ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा है कि एंटीबायोटिक प्रतिरोध के बढ़ते ख़तरे पर ध्यान नहीं दिया गया तो दुनिया चिकित्सा के 'अंधकार युग' में वापस चली जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस बात की समीक्षा की जाएगी कि क्यों हाल के वर्षों में बेहद कम एंटी माइक्रोबियल दवाएँ सामने आई हैं।
एंटीबायोटिक काम करना क्यों बंद करती हैं?
एंटीबायोटिक दवाएं बैक्टीरिया को ख़त्म कर देती हैं या उनकी वृद्धि को रोक देती हैं, लेकिन लगातार इस्तेमाल से बैक्टीरिया में उत्परिवर्तन के कारण एक प्रतिरोध क्षमता पैदा हो जाती है। प्रतिरोध की यह क्षमता बैक्टीरिया की एक प्रजाति से दूसरी में चली जाती है।
ओवरडोज़ है ज़िम्मेदार?
अधिकाधिक एंटीबायोटिक के इस्तेमाल से यह प्रतिरोध तेज़ी से पैदा होता है। विशेषज्ञ इसके लिए अंधाधुंध एंटिबायोटिक दवाओं के इस्तेमाल को ज़िम्मेदार मानते हैं।
हालात हाथ से बाहर?
कई बार छोटी-छोटी बीमारियों के लिए भी ये दवाएं ली जाती हैं और कुछ मामलों में इलाज अधूरा रह जाने पर बैक्टीरिया उस दवा के प्रति प्रतिरोध पैदा कर लेते हैं।
माना जा रहा है कि ठीक होने वाली कुछ बीमारियां एंटीबायोटिक के कारण लाइलाज हो जाएंगी।
बढ़ता ख़तरा
एमआरएसए सुपर बग इतनी सारी दवाओं के प्रति प्रतिरोध क्षमता विकसित कर चुका है कि इनका इलाज पहले ही मुश्किल हो गया है।
कई दवाओं के प्रति प्रतिरोध क्षमता वाले टीबी के बैक्टीरिया और न्यू डेल्ही मेटैलौ-बीटा-लैक्टामेज़ (एनडीएम-1) गंभीर ख़तरा बन चुके हैं।
शोध की कमी
दवा कंपनियां सामान्य संक्रमण के लिए तरह-तरह की एंटीबायोटिक दवाएं बनाने पर शोध तो कर रही हैं लेकिन मुनाफ़े के लिहाज से वो बहुत महंगा पड़ता है।
अधिकांश नई एंटीबायोटिक दवाएं पुराने फॉर्मूले का ही विकल्प होती हैं इसलिए प्रतिरोध क्षमता भी बड़ी तेज़ी से विकसित होती है।
क्या करें
वायरल संक्रमण ये दवाएं काम नहीं करती हैं इसलिए केवल बैक्टीरिया संक्रमण में ही इसे लेना चाहिए। ठीक होने के बाद भी दवा का कोर्स पूरा करना चाहिए। साफ़ सफ़ाई पर ध्यान रखना चाहिए।