Stress at Work: ऐसा कई लोगों के साथ होता है कि वे चाहते हुए भी किसी काम या व्यवहार को 'न' नहीं कह पाते। इसका खामियाजा उन्हें लंबे समय तक भुगतना पड़ता है। दिलों में कड़वाहट आने से लेकर रिश्ते टूट जाने और दफ्तर में एक्स्ट्रा काम करने तक की वजह न, नहीं कह पाने की यह आदत बन सकती है। कई बार तो यह आदत बोझ की तरह व्यक्ति के मन पर बनी रहती है और कई बार 'न' शब्द जुबान तक आते आते रह जाता है। अगर वर्कप्लेस या प्रोफेशनल लाइफ में यह आदत आपके व्यवहार का हिस्सा है तो आप काम के बोझ के अलावा तनाव, स्ट्रेस, एंग्जायटी आदि के भी शिकार हो सकते हैं। इसलिए प्रोफेशनल लाइफ में भी 'न' कहना सीखिए।
सुबह से विवेक बड़बड़ाये जा रहा है। गुस्से में नाश्ता भी नहीं किया और हड़बड़ाहट में काम किए जा रहा है। ये दृश्य विवेक की मां के लिए नया नहीं है। वह जानती हैं कि दफ्तर में किसी ने फिर से अपना काम चतुराई से विवेक के सिर मढ़ दिया होगा। विवेक उसको न नहीं कह पाया होगा। अब विवेक का खुद का काम और ये एक्स्ट्रा काम मिलकर विवेक को परेशान किए हुए हैं। वो न तो अपने काम में मन लगा पा रहा है, न ही खुद की तरफ ध्यान दे पा रहा है।
आपको भी ये कुछ जाना पहचाना दृश्य लग रहा होगा। ऐसे लोग हमारे आस पास भी हो सकते हैं। यह आप स्वयं भी इस आदत के शिकार हो सकते हैं।
ये आदत आपके लिए जीवन भर की मुसीबत बन जाए, इसके पहले इसे सुधारने के लिए कुछ कदम उठाइए।
- किसी को 'न' कहने से आपको झिझक होती है, आपके मन में यह भाव आता है कि सामने वाला बुरा मान जाएगा या इससे भविष्य में कहीं आपके काम पर असर न पड़े या कई बार तो सामने किसी सीनियर व्यक्ति को देखकर भी आप न नहीं कह पाते।
- ऐसा कभी कभार तो चल सकता है, लेकिन यदि बार बार ऐसा होने लगे तो इसका मतलब सामने वाला आपकी सज्जनता का फायदा उठाना चाहता है और ऐसे व्यक्ति को न कहने में तो कोई बुराई नहीं, क्योंकि आपने उसके काम के लिए मना किया है। अपना काम तो आप अच्छे से कर ही रहे हैं।
- अपनी स्थितियों को स्पष्ट कर देना हर तरह से अच्छा है। आपके पास 'न' कहने के कई विकल्प हो सकते हैं। पहला यह कि अपने सहकर्मी या दोस्त को आप साफ मना कर सकते हैं, किसी बेवजह परेशान करने वाले सीनियर को आप थोड़ी चतुराई से टाल सकते हैं और अपने बॉस को आप अपनी स्थितियां समझा सकते हैं। आपका तरीका हमेशा विनम्रता से बात रखने का होना चाहिए और आपकी बात एकदम क्लियर।
- अपनी क्षमताओं को समझिए और उसके हिसाब से ही किसी भी काम के लिए हां कहिए। अगर आपको लगता है कि दिए हुए वक्त में आप काम पूरा नहीं कर पाएंगे, तो स्पष्ट मना कीजिए।
- यह हमेशा याद रखिए कि कमिटमेंट पूरा न कर पाने की आपकी असफलता से ज्यादा यह बात मायने रखेगी कि आपने अपनी क्षमताओं को पहचान कर काम किया।
- अपने लिए कुछ नियम बनाएं। जैसे एक वक्त पर एक काम करना, एक दिन में कुल कितने काम करना और किन स्थितियों में आप किसी की मदद कर पाएंगे आदि। इससे आप अपनी बात स्पष्टता से कह पाएंगे।
- एक साथ बहुत सारे काम हाथ मे ले लेने से आप सभी पर फोकस नहीं कर पाएंगे और उस काम को भी ठीक से नहीं कर पाएंगे, जिसमें आप सबसे अच्छे हैं। इसलिए एक-एक करके काम खत्म करें।
- न कहने से एक बार सामने वाले को बुरा लग सकता है, लेकिन आपके काम न कर पाने से यह बेहतर रहेगा और अगली बार से वह भी आपकी स्थिति को समझकर ही काम देगा।
- आपका स्पष्ट न कहना आपको चिंतामुक्त रखेगा और आप अपना 100 परसेंट काम मे दे पाएंगे।