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लखनऊ : डॉ. एमसी सक्सेना कॉलेज ऑफ मेडिकल सांइसेज में 120 मजदूर बनाए गए बंधक

Tue, 08 Feb 2022 11:09 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

एक मजदूर की तहरीर पर कॉलेज के प्रबंधन व प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। कॉलेज प्रशासनिक हेड को गिरफ्तार कर लिया गया है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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डॉ. एमसी सक्सेना कॉलेज ऑफ मेडिकल सांइसेज में मंगलवार को 120 मजदूरों को बंधक बनाने का मामला सामने आया। सूचना पर पहुंची ठाकुरगंज पुलिस ने मजदूरों को मुक्त कराया। वहीं उनको मेडिकल परीक्षण के लिए टीबी अस्पताल भेजा गया। एक मजदूर की तहरीर पर कॉलेज के प्रबंधन व प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। कॉलेज प्रशासनिक हेड को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन मजदूरों को 500 रुपये दिहाड़ी व भोजन की बात कहकर लाया था। जिसके बाद उनके साथ मरीजों जैसा बर्ताव किया गया।

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डीसीपी पश्चिम सोमेन वर्मा के मुताबिक जेहटा रोड पर डॉ. एमसी सक्सेना कॉलेज ऑफ मेडिकल सांइसेज है। परिसर में आरआर सिन्हा हॉस्पिटल संचालित होता है। मंगलवार की शाम को सीतापुर शहर निवासी अंशु कुमार ठाकुरगंज कोतवाली पहुंचे। अंशु ने कॉलेज ग्रुप के खिलाफ शिकायत की। जिसमें आरोप था कि मजदूरों को दिहाड़ी पर लाने केबाद उनको मरीज बना दिया गया है। शिकायत मिलने पर प्रभारी निरीक्षक ठाकुरगंज हरिशंकर चंद ने पुलिस अधिकारियों को सूचित किया।

इसके बाद कॉलेज परिसर में दबिश दी। जहां मौके से कई मजदूर अस्पताल में बेड पर मरीजों की तरह लेटे मिले। पूछताछ में मामला सामने आया। इस पर प्रभारी निरीक्षक ने तत्काल अतिरिक्त फोर्स भेजने की मांग की। जिस पर एसीपी चौक आईपी सिंह के नेतृत्व में सआदतगंज, काकोरी, चौक थाने की टीम भेजी गई। टीम ने अस्पताल में बंधक बनाए गये 120 मजदूरों को मुक्त कराया।
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कुछ के हाथ में लगे मिले विगो
पुलिस टीम ने जब छापा डाला तो उस वक्त अस्पताल के हॉल में कई बेड लगे थे। जिसमें कई मजदूरों के हाथों में विगो लगे थे। कुछ के हाथ में जांच के लिए खून निकालने के निशान मिले। वहीं सभी मजदूरों के नाम से पर्चे भी पुलिस ने बरामद किया है। कई मजदूरों के पर्चे पर दवा कितनी लेनी है। इसका जिक्र किया गया था। जिसमें इस जालसाजी के दौरान यह भी भूल गये कि कितनी डोज देनी है। एक मजदूर पर्चे पर इंजेक्शन की डोज 3 एमएल के जगह पर 300 एमएल लिखी थी। वहीं बिना बीमारी के भी कई पर्र्चों पर गंभीर बीमारी में चलने वाली दवाओं का जिक्र है। पुलिस ने सारे दस्तावेज जब्त कर लिये है। जिनकी जांच की जा रही है।
 
कोऑर्डिनेटर लेबर अड्डे से लाते थे मजदूर
पुलिस केमुताबिक डॉ. एमसी सक्सेना कॉलेज ऑफ मेडिकल सांइसेज की मान्यता की जांच के लिए एमसीआई की टीम आने वाली है। इस जांच में कॉलेज को जरूरी मानक पूरा करना होता है। जांच में मानक पूरा न होने पर मान्यता फंस सकती है। ऐसे में कॉलेज प्रबंधन के इशारे पर कोऑर्डिनेटर को लेबर अड्डे से मजदूरों को लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। यह कोऑर्डिनेटर दुबग्गा, जानकीपुरम, बालागंज, डालीगंज स्थित लेबर अड्डे पर जाते थे। वहां से मजदूरों को काम करने के बहाने अस्पताल लेकर आते। जहां उनके साथ मरीज की तरह बर्ताव किया जाता था।

दो वक्त का खाना और एक समय का नाश्ते का देते थे लालच
मजदूरों ने आरोप लगाया कि कॉलेज के कोऑर्डिनेटर जब उनको मजदूरी के लिए बात करते थे। उस वक्त 500 रुपये एक दिन की दिहाड़ी। इसके अलावा दो वक्त का खाना और एक समय का नाश्ता देने की बात करते थे। दिहाड़ी के अलावा खाना और नाश्ता मिलने पर आसानी से मजदूर उनकी बातों में आ जाते थे। इसके बाद वह अस्पताल लेकर जाते जहां पर पहले से ही कर्मचारी पर्चे लेकर तैयार रहते थे। सभी के नाम, उम्र, पते दर्ज कर उनको बेड पर लिटा देते थे। इसके बाद डॉक्टर व नर्स की टीम वहां पहुंचकर दवा व इंजेक्शन की बात करती थी।

प्रशासनिक हेड गिरफ्तार
एसीपी चौक आईपी सिंह के मुताबिक पुलिस ने छापा मारा तो वहां पर डॉ. एमसी सक्सेना ग्रुप ऑफ मेडिकल साइंसेज के प्रशासनिक हेड डॉ. शेखर सक्सेना मिले। पुलिस टीम ने उनको गिरफ्तार कर लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। इस ग्रुप के अधिकारियों व प्रबंधक कमेटी के सदस्यों के खिलाफ जालसाजी, रंगदारी, बंधक बनाने, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की जांच की जा रही है।
 
एमसी सक्सेना कॉलेज ग्रुप ऑफ कॉलेज में मजदूरों का इलाज फर्जी इलाज करने की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने निरीक्षण किया था। मामला चिकित्सा शिक्षा विभाग का है। इसलिए उसको रिपोर्ट भेज दी जाएगी। इस बारे में इससे ज्यादा बताना संभव नहीं है।
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डॉ. मनोज अग्रवाल
सीएमओ

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