यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि लोकसभा चुनाव 2024 में यूपी में भाजपा के सामने कोई चुनौती नहीं है। उन्होंने कहा कि सपा-कांग्रेस की कलई उतर चुकी है। यूपी के दोनों लड़कों (कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव) कोई कमाल नहीं दिखा पाएंगे।
यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि हम पार्टी लाइन को ध्यान में ना रखकर भी वंचितों की मदद करते हैं। लखनऊ विवि. में सबसे पहले लॉ प्रतिनिधि चुना गया। जीवन का उद्देश्य था कि हम लोगों की सेवा करें। हमारे यहां जो भी आए जाए हम उसकी मदद करते हैं। जो पीड़ित है वह मेरा भाई है और हम उसकी मदद करते हैं।
सवाल: 1986 में आपको दौड़ने समय कैसा लग रहा था?
पीटी उषा: उस समय जो उपलब्धि हासिल हुई थी वह शानदार थी। मेरे लिए गर्व का समय था। मैं हमेशा ठीक से दौड़ती थी। मेरे कोच हमेशा मुझे मदद करते थे। मैं जब दौड़ने के लिए जाती थी तो सिर्फ जीत के बारे में सोचती थी।
टाइगर श्रॉफ ने कहा कि मैं बचपन से एक्शन करते आया हूं। बचपन से अक्षय सर, जैकी चेन की फिल्में देखकर सीखे हैं। यह मेरे लिए नशा है।
अक्षय कुमार ने कहा कि हमारी ऑडिएंस टिकट खरीदकर आती है तो उन्हें रियल सीन चाहिए, नहीं तो यह उन्हें धोखा देने जैसा होगा। जहां जान से भी ज्यादा खतरा होता है, वहां VFX होते हैं। इस मूवी में हमने धमाकों के बीच सीन किए हैं। मैं नहीं चाहता कि मेरे दर्शक धोखा महसूस करें। हम दोनों को एक्शन करने में मजा आता है और हमें इसके लिए पैसे भी मिलते हैं, प्रोड्यूसर इसके लिए अच्छी जगहों पर ले जाता है तो इससे ज्यादा और क्या चाहिए।
अक्षय कुमार ने कहा कि हां, उस मूवी में मेरा दिमाग खराब था। प्लेन के विंग्स से बैलून पर कूदा था। जोश-जोश में मैंने कर दिया। विंग्स पर खड़े होने तक ठीक था। वहां से कूदना सही नहीं था। अब होता तो शायद VFX का इस्तेमाल होता।
टाइगर श्राफ ने कहा कि मेरी पसंदीदा हिंदी एक्शन फिल्म युद्ध थी, जिसमें मेरे पिता जैकी श्रॉफ थे। अक्षय सर के स्टंट का भी मैं फैन हूं। मुझे फ्लाइट में बैठने का फोबिया है। खिलाड़ी 420 मूवी में वे प्लेन के विंग्स पर खड़े थे और स्टंट कर रहे थे। उनसे काफी कुछ सीखने का मौका मिला है।
अक्षय कुमार ने कहा कि महिलाओं के लिए सबसे अहम बात है कि जब कोई उन पर हमला करे, तो वे क्या करें। उन्हें पलटवार करते आना चाहिए। जब कोई आदमी महिला पर हमला करता है तो वह खुद सबसे ज्यादा डरा हुआ होता है। अगर महिला चीखे, तो आदमी भाग जाएगा। पत्थर तलाशिए और उससे हमला कीजिए। एकदम फ्रीज मत हो जाइए। 1.20 लाख महिलाओं को हमने एक अकादमी के जरिए आत्मसुरक्षा सिखाई है। एक मामले में महिला ने इसी तरह बचाव किया और हमला करने वाला भाग निकला।
अक्षय कुमार ने कहा कि मार्शल आर्ट सिर्फ फिल्मों के लिए नहीं होता, वह जिंदगी के लिए होता है। यह आत्म अनुशासन होता है जो सबके लिए जरूरी होता है। मैं कहना चाहता हूं कि बच्चों को यह सीखना चाहिए। देश में कम से कम तीन से चार साल के लिए मार्शल आर्ट अनिवार्य होना चाहिए। अनुशासन सबसे जरूरी है जो इससे सीखने को मिलता है। मुझे पता चल रहा है कि यूपी में भी धीरे-धीरे अनुशान आ रहा है। मुझे लगता है कि यहां भी एक परफेक्ट मार्शल आर्ट लीडर है जो लोगों को ठीक से प्रशिक्षित कर रहा है।
टाइगर श्रॉफ: वहां हम बहुत मेहनत कर रहे थे। इसलिए वहां ज्यादा ठंड नहीं लग रही थी। मैं रिकवरी के लिए आइस बाथ और कोल्ड शॉवर लेता हूं।
अक्षय कुमार: हम डांस सीक्वेंस कर रहे थे, तो ठंड नहीं लगी।
टाइगर श्राफ ने कहा कि डैडी की फिल्म युद्ध मुझे काफी पंसद है। इस दौरान उन्होंने कहा कि मुझे काफी मजा आता था जब मै डैडी के फिल्म शूट पर जाता था। जब भी वो एक्शन शूट करते थे।टाइगर श्राफ ने कहा कि अक्षय कुमार के रूप में हमारे पास बॉलीवुड का खुद का अपना टॉम क्रूज है। हमें किसी दूसरे टॉम क्रूज की जरूरत नहीं है। वह अक्षय की फिल्मों से भी बहुत कुछ सीखते हैं।
लखनऊ को लेकर मेरा अनुभव अलग रहा है। मेरे प्रोड्यूसर, डायरेक्टर को यहां पर कमाल की शूटिंग करने का मौका मिला। आगे भी दो फिल्मों की शूटिंग यूपी में होनी है। यहां का खाना लाजवाब है।
यहां का खाना और कल्चर दोनों अच्छा है।
अक्षय ने कहा कि एक ऐसे इंसान से मुलाकात हुई, जो एक्टिंग को लेकर मुझसे भी डरा रहता है। मेरी उम्र टाइगर से एकदम दोगुनी है। कहते हैं कि आप युवाओं के साथ काम कीजिए ताकि उनके स्टेमिना से सीख सकें। हम साथ में वॉलीबॉल, क्रिकेट खेलते हैं। साथ में कसरत करते हैं। मुझे बहुत सी चीजें टाइगर से समझने को मिली हैं। एक छोटा उदाहरण है कि जब भी मैं टाइगर को देखता हूं कि सुबह आठ से 10 बजे तक वे अपनी टी-शर्ट हटाकर धूप में बैठते हैं और विटामिन डी लेते हैं। हमारे यहां ब्लड टेस्ट में हमेशा विटामिन डी कम ही आता है। मैंने यह इनसे सीखा है। छोटी सी लेकिन कमाल की चीज है।
