कोरोना की दूसरी लहर को विशेषज्ञ काफी खतरनाक मानते हैं। पहली लहर की तुलना में इस बार संक्रमितों के मामले में भी काफी इजाफा देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि कोरोना के म्यूटेंट वायरस के कारण लोगों में संक्रमण के गंभीर रूप देखे जा रहे हैं। पर म्यूटेशन के बाद वायरस इतना खतरनाक क्यों हो गया है? आइए इस बारे में विशेषज्ञों से जानने की कोशिश करते हैं।
अमर उजाला फाउंडेशन की पहल के माध्यम से कोरोना महामारी को लेकर मंगलवार को हुई चर्चा में हमने विशेषज्ञों ने इसी विषय के बारे में बातचीत की। इस दौरान एम्स दिल्ली की डॉ आयशी पाल ने तमाम सवालों के जवाब दिए।
क्यों ज्यादा खतरनाक है कोरोना का म्यूटेंट वायरस
डॉ आयशी पाल कहती हैं कि सिर्फ कोरोना है नहीं, हर वायरस म्यूटेशन करता है। देश में हाल के दिनों में सबसे ज्यादा यूके स्ट्रेन (B.1.17) के वायरस से होने वाले संक्रमण के मामले देखने को मिले हैं। कोरोना के म्यूटेंट वायरस को इसलिए ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है क्योंकि इसमें लोगों को सांस लेने की दिक्कत महसूस हो रही है, जबकि पिछले साल वाले वायरस में लोगों को सिर्फ बुखार और खांसी जैसी दिक्कतें ही हो रही थीं।
कोरोना का म्यूटेंट कई मामलों में खतरनाक
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घर पर ही प्रारंभिक उपचार के तौर पर क्या कर सकते हैं?
डॉ आयशी कहती हैं कि जिन लोगों को कोविड के लक्षण हैं उन्हें कुछ सामान्य सी दवाइयां हमेशा अपने पास रखनी चाहिए। जिन लोगों का बुखार कम नहीं हो रहा है और सांस की भी दिक्कत है उन्हें अपने पास इन्हेलर भी रखना चाहिए। वहीं जिनका ऑक्सीजन लेवल लगातार कम हो रहा है उन्हें उल्टा लेटने और इन्हेलर के दो से तीन पफ लेने से फौरी तौर पर लाभ मिल सकता है। इसके बाद भी अगर हालत ठीक नहीं हो रही है तो रोगी को अस्पताल लेकर जाना चाहिए।
आगे के म्यूटेशन में क्या हो सकता है?
इस सवाल के जवाब में डॉ आयशी कहती हैं कि ऐसा जरूरी नही है कि कोरोना के अगले म्यूटेशन भी खतरनाक हों। जैसे कि इस म्यूटेशन में लोगों को सांस की दिक्कत हो रही है, हो सकता है वायरस का जब अगला म्यूटेशन हो तो उसके लक्षण बहुत हल्के स्तर के हों। हर स्ट्रेन की गंभीरता दूसरे से भिन्न हो सकती है।
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नोट: यह लेख एम्स दिल्ली की डॉ आयशी पाल से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
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