प्रतीकात्मक तस्वीर
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अक्सर अनुमान ये लगाया जाता है कि गर्भावस्था में होने वाली तलब महिला या भ्रूण की कुछ पोषण संबंधी जरूरतें पूरी कर रही हैं। गर्भावस्था यूं भी एक लंबी, थकाऊ और असुविधाजनक प्रक्रिया है। ऐसे में अगर कुछ मन चाहा खाने से मन को शांति मिलती है तो कोई हर्ज नहीं है। रिसर्च से पता चलता है कि गर्भावस्था में होने वाली तलब हरेक संस्कृति में भिन्न है। उदाहरण के लिए, गैर-अंग्रेज संस्कृति में अमेरिका और ब्रिटेन की महिलाओं जैसी तलब नहीं होती। इसी तरह जापान में गर्भवती महिलाओं को चावल की तलब ज्यादा होती है तो भारत में अक्सर प्रेगनेंट महिलाएं खट्टा खाने की मांग करती हैं।
जिस देश में जैसे खान-पान का चलन होता है, ललक भी उन्हीं चीजों की होती है। मिसाल के लिए जिसने कभी गोल-गप्पे न खाए हों, उसे कभी भी गोल-गप्पे खाने का बड़ा तेज मन नहीं होगा। जानकारों का कहना है कि बहुत मन होने पर, खाने से शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं बल्कि गैर जरूरी वजन बढ़ जाता है और कई प्रकार की समस्याएं खड़ी हो जाती हैं।