अभिनेता अक्षय कुमार ने कहा कि हमारी आने वाली फिल्म बड़े मियां छोटे मियां में रियल एक्शन सीन हुए हैं। यह एक ऐसी फिल्म है जिसे करते हुए हमने वीएफएक्स प्रयोग नहीं किया। ऐसा इसलिए हो पाया क्योंकि टाइगर श्राफ की फिटनेस जबर्दस्त है। उनमें एनजी लेवल जबर्दस्त है। टाइगर श्राफ मुझसे भी ज्यादा एक्टिव रहता। अक्षय कुमार ने टाइगर श्राफ को लेकर कहा कि उनका फिटनेस लेवल जबर्दस्त है।
अमर उजाला संवाद में अभिनेता टाइगर श्राफ ने कहा कि मुझे यहां का खाना बहुत अच्छा लगता है। मुझे यहां के टुंडे कबाब पसंद हैं। तीन साल पहले भी मैं यहां आया था, तब ज्यादा घूमने को नहीं मिला। मैं ओरिजिनल एक्शन हीरो के साथ काम कर रहा हूं। इसका मैं शुक्रगुजार हूं। अक्षय कुमार से बहुत कुछ सीखने को मिला। एक्शन आर्टिस्ट, एक्टर और एक इंसान के तौर पर मुझे बहुत कुछ इनसे सीखने को मिल।
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि डिस्कवरी चैनल, राष्ट्रवादी फिल्में देखता हूं। केशव मौर्य ने कहा कि फिल्मों के लिए बहुत कम समय मिल पाता है। लेकिन उसमें जो समय मिल पाता है उसमें डिस्कवरी चैनल, राष्ट्रवादी फिल्में देखता हूं। कई सारी फिल्में उनके नाम की वजह से ही देखने का मन नहीं करता।
केशव प्रसाद मौर्य ने हमला करते हुए कहा कि राहुल गांधी का नशा अमेठी की जनता ने उतार दिया है। अब रायबरेली में भी उनका नशा उतारने वाले हैं। यूपी के युवाओं को नशेड़ी कहना यूपी के लड़कों का अपमान है। केशव ने कहा कि यूपी की जनता ने 2014, 2017 और 2019 में देश की जनता ने राहुल गांधी का नशा उतारा था। अब यूपी की जनता एक बार फिर से उनका नशा उतारेगी। इस बार रायबरेली की जनता उनका नशा उतार देगी। प्रदेश की जनता को नशेड़ी कहना जनता का अपमान है।
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि जाति जनगणना के मुद्दे पर विपक्ष में दम नहीं है। जब सत्ता में थे तो किसी का ध्यान नहीं रखा। जब सत्ता में नहीं है ओर दूर-दूर तक सत्ता में आने की संभावना नहीं है तो ऐसे मुद्दे उठाकर चर्चा में रहना चाहते हैं। उन्होंने हमला करते हुए कहा कि अखिलेश मुददा विहीन हैं। चांदी की चम्मच मुंह में लेकर पैदा हुए इन लोगों को जनता के मुद्दे को लेकर कोई लेना देना नहीं है।
पेपर लीक पर सरकार ने कड़े कदम उठाए और छह माह में फिर से भर्ती कराने का आदेश जारी किया है। हम कड़े कानून बनाने का काम कर रहे हैं। दोबारा परीक्षा कराने में काफी दिक्कतें होती हैं। बहुत सारे सामान्य परिवारों के लोगों का आने जाने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है। भविष्य में ऐसा दोबारा न हो इस पर कड़े कदम उठाए जाएंगे।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि पेपर लीक जैसी गंभीर बीमारी का परमानेंट इलाज करने के लिए भारत सरकार ने अभी एक कानून बनाया है। उत्तर प्रदेश में उसे हम कड़ाई से लागू करने का काम करेंगे। ये जो नकल माफिया हैं, भर्ति माफिया हैं, खनन माफिया हैं, शराब माफिया हैं, अनेक प्रकार के माफिया हैं, उसी में एक गैंग यह भी सक्रिया था। हम लोगों ने उनको बहुत निर्बल किया है। ऐसी अव्यवस्था को समाप्त करने का प्रयास किया है।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने पेपर लीक मामले में कहा कि सपा-बसपा की जो 15 साल की सरकार रहीं हैं, कुछ ऐसी बीमारियां छोड़कर गई है, जिसमें एक पेपर लीक की घटनाएं भी है। हमने भ्रष्टाचार मुक्त भर्तियां कीं हैं। लगभग साढ़े छह लाख लोग जो नौकरियां पाएं हैं, उनसे पूछेंगे तो वो बताएंगे कि कहीं पर भी कोई रिश्वतखोरी नहीं हुई है, और बिना रिश्वत के चाहे वो गरीब का बेटा हो या अमीर का बेटा है, अगर वह प्रतिभाशाली है तो उसे नौकरी मिली है। पेपर लीक एक गंभीर समस्या है। मैं खुद एक सामान्य परिवार से निकलकर राजनीति के अंदर आज उत्तर प्रदेश का उपमुख्यमंत्री हूं। लगातार दूसरी बार उपमुख्यमंत्री हूं। हमने परीक्षाओं को रद्द कर दिया है, जब इनपुट मिले ही उसमें गड़बड़ है या गड़बड़ हो सकता है। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होने देंगे।
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि बसपा को लेकर हमारे पास रणनीति है। इसका हम मंच पर खुलासा नहीं कर सकते। लेकिन यह तय है कि यदि सपा, बसपा और कांग्रेस तीनों मिल भी जाएं तब भी बीजेपी सभी 80 सीटें जीतने जा रही है।
