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Year Ender 2024: कोविड वैक्सीन को लेकर 'ब्लैक एंड व्हाइट' ईयर, कैंसर के टीकों ने जगाई नई उम्मीद

Sat, 21 Dec 2024 10:11 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

साल 2024 वैक्सीन और दवाओं के नवाचार को लेकर काफी याद किया जाता रहेगा। विशेषज्ञों ने कोविड के बूस्टर वैक्सीनेशन पर जोर दिया, वहीं दूसरी तरफ  वैक्सीन्स को लेकर ये सवाल भी उठे कि इससे कहीं हार्ट अटैक का खतरा तो नहीं बढ़ रहा है? सर्वाइकल कैंसर और टीकाकरण ने भी खूब सुर्खियां बटोरी और साल खत्म होते होते रूस ने एक mRNA कैंसर वैक्सीन के बारे में जानकारी दी। आइए इस साल वैक्सीनेशन और इससे जुड़ी खबरों पर एक नजर डालते हैं।
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वैक्सीन को लेकर चर्चा में रहा साल 2024 - फोटो : Freepik.com
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विस्तार
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साल 2024 अब अपने आखिरी चरणों में पहुंच गया है। इस साल को कई चीजों के लिए लंबे समय तक याद किया जाता रहेगा। सेहत के नजरिए से देखें तो साल 2024 निश्चिच ही कई मामलों में काफी चुनौतीपूर्ण रहा, हालांकि कई खोज और मेडिकल क्षेत्र के नवाचार ने लोगों को नई उम्मीदें भी दीं।

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संक्रामक बीमारियों जैसे जोंबी और मंकीपॉक्स वायरस ने जहां एक तरफ लोगों को खूब डराया वहीं कोविड और कैंसर की रोकथाम के लिए वैक्सीन से नई उम्मीदें जगीं।

अब ये साल खत्म होने वाला है, कुछ ही दिनों में हम नए साल में प्रवेश करने जा रहे हैं ऐसे में आइए इस साल टीकाकरण और उपचार की दिशा में क्या प्रगति हुई इसपर एक नजर डाल लेते हैं। मेडिकल क्षेत्र में नवाचार को लेकर ये साल काफी महत्वपूर्ण रहा है।

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कोरोना टीका (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एएनआई
कोरोना के एक और बूस्टर शॉट पर दिया गया जोर

साल की शुरुआत कोरोना के एक नए वैरिएंट JN.1 के साथ हुई। यूएस-यूके और भारत सहित कई देशों में इस नए वैरिएंट के कारण संक्रमण के मामलों में तेजी से उछाल देखा गया। जनवरी-फरवरी के महीनों में ओमिक्रॉन के इस सब-वैरिएंट के कारण कई स्थानों पर लोगों में गंभीर रोगों और अस्पताल में भर्ती होने का खतरा भी देखा गया जिसको देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने 60 से अधिक की आयु वाले लोगों को एक और कोविड वैक्सीन लेने की सलाह दी। 

सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने कहा, 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोग, जिनके आखिरी टीकाकरण को चार माह से अधिक का समय बीत गया है उन्हें एक और बूस्टर डोज लगवा लेना चाहिए। कोविड की अपडेट की गई वैक्सीन की एक अतिरिक्त खुराक शरीर में प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने और भविष्य में संक्रमण की स्थिति में गंभीर रोग के खतरे से बचाने में सहायक हो सकती है।

वैक्सीन पर सवाल भी उठे

कोविड वैक्सीन्स में वैज्ञानिकों की टीम ने नए वैरिएट्स के अनुरूप बदलाव किया ताकि ओमिक्रॉन के इसके नए सब-वैरिएंट्स से मुकाबला किया जा सके। हालांकि इसके पैरलल वैक्सीन्स को लेकर लोगों के मन में डर भी देखा गया। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि कोविड वैक्सीन लेने वाले लोगों में हृदय रोगों का खतरा बढ़ गया है। रिपोर्ट्स में वैश्विक स्तर पर बढ़ते हृदय रोगों के लिए वैक्सीनेशन को भी एक कारण बताया गया। इस रिपोर्ट ने  दुनियाभर में लोगों में मन में डर बढ़ा दिया।

