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Sawan 2024: सावन में शिवलिंग पर चढ़ाएं ये पांच चीजें, देखें भगवान शिव के जलाभिषेक का वीडियो

Mon, 22 Jul 2024 02:04 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Sawan 2024 Puja Vidhi in Hindi: आज से सावन का महीना शुरू हो रहा है। इस वर्ष सावन का महीना 29 दिनों का होगा। पवित्र महीना सावन 22 जुलाई से प्रारंभ होकर 19 अगस्त तक चलेगा। इस बार सावन का महीना बहुत ही शुभ और दुर्लभ योग में शुरू हुआ है। सावन महीने की शुरुआत सोमवार से और इसका समापन भी सोमवार के दिन होगा। सावन में भगवान शिव की आराधना और पूजा करने पर विशेष लाभ मिलता है। 
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सावन माह आज से प्रारंभ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आज से भगवान भोलेनाथ का सबसे प्रिय महीना सावन शुरू हो रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना करने पर शुभ फल की प्राप्ति होती है और हर तरह की मनोकामनाएं पूरी होती है। इस बार सावन के महीने में पांच  सोमवार पड़ रहे हैं। इसके अलावा कई तरह के शुभ संयोग जैसे सर्वार्थसिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और रवि योग भी बन रहा है। सावन की शुरुआत सोमवार के दिन हो रही है और समापन भी सोमवार के दिन होगा। सावन में भगवान शिव की पूजा अर्चना करने पर शुभ फलों की प्राप्ति होती है। शिवपुराण के अनुसार सावन के महीने में अगर भगवान शिव को एक लोटा जल और बेलपत्र अर्पित कर दिया जाय तो भक्तों की हर एक मनोकामना पूरी कर देते हैं। आइए जानते हैं इस सावन महापर्व की पूजा की संपूर्ण विधि, मंत्र, कथा और महत्व के बारे में विस्तार से.... 

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Sawan Somwar 2024 Live: सावन के पहले सोमवार पर काशी विश्वनाथ में भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना

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Sawan 2024: सावन के पहले सोमवार पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में महाकाल की आरती

उज्जैन के महाकाल मंदिर में सावन के पहले सोमवार पर महादेव की पूजा आराधना का नजारा

Sawan Somwar 2024: सावन माह में होंगे पांच सोमवार 

आज से सावन का महीना शुरू हो चुका है। सावन में शिव आराधना और पूजा पाठ करने का विशेष महत्व होता है। सावन में भगवान भोलेनाथ की पूजा करने से सभी तरह की मनोकामनाएं जल्द से जल्द पूरी होती हैं। इस बार सावन माह में पांच सोमवार आएंगे। सावन सोमवार में व्रत रखना और शिव उपासना करने पर जीवन में हर तरह की इच्छाएं पूरी होती है।

सावन सोमवार 2024 की तिथियां

सावन का पहला सोमवार व्रत- 22 जुलाई 
सावन का दूसरा सोमवार व्रत- 29 जुलाई
सावन का तीसरा सोमवार व्रत- 05 अगस्त 
सावन का चौथा सोमवार व्रत-  12 अगस्त 
सावन का पांचवां सोमवार व्रत- 19 अगस्त

Sawan Somwar 2024: जानें आज सावन पर कौन-कौन से दुर्लभ योग बने

आज से सावन का पवित्र महीना शुरू हो चुका है। 22 जुलाई से सावन का महीना प्रारंभ होकर 19 अगस्त तक चलेगा। इस वर्ष सावन में करीब 72 वर्षों बाद दोबारा से ऐसा संयोग बना है जब सावन महीने की शुरुआत सोमवार से हो रही है और इसका समापन भी सोमवार के दिन से होगा। इस बार सावन में 5 सोमवार व्रत और 4 मंगला व्रत रख जाएंगे। इसके अलावा सावन में कई तरह के शुभ और दुर्लभ संयोग भी बन रहे हैं। सावन में सर्वार्थसिद्धि, अमृतसिद्धि  और रवि योग का निर्माण हो रहा है। इस कारण से सावन का महीना बहुत ही विशेष लाभकारी साबित होगा।  

