मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मंगलवार को जब अपना चौथा बजट पेश करेंगे तो सूबे के तमाम लोगों की उम्मीद भरी नजरें उन पर जमी रहेंगी। वजह, तीन साल बाद भी सपा सरकार कई वादों पर बिल्कुल भी आगे नहीं बढ़ पाई है।
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चौथे बजट के बाद वादे पूरे होने का इंतजार कर रहे लोगों की अधीरता कुछ ज्यादा ही बढ़ जाएगी क्योंकि पांचवें व आखिरी बजट में सरकार के पास इन्हें पूरा करने के लिए ज्यादा वक्त नहीं बच पाएगा।
मार्च 2012 में सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री ने वित्त मंत्री के रूप में अपना पहला बजट जून में पेश किया था। 24 फरवरी को जब वे चौथा बजट पेश कर रहे होंगे, तो लोगों की नजरें उनके तमाम वादों पर होगी जिन पर वे आगे नहीं बढ़ पाए हैं। इनमें किसानों, व्यापारियों, छात्रों के साथ-साथ अल्पसंख्यकों से किए कई वादे भी शामिल हैं।
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मुस्लिम लड़कियों के लिए शुरू की गई ‘हमारी बेटी-उसका कल’ योजना सहित कई वादों पर अमल की जोर-आजमाइश के बाद सरकार को पैर वापस खींच लेना पड़ा।
बजट के जानकार बताते हैं कि चुनाव यदि तय समय पर हुए तो चौथे बजट के बाद मुख्यमंत्री के पास ‘2017’ का सामना करने के लिए सिर्फ एक बजट पेश करने का मौका बचेगा।
वे 2017 का पूर्ण बजट पेश नहीं कर पाएंगे। ऐसे में जनता की इस चौथे बजट से बड़ी उम्मीदें लाजिमी हैं। खासकर उन लोगों की, जिनसे किए गए वादों पर सरकार कुछ खास नहीं कर पाई है। आइये देखते हैं वो कौन से वादे हैं जिन पर अभी तक अखिलेश सरकार कुछ नहीं कर पाई है।
इन वादों के पूरा होने का इंतजार
1. बसपा राज के भ्रष्टाचारों की जांच के लिए आयोग का गठन: सपा ने वादा किया था कि बसपा सरकार के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार की जांच के लिए एक आयोग बनेगा।
लोकायुक्त संस्था को मजबूत करने के साथ ही उसे बहु सदस्यीय भी बनाया जाएगा, लेकिन सपा सरकार ने न तो बसपा राज के भ्रष्टाचारों की जांच कराई और न ही लोकायुक्त संस्था को मजबूत करने की कोई पहल की। उल्टे, लोकायुक्त ने बसपा शासनकाल के जिन भ्रष्टाचारों की जांच कर रिपोर्ट सौंपी, उन पर कोई कार्रवाई नहीं की।
2. वैट की दरें पड़ोसी राज्यों के बराबर: घोषणापत्र में कहा गया था कि जिन वस्तुओं पर व्यापार कर की दरें दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश व बिहार से ज्यादा हैं, उन्हें पड़ोसी राज्यों के बराबर किया जाएगा। सरकार ने इस ओर कदम नहीं उठाया। इसकी वजह से तमाम वस्तुएं सूबे में महंगी हैं।
राजकीय सुरक्षा बलों में मुसलमानों की विशेष भर्ती : सपा ने वादा किया था कि राजकीय सुरक्षा बलों में मुसलमानों की भर्ती का विशेष प्रावधान होगा। कैंप लगाकर भर्ती की जाएगी। मुसलमानों को इस वादे के पूरा होने का इंतजार है।
भूमि अधिग्रहण के वादों पर भी नहीं हुआ अमल
3. भूमि अधिग्रहण पर छह गुना मुआवजा: वादा था कि दो फसल देने वाली जमीन का अधिग्रहण पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। किसी खास स्थिति में अधिग्रहण होना है तो किसान की स्वीकृति से ही होगा और उसे सर्किल रेट का छह गुना मुआवजा दिया जाएगा।
