इस आसन में शरीर की मुद्रा किसी सेतु के समान दिखाई पड़ती है इसलिए इसे सेतुबंधासन कहा जाता है। ये आसन गले की मांसपेशियों को गजब की मसाज देता है। गले की मांसपेशियों पर दबाव पड़ने से खराश की समस्या दूर होती है इसलिए इन दिनों तो इसका अभ्यास करना ही चाहिए। यह आसन बड़े और छोटे सभी कर सकते हैं और बड़ी आसानी से कर सकते हैं। अगली स्लाइड्स से जानते हैं सेतुबंधासन करने का सही तरीका एवं लाभ।
विधि-
सेतुबंधासन करने के लिए योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं। सांसो की गति को सामान्य रखें। इसके बाद हाथों को बगल में रख लें। अब धीरे-धीरे पैरों को घुटनों से मोड़कर हिप्स के पास ले आएं। हिप्स को जितना हो सके फर्श से ऊपर की तरफ उठाएं। इस दौरान हाथ जमीन पर ही रहेंगे। कुछ देर के लिए सांस को रोककर रखें। इसके बाद सांस छोड़ते हुए वापस जमीन पर आएं। पैरों को सीधा करें और विश्राम करें।
लाभ-
-पीठ की मासपेशियां मजबूत होती हैं, साथ ही उन्हें आराम पहुंचता है।
-पीठ, छाती व गर्दन में अच्छा खिंचाव पैदा होता है जिससे कि गले की खराश भी दूर होती है।
-अवसाद, तनाव, चिंता आदि से राहत दिलाता है।
-फेफड़ों को खोलने के साथ ही थायरोइ़ड की समस्या को दूर करता है।
-पाचन तंत्र को ठीक करने में सहायता करता है।
-मासिक धर्म व रजोनिवृति के दौरान मदद करता है।
-उच्च रक्त चाप, अस्थमा, ऑस्टियोपोरोसिस व साइनस के लिए लाभदायक
सावधानियां-
यदि आपको कमर या गर्दन में कोई तकलीफ है तो इस आसन का अभ्यास न करें और गर्भावस्था में भी प्रशिक्षक की गैर मौजूदगी में इसका अभ्यास न करें।