डिप्टी सीएम ने कहा कि 2017 में यूपी के इन लड़कों की जोड़ी यूपी देख चुकी है। अब यूपी के ये लड़के बूढ़े हो चुके हैं। जब ये 2017 में हमें नहीं रोक पाए तो अभी इस प्रचंड लहर में हमें नहीं रोक पाएंगे। हम यूपी की सभी 80 की 80 सीटें जीतने जा रहे हैं।
अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम के छठें सत्र में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण होना भाजपा का वैचारिक मुद्दा रहा है। ये आस्था का विषय है। राजनीतिक विषय नहीं है। अगर चुनाव में इसका फायदा मिलेगा तो भाजपा को ही मिलेगा। डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होना यह भाजपा का वैचारिक मुद्दा रहा है। देश के करोड़ों लोग ऐसे रहे हैं जो इस आंदोलन से जुड़े हैं। यह भावनाओं का मुद्दा है चुनावों का मुद्दा नहीं है। यदि चुनावों में इसके फायदे की बात करें तो इसका लाभ उनको नहीं होगा जिन्होंने राम को काल्पनिक बताया था या जिन्होंने कार सेवकों पर गोली चलाई थी।
लेफ्टिनेंट जनरल निंभोरकर ने कहा कि राजनेताओं के बच्चों को भी सेना में आना चाहिए। देश के सभी सभी सेवाओं से जुड़े लोगों को कम से कम तीन साल सेना मे काम करना चाहिए।
लेफ्टिनेंट जनरल निंभोरकर ने कहा कि कश्मीर से 370 हटाना सही फैसला था। इससे आतंकवाद में कमी आएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि कश्मीर की समस्या हल करनी है तो 370 हटाना ही चाहिए था। उन्होंने कहा कि इसमें समय लग सकता है पर इससे निश्चित रूप से हालात बदलेंगे। अब वहां पत्थरबाजी की घटनाएं सामने नहीं आती हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर में गरीबी नहीं है। वहां के लोग कहते हैं कि हमने आज सिर्फ पनीर खाया है मांस नहीं खाया। ये लोग उतना गरीब नहीं है जितना कि भारत के अन्य हिस्सों के लोग।
निंभोरकर ने अग्निवीर योजना की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह एक अग्निवीर योजना अच्छी है। इससे लोगों में अनुशासन आएगा और लोग सेना को जानेंगे। जो निकम्मा होगा उसे ही काम नहीं मिलेगा, बाकी सभी को काम मिल जाएगा। अग्निवीर से रिटयर होने के बाद बीस-पच्चीस लाख मिल जाएंगे। फिर उसे अनुभव के आधार पर काम मिल जाएगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि सिर्फ 25 प्रतिशत सैनिकों को चार साल के बाद रोकना यह कम सही है। इसे बढ़ाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मैं देश वासियों को बताना चाहता हूं कि डरने की जरूरत नहीं है। लेकिन हमें आर्थिक रूप से सक्षम होना पड़ेगा। हम 22000 करोड़ के सैन्य हथियारों का निर्यात कर रहे हैं।
निंभोरकर ने कहा कि अब तकनीक और सूचनाओं के क्षेत्र में भारत अन्य देशों के मुकाबले बेहद मजबूत स्थिति में हैं। हमारे चीन और पाकिस्तान दो दुश्मन हैं। पाकिस्तान को मैं इस लायक नहीं मानता कि उसको दुश्मन कहें। अगर चीन के साथ युद्ध होता है तो जितना नुकसान हमारा होगा उतना ही हम उनका भी नुकसान करेंगे। उन्होंने कहा कि रक्षा के क्षेत्र में अब हम उपकरणों का आयात कर रहे हैं। अगर ऐसा ही रहा तो अगले पांच साल में हमारी इतनी ताकत बढ़ जाएगी हम रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो जाएंगे।
निंभोरकर ने कहा कि मुझे लगता है कि आजादी के बाद अगर सबसे अच्छा कोई रक्षामंत्री हुआ है तो वो मनोहर पर्रिकर हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर मुंबई हमले के बाद भी इसी तरह के कदम उठाए गए होते तो बाद के हमले नहीं होते। इस तरह के निर्णय लेने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत होती है।
लेफ्टिनेंट जनरल निंभोरकर ने सर्जिकल स्ट्राइक की गोपनीयता पर कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में मेरी यूनिट को भी कुछ पता नहीं था। सर्जिकल स्ट्राइक में हमने 82 आतंकी मारे, हमारे एक भी सैनिक को कुछ नहीं हुआ। हमने हमला करने का वक्त वो चुना जिस समय लोग सबसे गहरी नींद में होते हैं। जैसा उरी फिल्म में दिखाया गया वैसा नहीं हुआ। फिल्म तो मिर्च मसाला लगाकर पेश करती हैं।
अमर उजाला संवाद में 'देश के सम्मान की बात' सत्र में लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) राजेंद्र रामराव निंभोरकर ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के उरी हमले के बाद हमने यह तय कर लिया था कि जवाब देना है, तब उस समय के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा कि जवाब देने की तैयारी करो और हमने प्लान को लागू करने का निर्णय ले लिया। इसकी जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को थी। हमें सिर्फ छह दिन के भीतर ही सारे उपकरण उपलब्ध हो गए।
दुनिया में काफी वर्क फोर्स की आवश्यकता है, भारत विभिन्न्ताओं का देश है, उसको लेकर अभी तक हमने क्या काम किया है?
