मुंह के कैंसर का इलाज लेजर से भी संभव है। यदि मरीज प्री कैंसर स्टेज (शुरुआती चरण) में ही चिकित्सक के पास आ जाए तो बिना किसी दुष्प्रभाव के कैंसर का इलाज किया जा सकता है। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) उत्तर भारत का ऐसा पहला संस्थान है, जिसके दंत संकाय में लेजर ट्रीटमेंट की सुविधा उपलब्ध है। यह जानकारी केजीएमयू के ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग और क्रेनियोफेशियल रिसर्च फाउंडेशन के एक कार्यक्रम में प्रो. शादाब मोहम्मद ने दी।
प्रो. शादाब ने बताया कि लेजर ट्रीटमेंट मुंह के कैंसर की आधुनिकतम तकनीक है। इससे मरीज की सिर्फ कैंसरग्रस्त कोशिकाएं ही नष्ट होती हैं। स्वस्थ कोशिकाओं को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। दर्द भी कम होता है और मरीज को जल्दी फायदा होना शुरू हो जाता है। उन्होंने बताया कि कैंसर के इलाज में ध्यान रखने योग्य बात यह है कि मरीज में जितनी जल्दी रोग की पहचान होगी, उतना ही उसका प्रभावी इलाज होता है।
संजय गांधी पीजीआई के न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग के प्रो. पीके प्रधान ने बताया कि नवीनतम ‘पेट सीटी स्कैन’ ने कैंसर के इलाज को और प्रभावी बना दिया है। इससे कैंसर की गंभीरता का पता लगाया जा सकता है। यही नहीं पेट सीटी से मरीज को इलाज का कितना फायदा मिल रहा है, इसका भी पता लगता है। अभी प्रदेश में कहीं भी पेट सीटी नहीं है। पीजीआई में जल्दी ही पेट सीटी जांच शुरू हो जाएगी। इससे मरीजों को इस जांच के लिए दिल्ली नहीं जाना होगा।
डॉ. दिव्या मेहरोत्रा और डॉ. यूएस पाल ने बताया कि तंबाकू, गुटखा, सादा पान मसाला या मीठी सुपारी का सेवन कैंसर का कारण बनते हैं। इन पदार्थों के लगातार सेवन और इलाज के प्रति लापरवाही से छोटा सा छाला कैंसर में बदल सकता है। गाल, होठ, जीभ और मसूढे़ में कैंसर ज्यादा होता है। इससे पहले कुलपति प्रो. डीके गुप्ता ने दीप प्रज्वलित कर न्यू डेंटल ओपीडी में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
जीभ से पता लगाएं कैंसर का
ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हरिराम ने बताया कि मुंह में कैंसर होने पर अंदरूनी हिस्से में कई बदलाव होने लगते हैं। इन असामान्य बदलावों को जीभ तुरंत पकड़ लेती है। कैंसर के शुरुआती लक्षणों का स्वयं पता लगाने के लिए जीभ से अच्छा कोई भी साधन नहीं है। जीभ को पूरे मुंह, मसूढ़ों, गालों में घुमाकर असामान्य बदलावों का अनुभव किया जा सकता है।
यदि लंबे समय तक ये बदलाव रहे तो तुरंत चिकित्सक को दिखाना चाहिए। उन्होंने बताया कि तंबाकू का सेवन मुंह के कैंसर को बढ़ावा दे रहा है। केजीएमयू डेंटल की ओपीडी में आने वाले हर 100 मरीजों में से 2-3 मरीज ऐसे आते हैं, जिन्हें कैंसर होता है। वहीं, 6 से 7 मरीज ऐसे होते हैं, जिनमें कैंसर की शुरुआती स्टेज मुंह के अंदर सफेद दाग (ल्यूकोप्लेकिया), मुंह पूरा न खुलना, (सबम्यूकस फाइब्रोसिस), मुंह के अंदर लाल चकत्ते (एरिथ्रोप्लेकिया) के लक्षण आ जाते हैं।
ऐसे लक्षणों में यदि मरीज चिकित्सक के पास पहुंच जाए तो उसका इलाज पूरी तरह से संभव है। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती जाती है, वह लाइलाज हो जाती है। उन्होंने बताया कि केजीएमयू में कैंसर रोगियों के नि:शुल्क इलाज की सुविधा है।