एमडीए के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सईद अता हसनैन ने कहा कि चीजें नियंत्रण में हैं। जरूरत के हिसाब से भोजन और दवाएं अंदर दी जा रही हैं। मनोवैज्ञानिक पहलुओं को भी महत्व दिया गया है। इसके साथ ही बैकअप संचार स्थापित किया गया है।
पुजारी दिनेश प्रसाद ने कहा कि प्रार्थना है कि वे श्रमिक जल्द बाहर आएं। फंसे हुए श्रमिकों के सुरक्षित बचाव के लिए प्रार्थना की जा रही है। आज हमने यहां हवन पूजा का आयोजन किया है। हम अपने 'इष्ट देवता' की पूजा करेंगे।
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा, गृह सचिव अजय कुमार भल्ला व मुख्य सचिव एसएस संधू सिलक्यारा पहुंच गए हैं। वह रेस्क्यू ऑपरेशन का जायदा लेंगे।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के उप सचिव मंगेश घिल्डियाल सिल्कयारा टनल बचाव स्थल पर पहुंचे।
14 नवंबर: मजदूरों को बचाने के लिए सुरंग के भीतर ड्रिल शुरू हुई। मलबे की बाधा आई लेकिन तेजी से अभियान ने उम्मीद जगाई।
16 नवंबर : पहली मशीन के नाकाम होने के बाद दूसरी अमेरिकन ऑगर मशीन से ड्रिल शुरू हुई। 18 मीटर तक पहुंची तो उम्मीद बढ़ी।
20 नवंबर : टनल के भीतर सफलतापूर्वक 6 इंच का पाइप पहुंचा तो 900 मिमी पाइप के पहुंचने की उम्मीद फिर बढ़ गई।
21 नवंबर: मशीन के भीतर टेलिस्कोपिक कैमरा पहुंचाया। मजदूर दिखे। अभियान में और तेजी आई। 900 मिमी पाइप 22 मीटर पर अटकने के बाद 800 मिमी पाइप उसके भीतर से भेजने का काम शुरू हुआ।
यमुनोत्री धाम सहित यमुना घाटी में बादल छाए हुए हैं। यमुनोत्री धाम के आसपास बर्फबारी शुरु हो गई है। वहीं नीचले इलाकों में बारिश का मौसम बना हुआ है।
सिलक्यारा सुरंग में 15 दिन से फंसे 41 श्रमिकों को निकालने के लिए वर्टिकल ड्रिलिंग की जा रही है। अब खबर सामने आई है कि यदि कोई बाधा नहीं आई, तो दो दिन में श्रमिकों तक पहुंच सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ आज से प्रदेश में मौसम भी करवट बदलेगा। मौसम विभाग की ओर से अगले तीन दिन बारिश और बर्फबारी की चेतावनी दी गई। यदि मौसम बाधा बना तो एक बार फिर श्रमिकों के जल्दी बाहर निकलने की उम्मीद को झटका लग सकता है।
मैनुअल ड्रिलिंग का जिम्मा संभालेगी सेना
सिलक्यारा सुरंग के अंदर मैनुअल ड्रिलिंग के काम में भारतीय सेना की इंजीनियरिंग कोर मदद करेगी। मैन्युअल खोदाई आज सोमवार से शुरू होगी। रविवार सुबह सेना की इंजीनियरिंग रेजीमेंट मद्रास इंजीनियर ग्रुप (एमईजी) की एक टुकड़ी सिलक्यारा पहुंच गई है जो यहां मैनुअल ड्रिलिंग का जिम्मा संभालेगी। सिलक्यारा सुरंग के अंदर फंसे 41 श्रमिकों को बचाने के लिए ऑगर मशीन से ड्रिलिंग का काम किया जा रहा था।
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करीब 47 मीटर तक ड्रिलिंग कर मलबे में 800 मिमी के पाइप डाल दिए गए थे कि बीते शुक्रवार शाम को ऑगर मशीन के ब्लेड सरियों में फंस कर टूट गए जिसके बाद से ही मशीन से ड्रिलिंग का काम ठप हैं। वहीं फंसे हुए ऑगर को बाहर निकालने के लिए लेजर, प्लाज्मा व गैस कटर से कटिंग का काम जारी है। ऑगर को बाहर निकालने के बाद मैनुअल ड्रिलिंग की जाएगी। इसके लिए खासतौर पर भारतीय सेना की मद्रास इंजीनियर ग्रुप की टुकड़ी को बुलाया गया है।