इस सवाल पर अतुल कुमार तिवारी ने कहा कि देखिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि पहले हम इसे शिक्षा के साथ जोड़ें। हमारे लगभग पांच करोड़ बच्चे जो हायर एजुकेशन से निकलते हैं। उनमें कैसे एजुकेशन के साथ स्किलिंग को जोड़ा जाए, हमारी जो उपनिवेशवाद की प्रणाली रही है। इसमें डिग्री को ज्यादा महत्व मिला जबकि स्किलिंग को कम मिला। उस संदर्भ में यह जरूरी हो जाता है कि हम स्किलिंग को शिक्षा के साथ जोड़े । जिसमें काफी कार्य हमारी नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के अंतर्गत हुए हैं। अगर आप फ्रेमवर्क की बात करें तो कैसे स्कूल में स्किलिंग को लेकर आना है, कैसे हम इसको इंस्पिरेशनल बना लें इस पर काम किया जा रहा है। हम स्किलिंग के लिए न सिर्फ सरकारी संस्थानों पर निर्भर रहें, बल्कि इसे हम हर जगह लेकर जाएं। इसके साथ ही कैसे हम टेक्नोलॉजी का प्रयोग करते हुए, हम उसमें डायवर्सिफाइड, लोकलाइज्ड और ओडीओपी की मुताबिक हम स्किलंग कर पाएं। इन तीनों दिशाओं में भी हमारा प्रयास जारी है।
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के सचिव अतुल कुमार तिवारी से पूछा कि स्किल डेवलपमेंट इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
इस सवाल पर अतुल कुमार तिवारी ने कहा कि जिस तरह से देश प्रगति कर रहा है। जिस तरह से हम विकास कर रहे हैं इसके लिए जरूरी है कि हम युवाओं की स्किल को डेवलप करें। आदरणीय प्रधानमंत्री ने जो बात कही है कि आज हमारा जो भारत है उसमें हमें युवाओं के लिए एजुकेशन भी चाहिए और स्किल भी चाहिए। न सिर्फ एजुकेशन और न सिर्फ स्किल हमें दोनों की आवश्यकता है। इसके लिए जरूरी है कि हमें लगातार खुद को अपडेट करते रहें। इस मंत्रालय की शुरुआत 2014 में हुई, इसके बाद स्किलिंग को लेकर एक सुनियोजित कार्यक्रम चलाया गया। जिसके अंतर्गत 1.4 करोड़ लोगों को स्किलिंग दी गई।
इस सत्र में लूलू माल के रीजनल डायरेक्टर जय कुमार गंगाधरन ने कहा कि जब हम यहां पर लूलू मॉल शुरू कर रहे थे तो यही दिमाग में था कि जब शहर में पहले से ही इतने सारे मॉल है तो इसे लोग कैसे स्वीकार करेंगे पर लोगों का रिस्पांस उत्साह बढ़ाने वाला रहा। उन्होंने बताया कि अब वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर और गोरखपुर में विस्तार करने पर विचार कर रहे हैं।
आसिफ इकबाल ने कहा कि हमारे शिक्षकों ने हमें समझाया कि हम बिना आंखों से भी बहुत कुछ कर सकते हैं। मेरी मां ने सिखाया है कि तुम्हारे पास आंख नहीं है पर तुम्हारे पास एक सुंदर दिमाग है। उसका इस्तेमाल कर आगे बढ़ो। तुम हुनर सीखो और सारे चीज सीखों और अपनी एक पहचान बनाओ। हमने कंप्यूटर लैपटॉप चलाना सीखा। उसके बाद मेरी जिंदगी में बदलाव आए। देश में लोगों की संवेदनशीलता के बारे में उन्होंने कहा कि जनता की सोच बदलने में बहुत वक्त लगेगा। सोच बदलने की जरूरत है। वक्त लगेगा पर हम सही रास्ते पर हैं।
राधिका गुप्ता ने कहा कि यूपी और हिंदुस्तान एक बहुत बड़ा कंज्यूमर मार्केट है। यह सबके लिए अच्छी खबर है। आप कोई भी बढ़िया बिजनेस आप कर सकते हैं। आप ग्राहकों की जरूरत को पकड़िए और उसका समाधान पेशकर बिजनेस करिए। लोगों को उपभोक्तओं से संवाद करना चाहिए। आज के हिंदुस्तान में कैपिटल की कमी नहीं है। अगर आइडिया अच्छा है तो पैसे देने वाले मिलेंगे। बिजनेस एक लाइफटाइम का काम है।
एलवाइस म्युचअल फंड की एमडी व सीईओ राधिका गुप्ता ने कहा कि हमारे देश में 140 करोड़ उपभोक्ता हैं। अब लोगों की सोच बदल रही है। अब नौकरी करने वाले को माना जाता है कि कुछ कर ही नहीं रहा है। आज का युवा जिस भारत में बड़ा हो रहा है वह मेरे भारत से बहुत अलग है। आज के बच्चे के हाथों में मोबाइल है। आज आठ साल का बच्चा शॉर्क टैंक देखता है। आज के बच्चों के बिजनेस की थिंकिंग पहले की तुलना में बहुत आगे है। आज के युवाओं का आत्मविश्वास भी बहुत ज्यादा है। ऐसे में वे भविष्य में बहुत आगे जा सकते हैं।
तीसरे सत्र में पीडब्ल्यूसी इंडिया के एसोसिएट एडिटर मो. आसिफ इकबाल, एलवाइस म्युचअल फंड की एमडी व सीईओ राधिका गुप्ता और लुलु ग्रुप के रीजनल डायरेक्टर जयकुमार गंगाधरन अपने विचार रख रहे हैं। इस दौरान पीडब्ल्यूसी इंडिया के एसोसिएट एडिटर मो. आसिफ इकबाल ने कहा कि अभी बहुत कुछ करना है देश के लिए। यहां तक आने की यात्रा बहुत ही संघर्षों से भरी रही। मैं भागलपुर में पला-बढ़ा। आज भी मुझे याद है उनकी एक ही परसेप्शन थी कि ये जिंदगी में कभी कुछ नहीं कर पाएगा। माता-पिता फील करते थे कि ये बेचारा समाज पर बोझ जैसा है। पर हमें आज भी याद है जब प्रिंसिपल हमारे पापा और अंकल को बुलाकर कहते थे कि इसे लेकर जाहिए, ये पूरा माहौल खराब कर रहा है। शायद मैंने स्वीकार कर लिया था। कई बार फेल किया। ताने सुने। फिर मैं अपने ताऊ के साथ जब अमेरिका गया तो वहां शिक्षकों ने मेरा हौसला बढ़ाया।
इसके बाद सीएम योगी ने अमर उजाला के सृष्टि एआई एंकर की लॉन्चिंग की। इसके साथ ही अमर उजाला के विशेष संस्करण का विमोचन भी किया।
