ऋषि मत्स्येंद्रनाथ के नाम से अर्धमत्स्येंद्रासन का नामाकरण किया गया है। इस आसन को बहुत प्रभावशाली माना जाता है। वक्रासन भी इसी आसन का नाम है और इसे करना बहुत कठिन नहीं है। पीठ और रीढ़ से जुड़ी समस्याओं में तो यह आसन रामबाण की तरह काम करता है। बच्चों को इस आसन का अभ्यास अवश्य करवाना चाहिए क्योंकि इससे शरीर में लचीलापन आता है और वे अन्य क्लिष्ठ आसनों के लिए तैयार हो जाते हैं। आइए जानते हैं अर्धमत्स्येंद्रासन करने का तरीका और इससे होने वाले लाभ।
विधि
अर्धमत्स्येंद्रासन के लाभ
-पाचन तंत्र में सुधार होता है और कब्ज से राहत मिलती है।
-पीठ में यदि दर्द होता है तो इस आसन का नियमित अभ्यास करना चाहिए।
-यदि लंबाई अधिक होने के कारण आपके कंधे झुक चुके हैं, तब तो आपको इस आसन का अभ्यास जरूर करना चाहिए।
-स्लिप डिस्क की समस्या में भी यह आसन लाभदायक है।
- फेफड़ों में ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ती है।
-गर्दन में यदि तनाव महसूस होता है तो इस आसन का अभ्यास अवश्य करें।
सावधानियां-
गर्भावस्था और मासिक धर्म के दौरान इस आसन का अभ्यास न करें। रीढ़ की हड्डी में चोट आने पर भी आसन न करें। जिन लोगों को पेप्टिक अल्सर की समस्या है, उन्हें इस आसन को बहुत सावधानी से करना चाहिए।