संपत्तियों का ब्योरा भेजने के लिए तैयार प्रारूप में शहरी संपत्तियों के अलावा गांव की संपत्तियों का भी उल्लेख अनिवार्य रूप से करना होगा। इसी तरह पैतृक व अर्जित संपत्तियों का अलग-अलग ब्योरा देने के निर्देश हैं। प्रारूप में भूमि और मकानों का अलग-अलग जिक्र भी करना होगा।
भविष्य में अर्जित की जाने वाली संपत्तियों का भी देना है ब्योरा
अधिकारियों व कर्मचारियों को मौजूदा संपत्तियों के साथ ही भविष्य में अर्जित की जाने वाले संपत्तियों की भी घोषणा करनी होगी। ताकि पांच साल बाद फिर से दिए जाने ब्योरे से घोषित संपत्तियों का मिलान किया जा सके।