सीएम योगी ने कहा कि किसान सम्मान निधि जैसी योजनाएं हैं। किसानों को डेढ़ गुना समर्थन मूल्य मिल रहा है। समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति की संतुष्टि हमारा अंतिम लक्ष्य है, किसी जाति-महजब की तुष्टि हमारा लक्ष्य नहीं है। हम भारत की अर्थव्यवस्था में ग्रोथ इंजन बनने की क्षमता हम रखते हैं। हर योजना में यूपी कभी पीछे था, आज हम कई क्षेत्रों में नंबर वन हैं। पदक लाने वाले खिलाड़ियों को नियुक्तियां दे रहे हैं। दो करोड़ युवाओं को टैबलेट, स्मार्टफोन दे रहे हैं। 2014 में उत्तर प्रदेश देश की छठी बड़ी अर्थव्यवस्था था। आज हम नंबर दो पर हैं। अमर उजाला आगामी 25 वर्ष की व्यापक कार्य योजना पर काम कर रहा है। हम चाहेंगे कि समय-समय पर जनता से मिली राय को भी मीडिया स्थान दे। उसमें सत्यता हो तो फिर ऐसा हो ही नहीं सकता कि सरकार उस पर संज्ञान न ले।
मीडिया भी एक दिशा दिखाने या सुझाव देने का काम करता है। बदली हुई परिस्थिति में मीडिया अपनी भूमिका के साथ काम करे। जब स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे होंगे, तब अमर उजाला के लिए भी एक अवसर होगा। तब अमर उजाला परिवार भी कह सकेगा कि मीडिया का मंच कैसा होना चाहिए। कई लोग अखबार पढ़े बिना मानते नहीं। कई लोग टीवी नहीं देखते, डिजिटल मीडिया को ही देखते हैं। हमें इन अभिरूचियों को भी सम्मान देना होगा। मैं अमर उजाला परिवार को संवाद के आयोजन और 75 वर्ष के शानदार सफर के लिए बधाई देता हूं। मीडिया के सामने अमर उजाला आदर्श बन सके, इसके लिए शुभकामनाएं देता हूं।
सीएम योगी ने कहा कि आज हमारे पास जलमार्ग हैं, सदा नीरा नदियां हैं। हम अयोध्या को भी जल मार्ग से हल्दिया तक जोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। अयोध्या धाम में ही एक महीने में 65 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन कर दिया। यह संख्या बढ़ेगी। दुनिया में कहीं एक जगह इतने श्रद्धालु नहीं आएंगे, जितने अयोध्या में आएंगे। MSME यहां मृत प्राय था। आज दो लाख करोड़ का निर्यात MSME के साथ हो रहा है। कौन सा ऐसा तबका है, जो यह कहे कि सरकार ने हमारे लिए कुछ नहीं किया। अच्छी शिक्षा की व्यवस्था, रोजगार की संभावनाएं बढ़ाने का काम हुआ है।
उन्होंने 20 हजार करोड़ का लक्ष्य बताया। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट नाम होगा। मैंने कहा कि ग्लोबल नाम हटा दो और लक्ष्य दो लाख करोड़ रुपये कर दो। कहा गया कि उत्तर प्रदेश में माहौल नहीं है, यहां कोई नहीं आएगा। तब सरकार बने छह महीने ही हुए थे। मैंने कहा कि छह महीने में हमने कुछ तो किया होगा। देश के उद्यमियों की भी आशंकाएं थीं। उद्यमी कहते थे कि हम यूपी में नहीं जाएंगे, वहां पूंजी सुरक्षित नहीं है। खैर, हमारी पहली इन्वेस्टर समिट अच्छे से हो गई। जुलाई 2018 के बाद छह वर्ष में परिवर्तन आया। 19 फरवरी को चौथी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी हुई तब 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव आए। राइजिंग यूपी ही नहीं, शाइनिंग यूपी है। जिस प्रदेश की पहचान गड्ढों से होती थी, वह विश्व स्तरीय एक्सप्रेस वे के लिए जाना जाता है। देश के एक्सप्रेस वे का 40 फीसदी हिस्सा यूपी के पास है। हम 55 फीसदी हिस्सेदारी की तरफ आगे बढ़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज यहां कर्फ्यू नहीं, धूम धड़ाके साथ कांवड़ यात्रा निकलती है। यूपी ने सात वर्ष में बहुत कुछ अर्जित किया है। जो उत्तर प्रदेश देश के विकास का ब्रेकर माना जाता था, आज वह 'ब्रेक थ्रू' के रूप में जाना जाता है। लोग वही है, प्रदेश वही है, जो बदला है, वो है कार्य संस्कृति। अभी आपने देखा होगा। पहले यूपी में निवेश नहीं होता था। जिनके निवेश थे, वे समेटकर भाग रहे थे। अभी 19 फरवरी को प्रधानमंत्री लखनऊ आए। जब ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी की संकल्पना की थी तब आद्यौगिक विकास के मंत्री और आयुक्त मेरे पास आए। मैंने उनसे कहा कि हमें निवेश को भी आमंत्रित करना चाहिए। उस समय उन्होंने कहा कि यह होना चाहिए, हम भी चाहते हैं।
सीएम योगी ने कहा कि भारत की आस्था को भी सम्मान मिला है, यह आजादी के बाद पहली बार हुआ है। यह प्रधानमंत्री मोदी जी की वजह से यह सम्मान मिल पा रहा है। उत्तर प्रदेश को लेकर लोगों के मन में कई धारणाएं थीं, लेकिन यहां डबल इंजन सरकार के जरिए विकास हो रहा है। यहां कभी साल में 350 दंगे होते थे, यहां कभी व्यक्ति सुरक्षित नहीं था, निवेश सुरक्षित नहीं था तो पूंजी कैसे सुरक्षित रहती। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ होता था, आस्था का अनादर होता था, शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य की संभावनाएं खत्म होती दिखाई देती थीं। अब बदलाव देख सकते हैं। युवाओं के हाथ में तमंचा नहीं, टैबलेट देख सकते हैं। आज सड़कों पर रंगदारी नहीं, स्ट्रीट वेंडर के आर्थिक स्वावलंबन की योजनाएं हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मीडिया की भी भूमिका है। हर एक स्तंभ मजबूत होगा तो लोकतंत्र सबल और सशक्त होगा। 75 वर्ष की उपलब्धियों के साथ अमर उजाला आगे बढ़ रहा है, इसके लिए मैं शुभकामनाएं देता हूं। राइजिंग यूपी अब शाइनिंग यूपी के रूप में आगे आ चुका है। 10 वर्ष में देश में परिवर्तन आया है। देश में नया भारत देखने को मिल रहा है, जिसका विश्व में सम्मान है, जिसकी सीमाएं सुरक्षित हैं, जिसकी आंतरिक व्यवस्थाएं सुरक्षित हैं। आतंकवाद, नक्सलवाद, उग्रवाद नियंत्रण में हैं। सुरक्षा की बेहतर स्थिति है। बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय रूप में देखा जा रहा है। जन विश्वास सुदृढ़ हुआ है। बिना भेदभाव के सभी तक विकास पहुंच रहा है।
अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी का प्रबंध निदेशक तन्मय माहेश्वरी ने स्वागत किया। अमर उजाल संवाद के दूसरे सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अमर उजाला परिवार को अमृत काल की इस बेला में संवाद के इस आयोजन में मैं प्रदेश सरकार और प्रदेशवासियों की ओर से हृदय से बधाई देता हूं। भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता हूं। हम सब जानते हैं कि लोकतंत्र में मीडिया की सशक्त भूमिका है। उसके अलग-अलग स्वरूप हो सकते हैं। प्रिंट, विजुअल, सोशल और डिजिटल हो सकता है। इन सभी ने व्यवस्था को कहीं न कहीं प्रभावित किया है। प्रिंट मीडिया की भूमिका को आज भी किसी भी स्थिति में हम कमतर करके नहीं आंक सकते। सभी का अपना-अपना समूह है। प्रशंसकों का अपना समूह है। वे अपनी रूचि के अनुरूप उस मीडिया समूह से जुड़े हुए हैं। सरकार या लोकतंत्र की जब हम बात करते हैं, तब इसमें सिर्फ सत्ताधारी दल नहीं होता। विपक्ष, आम जनमानस और उस व्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए अलग-अलग संस्थाओं की भी भूमिका है।
अमर उजाला के प्रबंध निदेशक तन्मय महेश्वरी ने कहा कि मेरे सपनों का प्रदेश, मेरे अपनों का प्रदेश, मेरा अपना उत्तर प्रदेश। आदरणीय मुख्यमंत्री जी और आदरणीय आतिथिगण, आप सभी का अमर उजाला संवाद में स्वागत है। संवाद क्या है? संवाद तो एक मिलन है आशा का और उम्मीद का। प्यार का और नए रिश्तों का। हमारे और आपके साथ का। संवाद में हम जोड़ते हैं अपने लाखों कराड़ों पाठकों को आपके साथ। उत्तर प्रदेश एक पावन भूमि है। एक ऐसी भूमि जिस पर स्वयं भगवान का वरदान है, प्रकृति का वरदान है, सबसे उन्नत तो यहां के किसान हैं। स्वयं भगवान यहां पर विराजमान है। यहां की सभ्यता का सबको एहसास है, अवधि, भोजपुरी, बुंदेली, अवधी जहां सबके कानों में गूंजे। ताज के दीदार को दुनिया में कोने कोने को तरसे। अब तक नौ प्रधानमंत्रियों को इसने अपनी कर्मभूमि बनाया। आजादी के मतवालों ने यहीं से अपना बिगुल बजाया। अब नई राहों पर चल पड़ा है यह उत्तर प्रदेश और यह बनेगा उत्तर से उत्तम प्रदेश और यह सब आपके योगदान से होगा। जब तक आप सभी लोग अपना अपना योगदान नहीं देंगे तब तक यह संभव नहीं। चाहे वो ज्ञान योग हो, भक्ति योग हो या कर्म योग हो, हम सब को अपना अपना योगदान तो देना ही पड़ेगा।
जिया नहीं वही जो मरा न आपके लिए
अनित्य देह के लिए अनादि जीव क्या डरे
मनुष्य तो वही जो मनुष्य के लिए मरे
इन पक्तियों के साथ ही मैं स्वागत करता हूं माननीय मुख्यमंत्री जी का कि वो आए और अपने विचार साझा करें।
आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण: केवल मंदिर बन रहा है, ऐसा नहीं कह सकते। राम वो चरित्र हैं, जिनके राज्याभिषेक में वानर, भालू सम्मानित किए जाते हैं। अभी तक मनुष्यता के लिए स्वप्न है कि दरबारियों के अलावा भी कोई दरबार में सम्मान पाएं। ब्रह्मर्षि वशिष्ठ निषाद को गले लगा लेते हैं। महर्षि वेदव्यास भगवान श्रीकृष्ण का चरित्र लिख रहे थे, लेकिन राम के लिए कहते हैं कि वे साधुवाद की कसौटी हैं- साधुवाद निकषणाय। राम अकेला चरित्र है, जिसने अपनी महानताओं का चयन करते हुए, दिव्यताओं को प्राप्त करते हुए भी मनुष्यता नहीं छोड़ी। महर्षि वेदव्यास कहते हैं कि श्रीराम का अवतार राक्षसों को मारने के लिए नहीं हुआ है, मनुष्य को मनुष्यता सीखाने के लिए उनका अवतार हुआ है। राम जन्मभूमि में रामलला की प्रतिष्ठा किसी एक मंदिर में आराध्य देव की प्रतिष्ठा नहीं है, बल्कि मनुष्यता को प्रतिष्ठित करने के लिए है। 22 जनवरी अकेला और अनूठा कार्यक्रम था, जिसमें संपूर्ण देश इकट्ठा हुआ है। वीआईपी केवल रामलला थे, बाकी सब सामान्य थे। मनुष्यता आपसे अपेक्षा करती है कि अपने दंभ के बाहर निकलिए। रामलला ने उसका अनुभव कराया। रामो विग्रहवान् धर्मः। प्रत्येक का वैसे जीवन में होना, जो उसके अस्तित्व को चरितार्थ करे, यह श्रीराम ने सिखाया। मनुष्यता में साधुता, सत्य और पराक्रम होना चाहिए।
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि योगीराज जी के लिए कहना चाहूंगा। एक प्रतिमा में सजीवता थी, बस गई सुछवि आंखों में, वो एक लकीर हृदय पर, अलग हो गई लाखों में। राम मंदिर कोई एक इमारत नहीं थी, यह भारत के विकास की कालजयी यात्रा थी। राम मंदिर का विषय जिस तरह से आगे बढ़ा, उसी तरह से भारत आगे बढ़ा। तारीख कालचक्र की गति थी। मुगलों के जमाने और अंग्रेजों के जमाने के रिकॉर्ड को दीमक ने नहीं खाया। सब यथावत थे। पहली एफआईआर 1858 में हुई। निहंग सिखों ने जन्मभूमि पर यज्ञ हवन किया। मस्जिद-ए-जन्मस्थान पर राम-राम लिख दिया। नीचे दस्तखत थे मुतव्वली मस्जिद-ए-जन्मस्थान। 1936 में भीषण संघर्ष हुआ। तब अंग्रेजों ने नमाज पर रोक लगा दी। 1947 में देश आजाद हुआ। 1948 में रामलला प्रकट हुआ। 1986 में ताला खुला था। 1990-92 आंदोलन चरम पर था। तब भारत में अर्थव्यवस्था बदली। नई अर्थव्यवस्था की शुरुआत हुई। 2003 में खुदाई में खंभे निकले। तब विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ गया। प्राण प्रतिष्ठा के समय 620 अरब का विदेशी मुद्रा भंडार है। चार करोड़ गरीबों को गरीब आवास देकर रामलला नए मंदिर में विराजे हैं। 54 करोड़ लोगों को जनधन अकाउंट और नई संसद देकर रामलला विराजे हैं। चांद के अछूते हिस्से को छूने वाला पहला देश बनाकर आए हैं।
