उन दिनों में अनियमितता न सिर्फ पीरियड्स के दौरान परेशानी का सबब है बल्कि आगे चलकर महिलाओं की सेहत के लिए भी बड़ा रिस्क है। आजकल पीरियड्स से जुड़ी समस्या हर महिला के लिए उम्र के किसी न किसी पड़ाव पर हो सकती है। ऐसे में किशोरावस्था में अनियमित पीरियड्स की दिक्कत आगे चलकर महिलाओं में पोलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) का संकेत हो सकती है।
हाल में हुए एक शोध के अनुसार, आजकल अनियमित पीरियड्स की समस्या किशोरियों में बेहद आम है जो आगे चलकर उनके पीसीओएस से पीड़ित होने का संकेत हो सकती है।
पीसीओएस एंडोक्राइन से जुड़ी एक ऐसी स्थिति है जिसमें महिलाओं के शरीर में एंड्रोडेन्स या मेल हार्मोन अधिक होने लगते हैं। ऐसे में शरीर का हार्मोनल बैलेंस गड़बड़ हो जाता है जिसका असर अंडों के विकास पर पड़ता है और ओव्यूलेशन व मासिक चक्र रुक सकता है।
ये हैं लक्षण
इस समस्या से पीड़ित महिलाओं का वजन तेजी से बढ़ता है, उनके सिर के बाल कम होने लगते हैं और शरीर व चेहरे पर बाल अधिक हो जाते हैं, सिरदर्द रहता है, मुंहासें या बांझपन की समस्या हो सकती है।
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ये है रिस्क
पीसीओएस से न सिर्फ शरीर का हार्मोनल अंतुलन होता है बल्कि यह बांझपन, ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, एंडोक्राइन का कैंसर व डायबिटीज का कारण भी हो सकता है। इसमें शरीर में इन्सुलिन कम हो जाता है।
उपचार
इस समस्या का उपचार संभव है लेकिन दवा के साथ-साथ जीवनशैली में बदलाव बहुत जरूरी है। इस समस्या के उपचार के लिए कसरत और सही खानपान पर बल दिया जाता है।