लर्नर लाइसेंस की फेसलेस व्यवस्था की गड़बड़ियां आवेदकों के लिए मुसीबत बनी हुई हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय(मोर्थ) ने ऑनलाइन व्यवस्था की जिम्मेदारी एनआईसी को दी है। लाइसेंस बनवाने के लिए दस प्रमाणपत्रों को मान्यता दी गई है। लेकिन एनआईसी के सॉफ्टवेयर सारथी पोर्टल पर आधारकार्ड अनिवार्य है, जिससे आवेदकों को लाइसेंस बनवाने में दिक्कतें पेश आती हैं।
फेसलेस होने के बाद सारथी पोर्टल अब मोटर व्हीकल एक्ट को भी दरकिनार कर रहा है। एक्ट के मुताबिक लाइसेंस के लिए करीब 10 प्रमाणपत्र मान्य हैं। इसमें वोटर आईडी, आधार कार्ड, लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी, पासपोर्ट, केंद्र-राज्य या स्थानीय प्रशासन की ओर जारी पे स्लिप, स्कूल प्रमाणपत्र, जन्म प्रमाणपत्र, मेडिकल प्रैक्टिशनर की ओर जारी प्रमाणपत्र, राज्य सरकार की ओर से जारी प्रमाणपत्र आदि।
ऊपर लिखे प्रमाणपत्र लर्नर लाइसेंस में इस्तेमाल करने की मान्यता है। लेकिन, वर्ष 2022 में जब घर बैठे लर्नर लाइसेंस व्यवस्था बनाई गई तो कहा गया कि आधार कार्ड अनिवार्य रहेगा। आरटीओ जाकर लाइसेंस बनवाने वालों के लिए यह ऐच्छिक रहेगा। चूंकि आरटीओ में सिर्फ वीआईपी स्लॉट के लर्नर लाइसेंस बनते हैं, शेष ऑनलाइन बनवाने होते हैं। इससे आवेदकों के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।
नौकरीपेशा लोगों के लिए मुसीबत अधिक
फेसलेस लर्नर लाइसेंस में नौकरीपेशा सर्वाधिक दिक्कतों का सामना करते हैं। उन्हें अपने मूल जिले जाना पड़ता है। व्यवस्था के तहत अन्य प्रमाणपत्र स्वीकार नहीं होंगे। जबकि उसके पास लखनऊ के कार्यालय या कॉलेज का प्रमाणपत्र है। ट्रांसपोर्टनगर स्थिति आरटीओ में रोजाना ऐसे आवेदक अपनी परेशानी लेकर आते हैं। वे मोटर व्हीकल एक्ट का हवाला भी देते हैं। लेकिन स्थायी लाइसेंस के लिए मूल पते वाले जिले में ही जाना पड़ता है।
आधार अपलोडिंग में भी दिक्कतें
आवेदक बताते हैं कि नए आधारकार्ड में पिता का नाम नहीं दर्ज हो रहा है। इससे फॉर्म अपलोडिंग में दिक्कतें आती हैं। इसके अलावा नाम में स्पेशल कैरेक्टर है तो पोर्टल उसे लोड नहीं करता। डॉट, Smt. Km. आदि होने पर भी हो रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आवेदक जाएं तो कहां जाएं।