बालक राम की वह आंखें कैसे तराशी इस सवाल के जवाब में योगीराज ने कहा कि मैंने पत्थर के साथ इतना वक्त बिताया कि पत्थर मेरी बात सुनते हैं। सरयू नदी में स्न्नान करके बीस मिनट में नेत्र तराशना था। नेत्र तराशने से पहले सरयू नदी में स्नान करके हनुमान गढ़ी में दर्शन करना है। मैंने बहुत सारी आंखें बनाई हैं लेकिन उस समय मैं ब्लैंक हो गया था। मैंने राम से ही निवेदन किया कि आप जैसी आंखें चाहते हैं वैसी आंखें बनवा लीजिए। मैं उन आंखों को देश के साथ कनेक्ट करना चाहता था। यह भगवान की कृपा है कि वह नेत्र सबको अच्छे लग रहे हैं।
उन्होंने कहा कि 22 जनवरी को सौगंध पूर्ण हुई। अद्भुत आनंद था। जिस दिन पहली कार सेवा हुई और जब 9 नवंबर 2019 को फैसला आया तब देवउत्थानी एकादशी थी। भगवान राम का जब राज्याभिषेक हुआ था, तब सुग्रीव, निषाद राज का पहले राज्याभिषेक हुआ, माता शबरी का सम्मान हुआ। राम को समझने के लिए यही दृष्टि चाहिए। सोइ जानइ जेहि देहु जनाई। जानत तुम्हहि तुम्हइ होइ जाई॥ 22 जनवरी का मुहूर्त 84 सेकंड का था। कोई धर्म संस्कृति बताइए जो इतनी सटीक गणना कर सकती हो। हमारी घड़ी ग्रहों की स्थिति पर चलती है। हम कहते हैं- ब्रह्मा आयु द्वितीय परार्धे। 155 ट्रिलियन वर्षों की गणना कोई और सकता है?
राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि देखिए उस दिन की इस्तुती के लिए जो हम इस दिन यहां एकत्र हुए है और उसके लिए मैं सबसे पहले एक पंक्ति कहना चाहूंगा। आपने आचार्य मिथलेश नंदिनी जी को बुलाया जो धर्म के ज्ञान के प्रतीक हैं। मैं राजनीति के क्षेत्र से आता हूं जो कर्म की प्रतीक है, योगीराज जी उपासना का प्रतीक हैं। यदि ज्ञान, कर्म और उपासना तीनों राम की स्तुति के लिए उपस्थित हों तो भारतीय संस्कृति का अमर उजाला प्रस्तुत होने का समय आ गया है।
इस दौरान उन्होंने कहा कि कष्ट हो जाए तो हे राम, अचूक है तो राम बाण, भरोसा है तो राम भरोसे। राजनीति में हैं तो आया राम, गया राम। दो भाई दिख जाएं तो राम-लक्ष्मण की जोड़ी। नव दंपती दिखें तो कहते हैं कि राम-सीता की जोड़ी। प्रसिद्ध गीत की पंक्ति याद आती है
जन जन के मन में राम रमे, और प्राण-प्राण में सीता है।
हर हृदय की धड़कन रामायण, पग-पग पर बनी पुनीता है।
यदि राम नहीं हैं सांसों में, तो प्राणों का घट रीता है।
तो नर नाहर श्री पुरुषोत्तम का हम मंदिर भव्य बनाएंगे।
सौगंध राम की खाते हैं हम मंदिर वहीं बनाएंगे।
उन्होंने कहा कि 22 जनवरी के बाद निरंतर यात्राएं करनी पड़ रही हैं। देश श्रीराम से इस तरह जुड़ा हुआ है, यह पहले अनुभव नहीं हुआ। अभी राजस्थान गया था। वहां लोगों ने कहा कि रामलला अयोध्या में ही नहीं आए, हमारे यहां भी आए। राजा राम लौटकर जब अयोध्या आए और भरत ने जब राज्य उन्हें लौटाया तो कहा कि मां की जिद पर आपने राज्य लौटा दिया था। अब अवसर है कि मैं आपको यह राज्य लौटा दूं। जब तक नक्षत्र मंडल विद्यमान रहें, तब तक आप इस लोक के शासक होकर विद्यमान रहें। भरत की प्रतिज्ञा कैसे व्यर्थ हो सकती थी। श्रीराम ने उस प्रतिज्ञा को चरितार्थ करने के लिए फिर से अवतार लिया है।
आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा कि हमारी कई पीढ़ियां बीत गईं, लेकिन उन्हें यह अवसर नहीं मिल पाया था। सरयू का एक नाम नेत्रजा है। वे भगवान के नेत्रों से प्रकट हुई हैं। परमात्मा की कृपालता ही सरयू के रूप में प्रवाहित हुई है। अयोध्या ने कई बार आंसू बहाए हैं। 22 जनवरी इकलौती तारीख नहीं है। रामलला के दर्शन कर और आंसू बहाकर अयोध्या ने खुद को धन्य कर दिया है। आंसुओं ने इस अयोध्या को तीर्थ में परिवर्तित कर दिया है। ईश्वर रचना नहीं है। जगत रचना है। रचा जाता है, नष्ट हो जाता है। ईश्वर सार्वभौम सत्ता है, कभी व्यक्त, कभी अव्यक्त। त्रेता में भगवान ने दशरथनंदन के रूप में अवतार लिया था। कलयुग में रामलला ने फिर से अवतार लिया है और यह अर्चावतार है। यह मनोरथ अवतार है।
अरुण योगीराज ने कहा कि हम लोग 500 साल से इस क्षण का इंतजार कर रहे थे। सभी की आंखों में आंसू थे। मेरी भी आंखों में आंसू थे। सपना पूरा हो रहा था। ऐतिहासिक पल था। भगवान की कृपा थी कि मूर्ति बनाने का काम मेरे हाथ से हुआ।