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Sawan Puja Vidhi: शिव साधना के लिए उत्तम महीना है सावन, ऐसे करें भोलेभंडारी का अभिषेक

शिव भक्तों को सावन के महीने का बेसब्री से इंतजार हर साल रहता है। 22 जुलाई से सावन का पवित्र महीना शुरू हो चुका है। सुबह से ही शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ एकत्रित होने शुरू हो चुकी है। सावन माह में शिव जी जलाभिषेक करने का विशेष महत्व होता है। शिव पुराण में अलग-अलग मनोकामना के लिए शिव जी की पूजा की विधि बताई गई है। 
  • विवाह की इच्छा रखने वालों को दूध, बेलपत्र, गंगाजल, शमीपत्र, नारियल पानी, भांग, खोये की मिठाई तथा गुलाबी रंग के गुलाल से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए।
  • संतान की प्राप्ति के लिए जल से अभिषेक करना शुभ होता है। 
  • गन्ने के रस से यश की प्राप्ति होती है।
  • शहद से कर्ज से मुक्ति मिलती है।
  • कुश के जल से रोगों से मुक्ति मिलती है।
  • पंचामृत से अष्टलक्ष्मी व तीर्थों के जल से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • भांग चढाने से बुराइयां और मन के विकार दूर होते हैं।
  • कुशाग्र बुद्धि के लिए विद्यार्थियों को शर्करा मिश्रित दुग्ध की धारा चढ़ानी चाहिए।
  • गंगाजल से अभिषेक करने पर भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।
  • Sawan Somwar 2024: शिव आराधना का पवित्र महीना सावन आज से शुरू, कैसे करें शिव उपासन

Sawan Importance: श्रावण माह का महत्व

हिंदू धर्म ग्रंथों में सावन के महीने का विशेष महत्व बताया गया है। श्रावण मास में शिव पूजा और आराधना विशेष रूप से फलदाई होती है। सावन माह के हर एक दिन विशेषकर सावन सोमवार पर शिव उपासना करना बहुत ही शुभ साबित होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसारदेवी पार्वती ने भगवान शिव को पतिरूप में पाने के लिए कठोर व्रत,उपवास करके भगवान शिव को श्रावण माह में ही पुनः पाया। श्रावण के महीने में शिव की अर्चना करने से धरती पर भी सभी दुखों का शमन होता है।ऐसा माना जाता है कि इस माह में की गयी शिव पूजा तत्काल शुभ फलदायी होती है। श्रावण मास में सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन और जलाभिषेक करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है। 
 

शिवजी को क्यों अर्पित किया जाता है बेलपत्र

आज से पवित्र महीना सावन शुरू हो चुका है। सावन का महीना महादेव की पूजा-अर्चना के लिए सबसे खास होता है। इस माह में शिवजी जी पूजा करने पर वे जल्द ही प्रसन्न होते हैं। सावन के महीना भगवान भोलेभंडारी को विशेष रूप से प्रिय होता है। भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए गंगाजल, दूध, शहद, घी,भांग धतूरा और बेल पत्र चढ़ाया जाता है शास्त्रों में शिवलिंग पर बिल्वपत्र अर्पित करने का बहुत महत्व बताया गया है। शिवपुराण के अनुसार शिवलिंग पर  बेलपत्र चढ़ाने से मनुष्य अपनी सारी मनोकामनाएं जरूर पूरी होती है।
 

Sawan Mahina 2024: यहां करें 12 ज्योतिर्लिंगों के एक साथ दर्शन

12 Jyotirlinga Darshan - फोटो : अमर उजाला
आज स सावन का महीना प्रारंभ हो गया है। सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत ही प्रिय होता है। सावन माह में शिव जी का उपासना और साधना करने का विशेष महत्व होता है। सावन माह के हर एक दिन भगवान शिव से जुड़े मंत्रों का जाप करना और शिव मंदिर जाकर महादेव के दर्शन कर बहुत ही फलदायी माना जाता है। सावन में भगवान शिव के सभी 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पूजन करने की मान्यता है। शिवजी को आदिदेव कहा जाता है क्योंकि इस संसार के पहले देव शिव जी हीं हैं। धरती पर शिव जी के प्रकट होने वाले जगहों पर जहां पर ज्योति के रूप में शिवलिंग का आकृतियां प्रकट हुई वहीं शिव जी के 12 ज्योतिर्लिंग कहलाए। सावन माह में सभी ज्योतिर्लिंगों की पूजा का खास महत्व होता है। सावन के पहले सोमवार और सावन माह के शुरुआत मौके पर आइए दर्शन करते हैं सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के...






















Shivji Ki Aarti: ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा...

आज से पवित्र सावन का महीना शुरू हो चुका है। श्रावण माह इस बार 29 दिनों तक चलेगा। सावन के महीने में शिव उपासना का विशेष महत्व होता है। सावन में हर एक दिन सुबह-सुबह शिव मंदिर जाकर भोलेनाथ का जल और पुष्प चढ़ाने का विधान होता है। इसके अलावा पूजा के दौरान शिवजी और माता पार्वती जी की आरती भी की जाती है। 
शिव जी की आरती 

ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।

लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।

जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।

काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।

त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।

Shiva Chalisa Path: सावन में पढे़ं श्री शिव चालीसा का पाठ

शिव चालीसा 

॥ दोहा ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन,
मंगल मूल सुजान ।
कहत अयोध्यादास तुम,
देहु अभय वरदान ॥

॥ चौपाई ॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला ।
सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥

भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।
कानन कुण्डल नागफनी के ॥

अंग गौर शिर गंग बहाये ।
मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।
छवि को देखि नाग मन मोहे ॥ 

मैना मातु की हवे दुलारी ।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी ।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ।
सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥

कार्तिक श्याम और गणराऊ ।
या छवि को कहि जात न काऊ ॥ 

देवन जबहीं जाय पुकारा ।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥

किया उपद्रव तारक भारी ।
देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥

तुरत षडानन आप पठायउ ।
लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥

आप जलंधर असुर संहारा ।
सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥ 

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ।
सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥

किया तपहिं भागीरथ भारी ।
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ।
सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥

वेद नाम महिमा तव गाई।
अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥ 

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ।
जरत सुरासुर भए विहाला ॥

कीन्ही दया तहं करी सहाई ।
नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा ।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥

सहस कमल में हो रहे धारी ।
कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥ 

एक कमल प्रभु राखेउ जोई ।
कमल नयन पूजन चहं सोई ॥

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ।
भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी ।
करत कृपा सब के घटवासी ॥

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।
भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥ 

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ।
येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ।
संकट से मोहि आन उबारो ॥

मात-पिता भ्राता सब होई ।
संकट में पूछत नहिं कोई ॥

स्वामी एक है आस तुम्हारी ।
आय हरहु मम संकट भारी ॥ 

धन निर्धन को देत सदा हीं ।
जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥

अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥

शंकर हो संकट के नाशन ।
मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ।
शारद नारद शीश नवावैं ॥ 

नमो नमो जय नमः शिवाय ।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥

जो यह पाठ करे मन लाई ।
ता पर होत है शम्भु सहाई ॥

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ।
पाठ करे सो पावन हारी ॥

पुत्र हीन कर इच्छा जोई ।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥ 

पण्डित त्रयोदशी को लावे ।
ध्यान पूर्वक होम करावे ॥

त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ।
ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥

जन्म जन्म के पाप नसावे ।
अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥ 

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ।
जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥

॥ दोहा ॥
नित्त नेम कर प्रातः ही,
पाठ करौं चालीसा ।
तुम मेरी मनोकामना,
पूर्ण करो जगदीश ॥

मगसर छठि हेमन्त ॠतु,
संवत चौसठ जान ।
अस्तुति चालीसा शिवहि,
पूर्ण कीन कल्याण ॥

Sawan Puja Samagri List: सावन पूजा सामग्री

सावन का पवित्र महीना शुरू हो चुका है। इस बार सावन का महीना 29 दिनों तक चलेगा, जिसमें पांच सावन सोमवार व्रत रखे जाएंगे। 19 अगस्त को सावन खत्म हो जाएगा। सावन के महीने में शिवजी की पूजा का विशेष महत्व होता है। सावन के महीने में हर एक दिन घर और मंदिर में शिवजी की उपासना जरूर करनी चाहिए। आइए जानते हैं शिवजी की पूजा उपासना में कौन-कौन सी पूजा साम्रगी को शामिल करते हैं।  गंगाजल, तांबे का लोटा, जल,दूध,घी, दही,शहद, बिल्ब पत्र, शमी पत्र, जनेऊ, धूतरा, भांग, भस्म, इत्र,दूर्वा और मिठाई

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Video Sawan Shiv Temple: सावन के पहले दिन शिवालयों में भोलेभंडारी का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना जारी...

सावन के पहले दिन काशी विश्वनाथ और उज्जैन महाकालेश्वर समेत कई शिव मंदिरों में किया जा रहा है महादेव का जलाभिषेक...
 
 
 
 

Sawan Katha: सावन में क्यों होती है भगवान शिव की विशेष पूजा

22 जुलाई से पवित्र सावन का महीना शुरू हो चुका है। सभी शिवभक्तों को इस माह के इंतजार होता है। सावन के महीने में शिव मंदिरों में भारी शिवभक्तों की भीड़ जुटती है। सावन माह में रोजाना और विशेषकर सावन सोमवार और मासिक शिवरात्रि पर भक्त अपने आराध्य देव, देव के देव महादेव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और साधना विधि विधान के साथ करते हैं। शास्त्रों के अनुसार  ''रुतम -दुःखम द्रावयति-नाशयतीति रुद्रः' यानि भगवान शिव सभी दुखों को नष्ट कर देते हैं। श्रावण में शिव की अर्चना करेंगे तो धरती पर भी सभी दुखों का शमन होगा। ऐसा माना जाता है कि इस माह में की गयी शिव पूजा तत्काल शुभ फलदायी होती है। इसके पीछे स्वयं शिव का ही वरदान ही है। सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस मास से तीन पौराणिक कथाएं हैं।

पहली कथा-पार्वतीजी की तपस्या से शिवजी हुए थे प्रसन्न
दूसरी कथा- श्रावण मास में हुआ था समुद्र मंथन
तीसरी कथा- श्रीराम ने किया महादेव का अभिषेक

Sawan 2024: सावन में जरूर करें इन मंत्रों का जाप

महादेव की पूजा-आराधना करते समय आप इन मंत्रों का कर सकते हैं जप...

ॐ नमः शिवाय।
नमो नीलकण्ठाय।
ॐ पार्वतीपतये नमः।


ओम साधो जातये नम:।। ओम वाम देवाय नम:।।
ओम अघोराय नम:।। ओम तत्पुरूषाय नम:।।
ओम ईशानाय नम:।। ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।।

महामृत्युंजय मंत्र
ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। 
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ।।

Sawan Month 2024: सावन में हरा रंग क्यों पहनते हैं ? 

हिंदू धर्म में सावन के महीने को बहुत ही पवित्र और शुभ माना गया है। सावन के महीने में भोलेनाथ की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है। इस पूरे माह शिव मंदिरों में शिवभक्तों की भारी भीड़ एकत्रित होती है। सावन का महीने में हरे रंग का विशेष महत्व होता है। जिसके कारण हरे रंग के वस्त्र पहनने की परंपरा होती है। सावन के महीने में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से सुहागिनों को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। क्या आपको मालूम है कि सावन के महीने में हरे रंग का क्या महत्व होता है। आइए जानते हैं। 
  • सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है और हरा रंग भगवान शिव का प्रिय रंग है। हरा रंग प्रकृति का प्रतीक है और प्रकृति, देवी पार्वती का ही स्वरूप है।
  • सावन के महीने में हरा रंग पहनने से भगवान शिव और मां पार्वती की कृपा प्राप्त होती है।
  • सावन का महीना वर्षा ऋतु का महीना होता है, जिसमें चारों ओर हरियाली छा जाती है।
  • हरा रंग पहनकर हम प्रकृति का सम्मान करते हैं और उसके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
  • ज्योतिष में हरे रंग को बुध ग्रह से संबंधित माना जाता है।

सावन माह में राशि के अनुसार शिवलिंग की करें पूजा

मेष और वृश्चिक राशि
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी ग्रह मंगल होते हैं। इन दोनों ही राशि के लोग शिवलिंग का अभिषेक दही से करें। इसके अलावा आप शिवलिंग पर लाल गुलाल और मसूर की दाल अर्पित करें। 

वृषभ और तुला राशि वाले ऐसे करें शिवजी की पूजा

इन दोनों ही राशि के स्वामी ग्रह शुक्रदेव होते हैं। ऐसे में कुंडली में मौजूद दोषों को दूर करने के लिए शिवलिंग का दूध और जल से अभिषेक करें। साथ ही नंदी बैल के दर्शन और पूजन भी करें।

मिथुन और कन्या राशि के लोग शिवजी को ऐसे करें प्रसन्न

इन दोनों ही राशियों के स्वामी बुधदेव होते हैं। ऐसे में सावन के महीने में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा में कनेर, बिल्ब पत्र, दूर्वा और चंदन से अभिषेक करें। साथ ही हरे चारे और मूंग दाल का दान करें। 

कर्क और सिंह राशि के लोग शिवलिंग पर चढ़ाएं ये चीजें

कर्क राशि के स्वामी ग्रह चंद्रमा और सिंह राशि के स्वामी ग्रह सूर्य देव होते हैं। ऐसे में कर्क राशि के लोग भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए दूध और दही अर्पित करें। वही सिंह राशि के लोग शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और सूर्यदेव को अर्घ्य दें। 

धनु और मीन राशि के जातक शिवलिंग पर ये चढ़ाएं

इन दोनों ही राशियों के स्वामी ग्रह गुरु होते हैं। ऐसे में सावन के महीने में शिवजी की आराधना करने के लिए शिवलिंग पर पीले रंग के फूल, पीली मिठाई और पीले वस्त्र अर्पित करें। 

मकर और कुंभ राशि के लोग ऐसे करें शिवजी को प्रसन्न 

मकर और कुंभ राशि के स्वामी ग्रह शनिदेव होते हैं। सावन में भगवान शिव और शनिदेव दोनों को ही प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग पर नीले रंग का फूल और काला तिल अर्पित करें। 
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Sawan 2024: शिवलिंग पर चढ़ाएं यह 5 चीजें, भोलेबाबा होंगे प्रसन्न

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के महीने में भगवान शिव जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं, इसलिए भोलेनाथ से जीवन में सुख-समृद्धि और संपन्नता का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए शिवलिंग पर कई चीजों को चढ़ाया जाता है। जानते है शिव लिंग पर किन-किन चीजों का अर्पित किया जा सकता है। 

1- शिवलिंग पर अक्षत चढ़ाएं- इस व्यक्ति की आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिलता है। 
2- शिवजी को चढ़ाएं काला तिल- शास्त्रों में शिवलिंग पर काला तिल चढ़ाने की परंपरा होती है। काला तिल चढ़ाने से पितृदोष शांत होता है और पितरों का आशीर्वाद हासिल होता है। 
3- शमी का पत्ता करें अर्पित- सावन में शिवलिंग पर शमी के पौधे का पत्ता चढ़ाने पर शिवजी के साथ शनि महाराज भी प्रसन्न होते हैं।
4- शिवजी को चढ़ाएं बेलपत्र- भगवान शिव को बेलपत्र बहुत ही प्रिय होता है। बेलपत्र चढ़ाने से भगवान भोलेनाथ जल्द प्रसन्न होते हैं। 
5- शिवलिंग पर गेहूं- शिवलिंग पर गेंहू चढ़ाना बहुत ही शुभ माना जाता है। 
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