प्रदेश की बिजली व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त करने के लिए पावर कॉर्पोरेशन विश्व बैंक से 62 अरब 41 करोड़ रुपये (1000 मिलियन डॉलर) कर्ज लेने जा रहा है।
इसमें से 31 अरब रुपये स्मार्ट मीटरिंग व वितरण नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण तथा बाकी ट्रांसमिशन नेटवर्क के लिए लेने की योजना है।
इसके लिए पावर कॉर्पोरेशन ने प्रस्ताव तैयार करके वित्त विभाग को भेज दिया है।
वित्त विभाग से इस प्रस्ताव को भारत सरकार को जल्द भेजने का अनुरोध किया गया है ताकि अगले वित्त वर्ष में विश्व बैंक से वित्त पोषित कराई जाने वाली परियोजनाओं में इसे भी शामिल किया जा सके।
बिजली उत्पादन के क्षेत्र में तो विश्व बैंक वित्तीय मदद देने को तैयार नहीं है लेकिन वितरण और ट्रांसमिशन के लिए उसने सकारात्मक रुख दिखाया है।
भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार पूरे प्रदेश में स्मार्ट मीटरिंग के साथ-साथ पुनरीक्षित त्वरित विद्युत विकास एवं सुधार कार्यक्रम (आरएपीडीआरपी) में शामिल होने से छूट गए 460 नगरों में वितरण व्यवस्था के सुदढ़ीकरण के लिए 31 अरब रुपये की सहायता मांगी जा रही है।
इसके तहत वितरण व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त करने के साथ ही बिजली चोरी रोकने के लिए ट्रांसफार्मरों पर मीटर लगवाने की योजना बनाई गई है।
नए वितरण उपकेंद्रों और उससे संबंधित लाइनों का निर्माण भी प्रस्तावित है ताकि ओवरलोडिंग की समस्या समाप्त हो सके।
वितरण के अलावा ट्रांसमिशन नेटवर्क मजबूत करने के लिए 220 व 400 केवी क्षमता के नए उपकेंद्रों और लाइनों के निर्माण के लिए भी 31 अरब रुपये की सहायता मांगी जा रही है।
कॉर्पोरेशन के अधिकारियों का कहना है कि विश्व बैंक से सहायता लेने का प्रस्ताव तैयार करके वित्त विभाग को भेज दिया गया है।
वहां से हरी झंडी मिलने केबाद शासन की ओर से इसे वाह्य सहायतित योजनाओं में शामिल करके केंद्र को भेजा जाएगा।