सांप्रदायिक दंगों को लेकर सोमवार को विधानसभा में विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की। विपक्ष और सत्ता पक्ष में तीखी नोकझोंक भी हुई।
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कांग्रेस ने बदलते वक्त के हिसाब से दंगों पर नियंत्रण के लिए योजना बनाने और दंगाइयों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई की मांग उठाई तो भाजपा ने मुजफ्फरनगर और सहारनपुर के दंगों में निर्दोष लोगों को फंसाने का मामला उठाया।
संसदीय कार्यमंत्री आजम खां ने कांग्रेस राज में 50 हजार दंगे होने का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस के नौजवान सदस्य इतिहास की बात न करें तो ही अच्छा है।
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आजम ने भाजपा पर मुजफ्फरनगर दंगों का राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाते हुए कहा, केंद्र में उनकी बहुमत की सरकार है। कानून ले आएं, जितने दंगाई हैं उन्हें छोड़ दिया जाएगा। कौन दोषी है और निर्दोष यह तय करना कानून का काम है लेकिन भाजपा को तो न्यायिक प्रक्रिया पर भी यकीन नहीं है।
दंगा निरोधक कानून का विरोध करने के लिए भी आजम ने भाजपा की खिंचाई की। आजम ने बसपा को भी नहीं बख्शा और कहा, उनकी सरकार में तो जेल में बंद सीएमओ को भी मार दिया जाता था। इस मुद्दे पर भाजपा व बसपा सदस्यों ने बहिर्गमन किया।
आजम ने दिया मुजफ्फरनगर दंगों पर जवाब
कांग्रेस के नदीम जावेद व भाजपा के सुरेश राणा के एक सवाल के जवाब में आजम ने बताया कि मार्च 2013 से दिसंबर 2014 तक प्रदेश में दो सांप्रदायिक दंगे हुए। 2013 में मुजफ्फरनगर में हुए दंगे में 477 मुकदमे दर्ज हुए। जांच में 1359 लोगों की संलिप्तता पाई गई।
1046 अभियुक्त गिरफ्तार हुए, 298 कोर्ट में हाजिर हुए तथा पांच के खिलाफ धारा 83 के तहत कार्रवाई की गई। अब तक कुल 1349 अभियुक्तों के खिलाफ कार्रवाई हुई।
2014 में सहारनपुर में हुए दंगे में 237 मुकदमे दर्ज हुए। कुल 229 अभियुक्त थे। 99 पकड़े गए, दो अदालत में हाजिर हुए। 19 मामलों में आरोप पत्र दाखिल किए गए।
सदस्यों ने दंगा फैलाने में इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया की भूमिका, पीड़ितों को न्याय न मिलने तथा निर्दोषों को फंसाने का मामला उठाया। नदीम जावेद का कहना था कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार सांप्रदायिक दंगे की 247 घटनाएं हुई हैं। केंद्र व राज्य के आंकड़ों में काफी अंतर है।
राणा का कहना था कि 11 ऐसे लोगों को मुल्जिम बना दिया गया जो इस दुनिया में ही नहीं है। 70-80 साल के बुजुर्गों पर छेड़खानी व बलात्कार का मुकदमा कायम किया गया है।
बहुत से निर्दोषों को झूठे आरोपों में फंसाया गया है। आरोपी नार्को, पॉलीग्राफ टेस्ट कराने को भी तैयार हैं। सहारनपुर में लोगों को नुकसान के हिसाब से मुआवजा तक नहीं मिला।
जेल में सीएमओ की हत्या का मामला उठाया
आजम ने कहा, इतिहास की बात न करें तो ही अच्छा है वरना बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी। नदीम पर हमला बोलते हुए कहा, वह जिस दल में हैं उसके इतिहास में न झांकना पड़े तो ही अच्छा है।
नदीम ने सरकार पर लीपापोती का आरोप लगाया तो आजम ने अयोध्या में ताला खुलवाने, शिलान्यास कराने, मस्जिद गिराने का जिक्र छेड़ दिया। इसके बाद आजम ने सुरेश राणा के अनुपूरक सवालों का जवाब देते हुए कहा, जिन्होंने शिकायत वापस ली वे काफी गरीब हैं और आरोपियों के खिदमतगार हैं।
लंबी बहस के दौरान भाजपा सदस्य निर्दोष लोगों को जेल से छोड़ने की मांग करते रहे तो आजम कानून का हवाला देकर कार्रवाई को सही ठहराते रहे। कमेटी बनाकर जांच कराने की बात उठी तो कहा, गुजरात दंगे पर कहां कमेटी बनी?
इसके बाद भाजपा सदस्य बहिर्गमन कर गए। बसपा ने भी आंकड़ों को विरोधाभासी बताया तो आजम ने बसपा शासनकाल में जेल में सीएमओ की हत्या का जिक्र करते हुए उसे भी आईना दिखाया। इसके बाद बसपा सदस्य भी बहिर्गमन कर गए।
जिन्हें जेल में होना चाहिए वे पार्लियामेंट में हैं
सुरेश राणा ने जब कहा कि जिन्होंने दंगा कराया वे चुनाव लड़े और धड़ल्ले से घूम रहे हैं, कोई कार्रवाई नहीं हुई तो आजम ने कहा, लोकतंत्र में ऐसे ही होता है।
जिन्हें जेलों में या फांसी के तख्त पर होना चाहिए वे पार्लियामेंट के लिए चुन लिए जाते हैं। सुरक्षा में चलते हैं। हत्यारे सदनों में बैठते हैं। 40-40 पिल्ले पैदा करने का बयान देने वाली मंत्री बन गई हैं। यही लोकतांत्रिक व्यवस्था है। अगर कहीं कोई ज्यादती है तो लिखकर दें, दिखवा लेंगे।
जल्दी-जल्दी वॉकआउट से थक जाएंगे बसपा के वॉकआउट पर आजम ने नेता प्रतिपक्ष की चुटकी लेते हुए कहा, इतनी जल्दी-जल्दी वॉकआउट न किया करें। थक जाएंगे। यहीं बैठे-बैठे कह दें कि वॉकआउट किया। बार-बार बाहर जाने से कालीन घिस रही है।