था। बाढ़ की तबाही से बेहाल राजितराम अपनी पत्नी लीलावती, पुत्री अजय कुमारी (10) व पुत्र प्रमोद कुमार (8) व पुत्र सुभाष (15 दिन) सहित दो भैंस को लेकर अपनी ससुराल मल्हीपुर थाना क्षेत्र के चिरैया रानीसीर के मजरा चिरैया निवासी मोलहे के घर जा रहा था। इस दौरान राजितराम मवेशियों को आगे लेकर चल रहा था। जिसके पीछे लीलावती व बच्चे चल रहे थे। गांव के निकट संपर्क मार्ग बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हो गया था। जिससे मार्ग के किनारे कुंड (गहरा गड्ढा) बन गया था। राजितराम व उसकी पत्नी मासूम व मवेशियों को लेकर क्षतिग्रस्त मार्ग पार कर गई। जबकि पीछे आ रहा प्रमोद का पैर फिसल जाने के कारण वह कुंड में गिर गया। जिसे बचाने के प्रयास में अजय कुमारी भी जा गिरी। जब तक दंपती दोनों को बचाने का प्रयास करते कुंड में डूबने से प्रमाद व अजय कुमारी की मौत हो गई। दंपती की चीख पुकार पर पहुंचे ग्रामीणों ने मशक्कत कर दोनों बच्चों की लाश कुंड से खोज निकाला। जिसे देख दंपती बदहवाश हैं। सूचना पर पहुंची मल्हीपुर पुलिस ने लाश का पंचनामा भरा कर उसे अंतिम संस्कार के लिए परिवार को सौंप दिया। इस बारे में थानाध्यक्ष मल्हीपुर वकील पांडे बताते हैं कि बच्चों की मौत डूबने से ही हुई थी। इसलिए लाश का पंचनामा भराकर परिजनों को सौंप दिया गया है।

निकले थे राहत की तलाश में टूट गया सहारा
राप्ती नदी की बाढ़ की विभीषिका में नकहा धर्मनगर निवासी राजितराम अपना सबकुछ गवां चुका है। घर में रखा अनाज व जानवरों का भूसा भी राप्ती की भेंट चढ़ गया। राप्ती की विभीषिका में किसी तरह परिवार सहित सुरक्षित बचा राजितराम गुरुवार शाम राहत की तलाश में अपना परिवार व मवेशियों को लेकर ससुराल के लिए निकला था। कई दिनों तक बाढ़ से घिरा प्रमोद व अजय कुमारी भी ननिहाल जाने की बात सुन खुशी-खुशी माता पिता के साथ निकले थे। इन मासूमों को क्या पता था कि यह उनकी अंतिम यात्रा है। जिस राप्ती नदी की तबाही से ऊबकर वह ननिहाल जा रहे हैं। उसी राप्ती द्वारा छोड़े गए तबाही के निशान काल बन कर उनका इंतजार कर रहा है। वहीं राहत की तलाश में निकले दंपती के बुढ़ापे का सहारा भी टूट गया। यह सोच कर जहां दंपती बदहवास है। वहीं दो बच्चों की मौत के बाद चिरैया गांव में मातम छाया हुआ है। घटना की सूचना के बाद नकहा धर्मनगर में भी हर किसी की आंख नम है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें