छिंदवाड़ा में गरजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जेपी नड्डा के साथ छिंदवाड़ा पहुंचे। उन्होंने संबोधित करते हुए कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपकी और हमारी लड़ाई एक है। कमलनाथ कहते हैं, हम 45 साल से यहां तपस्या कर रहे हैं। लेकिन आप तपस्या नहीं, समस्या कर रहे हो।छिंदवाड़ा में आज तक जितने भी सांसद बने हैं वह बाहर के ही बने हैं। कांग्रेस छिंदवाड़ा के व्यक्ति को सांसद नहीं बनने देती। यहां का हर नागरिक साथ है, हम सब मिलकर तय करें, "अबकी बार छिंदवाड़ा पार"। हम सबने तय कर लिया है। छिंदवाड़ा में कमल खिलकर रहेगा। सीएम ने आश्वस्त करते हुए कहा कि छिंदवाड़ा के अंदर जो विकास कार्य आवश्यक हैं, उसे भाजपा की सरकार पूरा करेगी।
विपक्ष पर साधा निशाना
पहले राजनीति होती थी धर्म को लेकर, इलाके को लेकर, अगड़े-पिछड़े की होती थी। भाई से भाई को लड़ाने का काम करता थी कांग्रेस। अब विकास की बात पर राजनीति हो रही है। मोदीजी ने तस्वीर बदली है। लोग विकास से जुड़ना चाहते हैं। अब न धर्म के आधार पर, न जाति के आधार पर, न ही वोट बैंक की पॉलिटिक्स के आधार, अब राजनीति हो रही है तो विकासवाद की हो रही है। रिपोर्ट का्ड की राजनीति हो रही है. आपने देखा होगा कि विपक्ष बौखलाया हुआ है। वे नए-नए तरीके से समाज को विघटित करने की कोशिश कर रहे हैं। अभी-अभी इंडी गठबंधन ने आवाज उठाई कि जातिगत जनगणना होना चाहिए। भाजपा इसके विरोध में नहीं हैं, पर उनका मकसद जातियों में बांटना है।
मोदी शासन में बदली है देश की स्थिति
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा पहुंचे। चुनावी सभा को संबोधित किया। जेपी नड्डा ने वीरांगनाओं के नमन कर अपनी बात शुरू की। उन्होंने कहा कि हमने मप्र के दो रूप देखे, एक रूप वो था, जिसमें इस इलाके के नेता नेतृत्व किया। तब बीमारू राज्य था। आज मुझे खुशी है यही बीमारू राज्य 20 साल के भाजपा के राज्य में अग्रणी राज्य बन गया। इस राज्य को बढ़ाने में भारत सरकार ने, पीएम मोदी ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। इसको आगे बढ़ाया है। जब मैं ये बात करता हूं तो देखें कि 2014 के पहले की देश की तस्वीर देखें। जब तक आपको अंधेरे का अंदाजा नहीं होगा, तब तक उजाले का महत्व नहीं समझेंगे। जब तक विनाश नहीं देखा, तब तक विकास समझ नहीं आया। जब तक आपने अमावस की काली रात नहीं देखी, पूरमासी का महतव समझ नहीं आता। पहले आए दिन घोटाले होते थे। आए दिन आतंकवादी घटनाएं होती थीं। नीतियां एयरकंडीशंड रूम में बना करती थीं। जिसे हकीकत से कोई लेना देना नहीं था। विकास से कोई वास्ता नहीं था। किसान आत्महत्या करते थे। युवाओं को भटकते देखा। हमने दस साल मोदीजी के भी देखे। ये दस साल विकास के थे, ये दस साल हमने किसानों को मजबूत होते देखा, महिलाओं का सशक्तिकरण होते देखा।