आज संकष्टी अंगारकी चतुर्थी का पूजा का मुहूर्त शाम 04 बजकर 38 मिनट पर शुरू हो चुका है। चतुर्थी तिथि का समापन 20 अप्रैल को दोपहर 01 बजकर 52 मिनट पर होगा।
Today Angaraki Sankashti Chaturthi 2022 Moonrise Timing: अंगारकी संकष्टी चतुर्थी पर बिना चंद्रमा के दर्शन किए अधूरा माना जाता है। ऐसे में आज रात को भगवान गणेश की पूजा करने के बाद चंद्र दर्शन का इंतजार रहेगा। आइए जानते हैं प्रमुख शहरों में आज रात कितने बजे होगा चंद्र दर्शन...
| शहर |
चंद्रोदय का समय |
| दिल्ली |
9:50 pm |
| मुंबई |
9:48 pm |
| पुणे |
09:43 pm |
| नासिक |
09:46 pm |
| गोवा |
10:00 pm |
| हैदराबाद |
09:21 pm |
| अहमदाबाद |
09:57 pm |
| बेंगलुरु |
09:16 pm |
| कोलकाता |
08:50 pm |
अंगारकी संकष्टी चतुर्थी के दिन भूलकर भी चावल, गेहूं और दाल का सेवन न करें। इस दिन व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें। मांस, मदिरा का सेवन भूलकर भी न करें। क्रोध पर काबू रखें और खुद पर संयम बनाए रखें। दिनभर भगवान का नाम लें और चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करें।
हर महीने की पूर्णिमा तिथि के बाद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन का विशेष महत्व होता है। मान्यता है आज के दिन चंद्रमा दर्शन के बाद ही व्रत पूजा माना जाता है चंद्रमा निकलने से पहले गणेश जी की पूजा और आरती की जाती है। सूर्योदय से शुरू होने वाला संकष्टी चतुर्थी व्रत का समापन चंद्र दर्शन के बाद ही होता है। चंद्रोदय होने के बाद अर्घ्य देकर पूजा की जाती है और फिर व्रत का पारण किया जाता है।
अंगारकी संकष्टी चतुर्थी पर आज चंद्रोदय का समय Angaraki Sankashti Chaturthi 2022 Chand Nikalne Ka Time Sankashti Chaturthi 2022 Moonrise Time 19 April 2022
शहर |
चंद्रमा के उदय होने का समय |
| दिल्ली |
9:50 |
| लखनऊ |
9:31 |
| वाराणसी |
9:19 |
| गाजियाबाद |
9:50 |
| बरेली |
21:27 |
| प्रयागराज |
21:24 |
| कानपुर |
21:33 |
| आगरा |
21:44 |
| मेरठ |
21:50 |
| पटना |
21:10 |
| रांची |
21:05 |
| भागलपुर |
21:02 |
| मधुबनी |
21:08 |
| गया |
21:09 |
| गुरुग्राम |
21:50 |
| फरीदाबाद |
21:50 |
| सिरसा |
21:08 |
| जांलधर |
22:04 |
| चंडीगढ़ |
22:04 |
| अमृतसर |
22:08 |
| इंदौर |
21:43 |
| भोपाल |
21:38 |
| ग्वालियर |
21:38 |
मां पार्वती एक बार स्नान करने गईं। स्नानघर के बाहर उन्होंने अपने पुत्र गणेश जी को खड़ा कर दिया और उन्हें रखवाली का आदेश देते हुए कहा कि जब तक मैं स्नान कर खुद बाहर न आऊं किसी को भीतर आने की इजाजत मत देना। गणेश जी अपनी मां की बात मानते हुए बाहर पहरा देने लगे। उसी समय भगवान शिव माता पार्वती से मिलने आए लेकिन गणेश भगवान ने उन्हें दरवाजे पर ही कुछ देर रुकने के लिए कहा। भगवान शिव ने इस बात से बेहद आहत और अपमानित महसूस किया। गुस्से में उन्होंने गणेश भगवान पर त्रिशूल का वार किया। जिससे उनकी गर्दन दूर जा गिरी। स्नानघर के बाहर शोरगुल सुनकर जब माता पार्वती बाहर आईं तो देखा कि गणेश जी की गर्दन कटी हुई है। ये देखकर वो रोने लगीं और उन्होंने शिवजी से कहा कि गणेश जी के प्राण फिर से वापस कर दें । इस पर शिवजी ने एक हाथी का सिर लेकर गणेश जी को लगा दिया। इस तरह से गणेश भगवान को दूसरा जीवन मिला। तभी से महिलाएं बच्चों की सलामती के लिए कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी का व्रत करने लगीं।
अंगारकी संकष्टी चतुर्थी पर गणपति के सामने धूप-दीप जला कर इन मंत्रों का करें जाप
गजाननं भूत गणादि सेवितं, कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम्।
उमासुतं शोक विनाशकारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्।।
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
ॐ श्री गं गणपतये नम:
अंगारकी संकष्टी चतुर्थी
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अंगारकी संकष्टी चतुर्थी पर श्री गणपति की विशेष कृपा पाने के लिए उनके 12 नामों का जाप अवश्य करें।
1-नसुमुख
2- एकदंत
3- कपिल
4- गजकर्णक
5- लंबोदर
6- विकट
7- विघ्न-नाश
8- विनायक
9- धूम्रकेतु
10- गणाध्यक्ष
11- भालचंद्र
12- गजानन
चंद्रोदय के बाद चंद्रदेव को अर्घ्य देते हुए करें इस मंत्र का जाप करें।
'गगनार्णवमाणिक्य चंद्र दाक्षायणीपते। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक'।
अर्थात
दक्ष कन्या रोहिणी के प्रियतम !गणेश के प्रतिविम्ब !आप मेरा दिया हुआ यह अर्घ्य स्वीकार कीजिए'। चन्द्रमा को यह दिव्य तथा पापनाशक अर्घ्य देकर परिवार की कुशलता की प्रार्थना करें।
रात में संकष्टी का चांद निकलने से पहले गणेश भगवान की फिर से पूजा करें। चंद्रोदय के बाद दुग्ध से चंद्रदेव को अर्घ्य देकर पूजन करें पूजन समाप्ति के बाद ही अन्न का दान करें और भगवान से प्रार्थना भी करें। इसके बाद फलाहार ग्रहण करें।
अगर किसी कारण से चांद के दर्शन होने में किसी तरह की परेशानियां आ रही हैं तो कुछ इन उपायों से बिना चंद्र दर्शन के व्रत खोल जा सकता है।
- पंचांग के अनुसार चौथ पर चंद्रोदय के समय को ध्यान में रखते हुए व्रत का पारण किया जा सकता है।
- घर के बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद प्राप्त कर व्रत तोड़ें।
- चांद के दर्शन न होने पर थाली में चावल लेकर उसे चांद का आकार देकर अर्घ्य दें।
- बड़े बुजुर्गों के हाथों से जल ग्रहण कर व्रत तोड़ें और अगले चौथ पर चंद्र दर्शन का संकल्प लें।