हालांकि बाद में स्वास्थ्य संगठनों ने इन खबरों का खंडन भी किया। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आई.सी.एम.आर) ने लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा है कि वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित हैं और इसके कारण किसी तरह की समस्या नहीं हो रही है।

तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने भी स्पष्ट किया कि कोविड-19 वैक्सीन से हार्ट अटैक का कोई संबंध नहीं है। वैक्सीन न तो हृदय रोगों के खतरे को बढ़ाती है न ही ये  दिल के दौरे का कारण बनती है। इस तरह की बातों पर विश्वास न करें। 

कोविड की दवा - फोटो : Freepik.com
कोविड की दवा- पैक्सलोविड ने बढ़ाई उम्मीद

कोविड के उपचार को लेकर किए जा रहे शोध में विशेषज्ञों को इस साल बड़ी कामयाबी भी मिली। जर्नल ऑफ एंटीमाइक्रोबियल कीमोथेरेपी में प्रकाशित शोध की रिपोर्ट में पैक्सलोविड दवा को काफी लाभकारी पाया गया। शोधकर्ताओं ने बताया कि ये दवा कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती होने के खतरे को 84 प्रतिशत तक कम कर सकती है। वैज्ञानिकों ने कहा अगर संक्रमितों का इलाज कर रहे डॉक्टर्स को लगता है कि रोग गंभीर रूप ले रहा है तो इस दवा को इलाज में शामिल करके खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।

अमेरिका की मिनेसोटा यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट में बताया गया, जिन मरीजों को इलाज के दौरान पैक्सलोविड दिया गया उनमें अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम कम था। 

कैंसर का खतरा - फोटो : Freepik.com
सर्वाइकल कैंसर और टीकाकरण ने भी बटोरी सुर्खियां

कोविड-19 के साथ सर्वाइकल कैंसर को लेकर भी इस साल खूब चर्चाएं हुईं। इसको लेकर तब चर्चाएं और भी तेज हो गईं जब 2 फरवरी को अचानक से खबर आई कि एक्ट्रेस और मॉडल पूनम पांडे की सर्वाइकल कैंसर से मौत हो गई है। हालांकि हालांकि 24 घंटे बाद वे खुद सामने आईं और खुलासा किया कि यह उनका पब्लिसिटी स्टंट था। सर्वाइकल कैंसर के बारे में जागरूकता  बढ़ाने के लिए उन्होंने ऐसा किया।

इस घटना के बाद चर्चा तेज हो गई कि सभी महिलाओं को इस घातक कैंसर से बचाव के लिए ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) टीका जरूर लगवाना चाहिए। इससे पहले बजट 2024-25 में वित्तमंत्री ने देश में वैक्सीनेशन की दर को बढ़ाने का ऐलान भी किया था, जिससे अधिक से अधिक लोगों को इस घातक प्रकार के कैंसर से सुरक्षित रखा जा सके।

अध्ययनकर्ताओं ने बताया, एचपीवी वैक्सीनेशन सर्वाइकल कैंसर के बढ़ते जोखिमों को कम करने में मददगार हो सकती है। टीके 90% से अधिक एचपीवी संक्रमण और कैंसर को कम करने में मददगार पाए गए हैं। 


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कैंसर से बचाव - फोटो : Freepik.com
कैंसर से बचाव के लिए टीका

साल के अंत में रूस ने एक mRNA कैंसर वैक्सीन के बारे में जानकारी साझा की है जो कैंसर के खतरे से बचाने में मददगार हो सकती है, इसे 2025 में लॉन्च किया जाना है। प्री-क्लीनिकल ट्रायल में पाया गया है कि ये ट्यूमर से बचाने और मेटास्टेसिस को कम करने में मदद कर सकते हैं। वैक्सीन का उद्देश्य कैंसर कोशिकाओं को लक्षित करने और उन्हें खत्म करने को लेकर प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाना है।

रूसी स्वास्थ्य मंत्रालय के रेडियोलॉजी मेडिकल रिसर्च सेंटर के महानिदेशक आंद्रेई काप्रिन ने मीडिया को बताया कि, "रूस ने कैंसर के खिलाफ mRNA टीका विकसित किया है, इसे रोगियों को निःशुल्क वितरित किया जाएगा। ने रेडियो रोसिया को बताया है। ये वैक्सीन कैंसर के कारण होने वाले जोखिमों से बचाने में मदद कर सकती है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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