गुरुवार को प्रदेश के भारतीय पुलिस सेवा के पांचों ग्रेड के लिए विभागीय प्रोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक हुई। इसमें अगस्त 2018 तक की रिक्तियों के मुकाबले प्रदेश में उपलब्ध आईपीएस अधिकारियों की प्रोन्नति की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। जल्द ही इससे संबंधित आदेश जारी कर दिया जाएगा। चार अधिकारियों का लिफाफा बंद होने के कारण उन्हें प्रोन्नति का लाभ नहीं मिलेगा।
डीपीसी की बैठक में 2005 बैच के 17 आईपीएस अधिकारियों को सेलेक्शन ग्रेड में प्रोन्नत करने का निर्णय किया गया, जबकि 2004 बैच के चार एसएसपी की डीआईजी के पद पर और 2000 बैच के तीन डीआईजी की आईजी के पद पर प्रोन्नति होगी। 1993 बैच के आईपीएस अफसर आईजी से एडीजी हो जाएंगे। डीजी पद के लिए भी डीपीसी कर दी गई। हालांकि डीजी के पद रिक्त न होने के कारण किसी भी एडीजी को अभी डीजी बनने का मौका नहीं मिलेगा। जैसे-जैसे डीजी रिटायर होते जाएंगे, एडीजी से डीजी पद पर प्रमोट होते रहेंगे।
32 आईपीएस अधिकारियों को तत्काल प्रोन्नति का लाभ मिलेगा। सेलेक्शन ग्रेड पाने वाले 2005 बैच के अधिकारियों में सुभाष चंद्र दूबे, सत्येंद्र कुमार सिंह और जे रविंदर गौड़ का लिफाफा विभिन्न जांच लंबित होने के कारण बंद रहा। इन्हें सेलेक्शन ग्रेड में प्रोन्नति नहीं दी जाएगी। लखनऊ के एसएसपी दीपक कुमार, मेरठ की एसएसपी मंजिल सैनी समेत 2005 बैच के 17 आईपीएस अधिकारियों को सेलेक्शन ग्रेड में प्रोन्नति दे दी जाएगी।
मुख्य सचिव कार्यालय के सभागार में हुई डीपीसी की बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव राजीव कुमार ने की। इसमें प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार और डीजीपी सुलखान सिंह बतौर सदस्य मौजूद थे। जिन अफसरों को प्रोन्नति का लाभ मिलेगा, उनमें 1993 बैच के डीजीपी मुख्यालय में तैनात डीजीपी के सहायक संजय सिंघल, आईजी स्थापना एसबी शिरडकर, आईजी क्राइम सुनील कुमार गुप्ता और आईजी कानून-व्यवस्था हरिराम शर्मा को एडीजी के पद पर प्रोन्नति मिलेगी। इसी बैच के आईजी मिर्जापुर प्रेम प्रकाश, आईजी उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड वितुल कुमार और जकी अहमद और आईजी पीएचक्यू डॉ. केएसपी कुमार भी प्रमोट हो जाएंगे। इस बैच के राजीव सब्बरवाल को प्रोन्नति का लाभ केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटने पर मिलेगा।