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होली के हुड़दंग में 200 घायल पहुंचे अस्पताल, ज्यादातर को प्राथमिक इलाज के बाद छुट्टी, कुछ को किया गया भर्ती, कोरोना की वजह से हर साल के मुकाबले इस बार कम रहा आंकड़ा

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प्रतीकात्मक फोटो।
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लखनऊ। इस बार होली के हुड़दंग में मारपीट और सड़क दुर्घटनाओं के चलते करीब 200 लोग शहर के प्रमुख अस्पतालों की इमरजेंसी में पहुंचे। इनमें से ज्यादातर को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि कुछ को भर्ती किया गया। हालांकि, कोरोना की वजह से इस साल बार होली के हुड़दंग में घायल होकर अस्पताल पहुंचने वालों की संख्या कम रही। आमतौर पर यह आंकड़ा पांच सौ से अधिक रहता था। आंख में रंगने से समस्या के भी गिने-चुने केस पहुंचे।
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इस साल लोगों ने होली खेलते वक्त संयम रखा। इससे सड़कों पर अंधाधुंध वाहन दौड़ाने वाले कम दिखाई दिए। इसका सीधा असर दुर्घटनाओं और मारपीट के कम मामलों के रूप में देखने को मिला। छिटपुट घायलों ने निजी अस्पतालों पर इलाज कराया। थोड़े गंभीर मरीज ट्रॉमा सेंटर, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, सिविल और बलरामपुर अस्पताल पहुंचे। इमरजेंसी में पहुंचे मरीजों में से कुछ को ही भर्ती करने की नौबत आई।
सिविल अस्पताल: तीन दिन में 73 हुए भर्ती
सीएमएस डॉ. एसके नंदा ने बताया कि शनिवार से मंगलवार के बीच इमरजेंसी में 73 मरीजों को भर्ती कराया गया। इनमें से ज्यादातर मामले मारपीट और सड़क हादसों में घायलों के थे। कुछ मरीजों ने आंख में रंग जाने की शिकायत भी बताई। हालांकि, इनमें से कोई ज्यादा गंभीर मामला नहीं था। मंगलवार को ओपीडी में 926 लोग इलाज कराने पहुंचे। इनमें हर तरह के मरीज थे।
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बलरामपुर अस्पताल: इमरजेंसी में 32 को इलाज
सीएमएस डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी ने बताया कि होली के दिन इमरजेंसी में 32 मरीज पहुंचे। इसमें मारपीट, गाड़ी चलाने के दौरान गिरने और आपस में भिड़ने जैसे मामले थे। हालांकि, किसी की भी हालत गंभीर नहीं थी। एक या दो मरीजों को ही भर्ती करना पड़ा। बाकी को प्राथमिक उपचार देकर घर भेज दिया गया।
केजीएमयू का ट्रॉमा सेंटर: 90 हुए भर्ती
सीएमएस डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि होली के दिन इमरजेंसी में 158 मरीज पहुंचे थे। इसमें मारपीट, एक्सीडेंट के साथ गोली लगने जैसे मामले भी थे। इसमें से करीब 90 मरीजों को भर्ती करना पड़ा। बाकी को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
लोहिया संस्थान: 18 मरीज पहुंचे
प्रवक्ता डॉ. श्रीकेश सिंह ने बताया कि इमरजेंसी में 18 मरीज आए थे। इसमें छह मामले झगड़े और 12 सड़क हादसे के थे। इनमें से कोई बहुत गंभीर नहीं था। केवल छह को ही भर्ती किया गया। बाकी को प्राथमिक इलाज दिया गया।
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