लखनऊ। शहरी इलाकों में सर्वाइकल कैंसर की पहचान में हो रही देरी गंभीर जनस्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। इसलिए सर्वाइकल कैंसर के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है। गोमतीनगर स्थित निजी संस्थान में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने ये बातें कहीं।
डॉ. चंद्रिमा रे ने बताया कि एफओजीएसआई रिपोर्ट 2025 के मुताबिक, भारत में एचपीवी से जुड़े कैंसर में सर्वाइकल कैंसर का हिस्सा 87.6 प्रतिशत है, जिसमें उत्तर प्रदेश की भागीदारी काफी ज्यादा है। कामकाजी महिलाएं काम के दबाव और घर की जिम्मेदारियों के चलते जांच टाल देती हैं। वे अक्सर शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं और बीमारी गंभीर होने पर ही वे डॉक्टर के पास पहुंचती हैं। 21 साल की उम्र से सर्वाइकल कैंसर की जांच शुरू कर देनी चाहिए। 21 से 29 साल की महिलाओं को हर तीन साल में पैप स्मीयर करवाना चाहिए, जबकि इसके बाद पैप स्मीयर और एचपीवी टेस्ट दोनों की सलाह दी जाती है। असामान्य ब्लीडिंग, पानी जैसा या बदबूदार डिस्चार्ज और पेल्विक दर्द जैसे शुरुआती लक्षण अक्सर अनदेखे कर दिए जाते हैं। इन पर ध्यान देने की जरूरत है।