निशक्त बच्चों को शिक्षित करने के लिए शुरू की गई समेकित शिक्षा योजना का भगवान ही मालिक है। जिले इस योजना में मिलने वाले पैसे का हिसाब तक नहीं दे रहे हैं।
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय से बार-बार पूछने के बाद भी यह नहीं बताया जा रहा है कि इस योजना में मिले पैसे में कितना खर्च हुआ और कितना नहीं।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक अवध नरेश शर्मा ने 42 जिलों को हिसाब न देने पर नोटिस देते हुए एक सप्ताह में ब्यौरा तलब किया है।
समेकित शिक्षा योजना के तहत निशक्त बच्चों को शिक्षा देने की व्यवस्था है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय जिला विद्यालय निरीक्षकों के माध्यम से इसके लिए बजट देता है।
शिक्षाधिकारी ऐसे बच्चों को चिह्नित करते हुए शिक्षित कराते हैं।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने कहा है कि प्रदेश के 42 जिले लखनऊ, अमरोहा, अलीगढ़, औरैया, बागपत, बिजनौर, बुलंदशहर, फर्रुखाबाद, फतेहपुर, फीरोजाबाद, गाजीपुर, हरदोई, हापुड़, कानपुर देहात, कासगंज, कौशांबी, कुशीनगर, महाराजगंज, महोबा, मैनपुरी, मथुरा, संभल, शामली, सिद्धार्थनगर, सीतापुर, श्रावस्ती, उन्नाव, आगरा, देवरिया, गौतमबुद्धनगर, गोरखपुर, जौनपुर, मुरादाबाद, संतकबीर नगर, बांदा, रायबरेली, इटावा, आजमगढ़, बरेली, इलाहाबाद, मिर्जापुर व कानपुर नगर से अभी तक हिसाब नहीं मिल रहा है।
उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षकों को भेजे पत्र में कहा है कि उनके द्वारा खर्च पैसों का हिसाब न देने से शासन में योजना की समीक्षा के दौरान असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है।
इसलिए एक सप्ताह में पूरी सूचना उपलब्ध करा दी जाए। इसके बाद भी सूचना न देने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।