कोरोना काल में प्रभावित हुआ है अंगदान
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कोरोना काल में किडनी ट्रांसप्लांटेशन
कोरोना के दौर में अंगों के प्रत्यारोपण में आई कमी स्वास्थ्य संस्थाओं के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। अमेरिकन सोसाइटी ऑफ ट्रांसप्लांटेशन के विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ लोगों की तुलना में प्रत्यारोपण प्राप्तकर्ताओं में कोविड संक्रमण का खतरा कितना अधिक हो सकता है, इस बारे में फिलहाल विशेष जानकारी उपलब्ध नहीं है, अध्ययन किया जा रहा है। माना जाता रहा है कि चूंकि प्रत्यारोपण प्राप्तकर्ता इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं लेते हैं, ऐसे में इनमें संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है। इस बारे में जल्द से जल्द शोध करके गंभीरता की जांच करना आवश्यक है। फिलहाल अंगों के प्रत्यारोपण के दौरान डॉक्टरों को सभी पहलुओं पर गंभीरता से नजर रखना आवश्यक है।
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ-
अंग प्रत्यारोपण के बारे में मणिपाल अस्पताल मल्लेश्वरम में वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ जी के प्रकाश कहते हैं-
कोरोना काल में संक्रमण के डर के कारण अंग प्रत्यारोपण पर सीधा असर देखने को मिल रहा है। अंगदान को बढ़ावा देने के लिए हमें लोगों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है ,जिससे दाता और प्राप्तकर्ता के बीच बड़ा गैप न बनने पाए। कोरोना महामारी ने अंगों की प्रतीक्षा कर रहे रोगियों के लिए बड़ी मुश्किलें पैदा कर दी हैं।
अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. श्रीनिवास आरपी कहते हैं
दुनियाभर में ज्यादातर लोगों की मौत उपयुक्त अंग के इंतजार में हो जाती है। स्वास्थ्य संगठनों को अंगदान को लेकर लोगों को विशेष जागरूक करने की आवश्यकता है जिससे कोरोना का डर खत्म कर लोग अंगदान के लिए पहले की तरह ही आगे आ सकें।
रक्तदान में भी देखी जा रही है भारी कमी
राष्ट्रीय रक्त आधान परिषद (NBTC) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार जिन लोगों ने टीके लगवा लिए हैं वह वैक्सीन की प्रत्येक खुराक के बाद 28 दिनों तक रक्तदान नहीं कर सकते हैं। कोरोना के दौरान लगे लॉकडाउन, शिक्षण संस्थान बंद होने और वर्क फ्रॉम होम के कारण ब्लड बैंक रक्त दान शिविर नहीं लगा सकते हैं। ऐसे में डोनरों की काफी कमी देखा जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक रक्तदान करने वाले ज्यादा लोग 19 से 44 की आयु वाले होते हैं, जिनके मन में कोरोना के कारण फिलहाल रक्तदान को लेकर कई तरह के डर भी हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक ब्लड बैंकों में रक्त को अनिश्चित काल तक संग्रहित नहीं किया जा सकता है। ऐसे में भविष्य में आने वाली दिक्कतों से बचने के लिए रक्तदान शिविरों का संचालन कर लोगों को रक्तदान के लिए प्रोत्साहित करना होगा। कोरोना महामारी एक दिन खत्म हो जाएगी लेकिन उसके बाद ब्लड बैंकों में रक्त की कमी किसी विकट समस्या का कारण न बने, इस बारे में भी हमें सचेत रहने की जरूरत है।