यदि उस जमीन पर उद्योग स्थापित हुए तो किसान परिवार के एक युवक को नौकरी व बुजुर्ग दंपती को आजीवन पेंशन मिलेगी। इस पर भी अमल नहीं हुआ।
4. किसानों को पेंशन: रिटायर्ड कर्मी और सांसदों व विधायकों की तरह 65 साल की उम्र पूरा करने वाले छोटी जोत के किसानों को पेंशन देने के वादे पर भी अमल नहीं हुआ।
5. किसान आयोग का गठन: वादा था कि किसानों की उपज का लागत मूल्य तय करने के लिए आयोग का गठन होगा। लागत मूल्य का 50 प्रतिशत जोड़कर जो राशि आएगी, वह फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य होगा। सरकार सीधे किसानों से इस मूल्य पर उनकी उपज खरीदेगी। इस ओर कोई कार्यवाही नहीं हो पाई।
6. गैर अनुदानित शिक्षकों को मानदेय: इंटरमीडिएट तक बिना सरकारी अनुदान के पढ़ाने वाले अध्यापकों के लिए जीविकोपार्जन भर के मासिक मानदेय का वादा था। इस पर आज तक अमल नहीं हुआ।
इन वादों पर तो अब तक अमल नहीं कर पाई सरकार
7. गरीब निराश्रितों को साड़ी-कंबल : बीपीएल परिवार की सभी महिलाओं को दो-दो साड़ियां और बुजुर्गों को एक-एक कंबल देने की घोषणा की गई थी। सरकार ने इसके लिए नियम-कायदे भी बनाए, मगर, वादे पर अमल अब तक नहीं कर पाई है।
8. हाईस्कूल उत्तीर्ण विद्यार्थियों को टैबलेट : सपा ने कक्षा दस उत्तीर्ण सभी विद्यार्थियों को टैबलेट देने का ऐलान किया था। सरकार ने पहले साल इस ओर तेजी से कार्यवाही की बातें कीं, मगर इस पर भी अमल नहीं हुआ। सरकार ने 2012 में जिन हाईस्कूल उत्तीर्ण विद्यार्थियों को टैबलेट देने का वादा किया था, वे 2017 के चुनाव में मतदान की कतार में शामिल होंगे।
9. रिक्शाचालकों को बैटरी-रिक्शा : सपा ने घोषणा पत्र में सरकार बनने पर हर रिक्शा चालक को मोटर तथा सोलर एनर्जी से चार्ज होने वाला अत्याधुनिक रिक्शा मुफ्त देने का वादा किया था। सरकार ने इस रिक्शे का ट्रायल भी कराया, पर रिक्शाचालकों को आज भी मुफ्त बैटरी-रिक्शा का इंतजार है।
छात्रसंघ पर और मुसलमानों से किया वादा भी नहीं निभाया
10. छात्रसंघ चुनाव : रोक हटी, मनमर्जी बढ़ी वादा था कि सभी विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में छात्रसंघों का गठन होगा जो सीधे निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा संचालित होगा। सरकार ने छात्रसंघ चुनाव पर लगी रोक तो हटा ली लेकिन तमाम उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रसंघ चुनाव नहीं हो पा रहे हैं। शिक्षण संस्थानों व छात्रों के बीच टकराव के मामले सामने आते रहते हैं।
11. मुसलमानों को आरक्षण : योजनाओं में मात्रात्मक आरक्षण तक सीमित सपा ने सच्चर कमेटी की सिफारिशों के अनुसार सभी मुसलमानों को आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से अत्यधिक पिछड़ा मानते हुए दलितों की तरह जनसंख्या के आधार पर अलग से आरक्षण का वादा किया था। अभी तक यह वादा अधूरा है। हालांकि सरकार ने सूबे की योजनाओं में अल्पसंख्यकों को 20 प्रतिशत मात्रात्मक आरक्षण देने की पहल जरूर की है।
12. बेरोजगारी भत्ता: सपा ने 35 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले बेरोजगार युवाओं को सालाना 12 हजार रुपये बेरोजगारी भत्ता देने की बात कही थी। सरकार ने 2012 में इस शर्त को पूरा करने वाले युवाओं को तो बेरोजगारी भत्ता दिया लेकिन बाद के वर्षों में बेरोजगारों को भत्ता नहीं दिया गया।