मंच पर आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण, रामलला के मूर्तिकार अरुण योगीराज और राज्य सभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी मौजूद हैं। रामलला के मूर्तिकार अरुण योगीराज कहा कि भगवान ने इस काम के लिए हमें चुना था। यह प्रक्रिया जून से शुरू हुई थी। तब से मुझे एक ही उत्तर देना था कि मूर्ति का निर्माण कैसे होगा। उस दिन जब प्राण प्रतिष्ठा हुई, उसके बाद मैंने जनता के साथ रहने का फैसला किया। मेरे लिए यह जानना महत्वपूर्ण था कि देश के लोग मूर्ति को लेकर कैसा महसूस कर रहे हैं। उस दिन देश की प्रतिक्रिया देखकर आज मैं कह सकता हूं कि मुझे अपने काम पर गर्व है।
अमर उजाला संवाद की शुरुआत आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण, रामलला के मूर्तिकार अरुण योगीराज और राज्य सभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
बेबी रानी मौर्याः महिला एवं बाल विकास व पुष्टाहार मंत्री उत्तर प्रदेश।
गुलाब देवीः माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार
रजनी तिवारीः उच्च शिक्षा राज्य मंत्री।
प्रतिभा शुक्लाः महिला कल्याण व बाल विकास एवं पुष्टाहार राज्य मंत्री उत्तर प्रदेश।
डॉ. संगीता शर्माः इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेस दिल्ली के न्यूरोसाइकोफॉरमेकोलॉज में विभागाध्यक्ष व प्रोफेसर हैं।
डॉ. जयदीप मल्होत्रा : इनफर्टलिटी सेंटर ऑफ रेनबो आईवीएफ के संस्थापक हैं, जो करेंगे आपकी सेहत की सुरक्षा की बात।
डॉ. मंदाकिनी प्रधान : संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ में मेटरनल हेल्थ एंड रिप्रोडक्टिव हेल्थ विभाग की विभागाध्याक्ष व प्रोफेसर हैं।
मनु भाकरः जानी मानी भारतीय ओलंपिक निशानेबाज हैं।
जया किशोरी : मोटीवेशनल स्पीकर और आध्यात्मिक वक्ता हैं, जो करेंगी सार्थक जीवन की बात।
शायरी चहल : शीरोज की सीईओ हैं शायरी चहल, जो करेंगी बात अपना आसमान चुनने की।
अनुराधा आचार्य : देश की जानी मानी कंपनी मैपमाय जीनोम की सीईओ हैं।
गीतिका गंजू धर : टेलीविजन की जानी-मानी शख्सियत हैं, जिन्हें मिनिस्ट्री ऑफ टॉक की संस्थापक भी कहा जाता है।
डॉ. कनिका सूद : जानी मानी आंकोलाजिस्ट हैं। जो धर्मशिला नारायण अस्पताल से संबद्ध हैं।
संवाद का दूसरा दिन नारीत्व के उत्सव को समर्पित होगा। महिलाओं के विकास की बात पर शुरू होगा संवाद। अलग-अलग सत्रों में विभिन्न क्षेत्रों में कामयाबी के साथ सेहत की सुरक्षा को लेकर मंथन होगा। स्मृति जूबिन इरानीः दूसरे दिन के खास वक्ताओं और मेहमानों में शामिल हैं, केन्द्रीय महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति जूबिन इरानी। महिलाओं के विकास की करेंगी बात।
एक सत्र पूरा सिनेमा और खेल को समर्पित है। अक्षय कुमार, टाइगर श्राफ के साथ होगी सिनेमा में एक्शन की बात। साइना नेहवाल, पद्मश्री पीटी उषा और क्रिकेटर प्रवीण कुमार खेल में शिखर तक पहुंचने पर संवाद करेंगे। देश के सम्मान की बात सत्र में ले. जनरल (रि.) आरआर निमभोरकर संवाद करेंगे।
बात जब भी उत्तर प्रदेश की होगी तो उसमें युवाओं का विकास सर्वप्रमुख है। ऐसे में कौशल विकास व उद्यमिता मंत्रालय के सचिव अतुल कुमार तिवारी युवाओं के विकास पर संवाद के लिए मौजूद रहेंगे। वहीं लेफ्टिनेंट जनरल (रि.) राजेन्द्र रामराव निंभोरकर देश के सम्मान से जुड़े पहलुओं पर बात करेंगे।
पहले दिन के संवाद में केंट ग्रुप के सीएमडी महेश गुप्ता शामिल होंगे। साथ ही एलवाइस म्युचअल फंड की एमडी व सीईओ राधिका गुप्ता, लुलु ग्रुप के रीजनल डायरेक्टर जयकुमार गंगाधरन कारोबार में शिखर पर पहुंचने की बात बताएंगे। इसी के बाद पीडब्ल्यूसी इंडिया के एसोसिएट एडिटर मो. आसिफ इकबाल हिम्मत न हारने के लिए, क्या जरूरी है, इसे साझा करेंगे लखनऊवासियों के साथ।
उद्घाटन सत्र में आध्यात्मिक वक्ता आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण, रामलला के मूर्तिकार अरुण योगीराज और राज्य सभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी मौजूद रहेंगे। वे राम मंदिर से राष्ट्र निर्माण तक पर बात करेंगे।
कौशल विकास व उद्यमिता मंत्रालय के सचिव अतुल कुमार तिवारी युवा विकास की संभावनाएं बताएंगे। ले. जनरल (रि.) राजेंद्र रामराव निंभोरकर, पद्मश्री पीटी उषा, साइना नेहवाल, क्रिकेटर प्रवीण कुमार भी पहले दिन के संवाद का अहम हिस्सा होंगे।
पहले दिन के संवाद में केंट ग्रुप के सीएमडी महेश गुप्ता, एलवाइस म्यूचुअल फंड की एमडी व सीईओ राधिका गुप्ता, लुलु ग्रुप के रीजनल डायरेक्टर जयकुमार गंगाधरन, पीडब्ल्यूसी इंडिया के एसोसिएट एडिटर मो. आसिफ इकबाल भी मौजूद रहेंगे।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी समृद्ध प्रदेश में संभावनाओं पर बात करेंगे। बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार और टाइगर श्राफ भी लखनऊवासियों से रूबरू होंगे।
उद्घाटन सत्र में आध्यात्मिक वक्ता आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण, रामलला के मूर्तिकार अरुण योगीराज और राज्यसभा सदस्य डॉ. सुधांशु त्रिवेदी मौजूद रहेंगे।
अमर उजाला संवाद में सोमवार से दो दिन तक बात होगी स्वर्णिम शताब्दी की ओर बढ़ते देश के साथ उत्तर प्रदेश के विकास की। इस मंथन में देश की नामचीन हस्तियां शामिल होंगी। संवाद का शुभारंभ लखनऊ के होटल सेंट्रम में सुबह 9 बजे होगा, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यूपी के विकास का खाका खींचेंगे।