यूपी सरकार ने फर्रुखाबाद के राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय में 49 बच्चों की मौत पर सख्त रुख अपनाते हुए डीएम रविन्द्र कुमार, सीएमओ डॉ. उमाकान्त पांडेय व सीएमएस डॉ. अखिलेश कुमार को पद से हटा दिया है। इस घटना की महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के निर्देशन में डॉक्टरों की एक टेक्निकल टीम मौके पर भेजकर जांच कराई जा रही है।
जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, सीएमओ व सीएमएस पर दर्ज एफआईआर पर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं होगी। पहले तो इन बच्चों की मौत का कारण बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर की तरह ऑक्सीजन की कमी को बताया गया, लेकिन अब सरकार इस बात से इन्कार कर रही है।
प्रमुख सचिव स्वास्थ्य प्रशांत त्रिवेदी ने यहां सोमवार को बताया कि टेक्निकल टीम घटना की तथ्यात्मक एवं तकनीकी छानबीन करेगी। इससे बच्चों की मृत्यु की वास्तविक स्थिति का पता चल सकेगा। त्रिवेदी ने बताया कि 20 जुलाई से 21 अगस्त 2017 के बीच इस अस्पताल में प्रसव के लिए 461 महिलाएं भर्ती की गईं। इन्होंने 468 बच्चों को जन्म दिया, जिसमें 19 स्टिलबॉर्न (पैदा होते ही मृत्यु हो जाना) थे।
उन्होंने बताया कि बचे 449 बच्चों में से जन्म के समय 66 क्रिटिकल थे। इन्हें न्यू बॉर्न केयर यूनिट में भर्ती कराया गया। यहां छह की मृत्यु हो गई। जबकि 60 बच्चे पूरी तरह स्वस्थ्य हैं। इसके अलावा 145 बच्चे विभिन्न अस्पतालों से जिला महिला अस्पताल रेफर किए गए थे। इनमें से 24 की मृत्यु हो गई, जबकि 121 इलाज से स्वस्थ हो गए। इस प्रकार कुल 49 बच्चों की मौत हुई।