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गर्भवती महिलाओं की मदद करेगी 'हिप्नोबर्थ थेरेपी'

Mon, 09 Dec 2013 01:49 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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प्रजनन के लिए जहां अब फिर से डॉक्टर नॉर्मल डिलिवरी पर जोर दे रहे हैं वहीं नॉर्मल डिलीवरी को गर्भवती महिलाओं के लिए थोड़ा आसान बनाने में हिप्नोसिस थेरेपी के प्रयोग का चलन शुरू हुआ है।
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ऐसी महिलाओं को प्रजनन में होती है दिक्कत

यही वजह है कि ब्रिटिश राजकुमारी केट मिमिडलटन से लेकर किम कार्दिशियन जैसी सेलिब्रिटी भी नॉर्मल डिलीवरी के दौरान हिप्नोसिस की नई टेकनीक 'हिप्नोबर्थ' को आजमा चुकी हैं।

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फॉक्स न्यूज में प्रकाशित खबर में इस थेरेपी से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं का पता चला है।

कनेक्टीकट में हिप्नोबर्थ तकनीक पर काम कर रहीं सिंथिया ओवरगार्ड के अनुसार, ''हिप्नोसिस का मतलब है आराम और फोकस। इस तकनीक से हम गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के स्ट्रेस को कम करने और लेबर पेन के वक्त उनका फोकस बढ़ाने और दर्द से ध्यान हटाने की कोशिश करते हैं। इससे शरीर में फील गुड हार्मोन ऑक्सीटोसिन बढ़ता है और प्रजनन आसान होता है।''
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उनका मानना है कि अमूमन महिलाएं प्रजनन के दौरान इतनी अधिक डर और असुरक्षा महसूस करती हैं कि उनके शरीर में एड्रेनलाइन का स्तर बढ़ता है दिससे यूटेरस की ओर रक्त का प्रवाह कम होता है और प्रजनन में तकलीफ अधिक होती है। इस विधि से इस रिस्क को कम किया जा सकता है।

ऐसे काम करेगा हिप्नोबर्थ
इस थेरेपी के अंतर्गत गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं को प्राणायाम, विजुअल पर फोक्स से लेकर हिप्नोटिज्म के कई छोटे-छोटे सेशन दिए जाते हैं जिससे वे तनावमुक्त रहें।

लेबर पेन के दौरान कमरे में मध्यम लाइट, हल्का संगीत और फोकस बढ़ाने का सेशन होता है जिससे उन्हें प्रजनन के दौरान कम तकलीफ हो सके। इसके लिए वर्ड थेरेपी (नकारात्मक शब्दों के बजाय सकारात्मक शब्दों को दोहराना) की भी मदद ली जाती है।
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यह विधि प्राकृतिक रूप से प्रजनन के दौरान स्ट्रेस पर नियंत्रण रखने में कारगर हो सकती है लेकिन इसे एकमात्र विकल्प नहीं मान सकते हैं।
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