लखनऊ। योगी सरकार की प्राथमिकता में शामिल धान खरीद को लेकर जिम्मेदार पूरी तरह उदासीनता बरत रहे हैं। जिले में धान खरीद को बने 22 केंद्रों में से 12 का संचालन बंद करा दिया गया है जबकि अन्य केंद्रों पर पोर्टल का संचालन न हो पाने से खरीद से लेकर भुगतान तक का कार्य बाधित है। इससे 28 फरवरी तक चलने वाली सरकारी धान खरीद के एक माह पहले ही थम जाने से किसान परेशान हैं। पीसीएफ व विपणन शाखा से जुड़े 90 फीसदी खरीद केंद्रों पर खरीद एक माह से बंद पड़ी है। जिन केंद्रों का संचालन हो भी रहा है, वहां भी पोर्टल बंद होने की बात कहकर किसानों को लौटाया जा रहा हैं। इसके चलते सैकड़ों किसानों के धान का भुगतान भी अटका पड़ा है।
15 अक्तूबर 2020 से 28 फरवरी 2021 तक जिले में चलने वाली सरकारी धान की खरीद के लिए 22 केंद्रों का निर्धारण किया गया था। इनमें पीसीएफ के 12, विपणन इकाई के 9 और और एफसीआई का एक खरीद केंद्र संचालित था। पीसीएफ के 7, विपणन के 4 व एफसीआई के बने एकमात्र खरीद केंद्र का संचालन पूरी तरह बंद हो गया है। वहीं धान खरीद कार्य की निगरानी से जुड़े आरएफसी के डिप्टी आरएमओ निश्चल आनंद ने बताया कि सिर्फ 12 क्रय केन्द्रों पर ही खरीद का कार्य बंद हुआ है बाकीअन्य केंद्रों पर खरीद व भुगतान का कार्य हो रहा है। इन केंद्रों पर संचालित विभागीय पोर्टल में फाल्ट आने से कुछ दिन पहले खुले केंद्रों के कामकाज में कुछ परेशानी रही। फाल्ट को दुरुस्त कराकर पोर्टल का संचालन पुन: शुरू किया जा रहा है।
खरीद का 1.62 करोड़ का भुगतान बाकी
जिले के आठ ब्लॉक क्षेत्रों में संचालित 22 खरीद केंद्रों पर धान बेचने वाले किसानों को भुगतान की जाने वाली 1.62 करोड़ की राशि अटकी है। बीकेटी मोहनलालगंज, मलिहाबाद, सरोजनीनगर व मोहनलालगंज ब्लॉक से जुड़े किसानों का कहना है कि गत एक माह से भुगतान की बकाया राशि को लेकर खरीद केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। कभी सर्वर डाउन होने से पोर्टल न चलने तो कभी केंद्र पर ताला बंद होने के कारण लौटना पड़ रहा है। हालांकि विभागीय अधिकारी बताते हैं कि अब तक हुई खरीद के एवज में 5274 धान किसानों को 39.13 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है।
चार माह बाद भी किसानों से नहीं खरीदा गया धान
बख्शी का तालाब में सीतापुर रोड पर स्थित धान क्रय केंद्र में पिछले तीन दिन से धान डंप होने के कारण खरीद बंद है। किसानों को लौटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। नगवामऊ कला निवासी किसान मो. रईस और गुड्डू ने बताया कि उन्होंने केंद्र पर धान बेचने के लिए चार महीने पहले पंजीकरण कराया था। इसके बाद वह लगातार केंद्र का चक्कर काट रहे हैं लेकिन अभी तक धान खरीदा नहीं गया है।
गुड्डू ने बताया कि उनका करीब 50 क्विंटल धान बेचने के लिए चार माह से घर में ही रखा है। इसी तरह के आरोप अन्य किसानों ने भी लगाए। किसानों का आरोप है कि पंजीकरण कराने के बाद से वह अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। एसडीएम नवीन चंद्र का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है, वह जल्द ही संबंधित अधिकारियों से वार्ता कर किसानों की समस्याओं का समाधान कराएंगे।