बूस्टर शॉट्स वाले भी सुरक्षित नहीं
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बूस्टर डोज ले चुके लोग भी सुरक्षित नहीं
बफेलो यूनिवर्सिटी के में संक्रामक रोग के विशेषज्ञ डॉ थॉमस.ए. रूसो कहते हैं, सिर्फ अमेरिका नहीं दुनियाभर में कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों की आबादी अधिक है। ऐसे में अगर कोरोना के किसी नए वैरिएंट के कारण एक और लहर आती है तो ये हमारी संवेदनशीलता बढ़ाने वाली हो सकती है।
इसके अलावा ऐसे भी कई डेटा भी हैं जो दिखाते हैं कि जिन लोगों को नवीनतम कोविड बूस्टर डोज मिला है, उन्हें भी संभावित उछाल के खिलाफ पूरी तरह से सुरक्षित नहीं माना जा सकता है। हर बार वैरिएंट में देखा जा रहा नया म्यूटेशन संक्रमण के जोखिमों को और भी बढ़ाने वाला हो सकता है।
वैक्सीन और इसकी प्रभाविकता से संबंधित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा इसी सप्ताह जारी एक प्रीप्रिंट अध्ययन में इस बात के पुख्ता सबूत पेश किए गए हैं कि नवीनतम बूस्टर शॉट्स भी जेएन.1 और इसके सब-वैरिएंट्स के खिलाफ पूरी तरह से सुरक्षा नहीं दे सकती है।
गौरतलब है कि जेएन.1 वैरिएंटस सर्दियों के दौरान विश्व स्तर पर फैल गया था और अभी भी अमेरिका में 95% कोविड-19 के मामलों के लिए इसी वैरिएंट को प्रमुख कारण माना जा रहा है। अकेले अमेरिका में ही इस वैरिएंट के कारण दिसंबर में संक्रमण के मामलों में 21% और जनवरी के तीसरे सप्ताह तक 85% की वृद्धि रिपोर्ट की गई थी।
टीकाकरण ही कोरोना से बचाव का बेहतर तरीका
कोरोना के संभावित खतरों को देखते हुए वैज्ञानिकों ने कहा, भले ही इस बारे में कई सवाल हैं कि बूस्टर शॉट्स लेने वाले भी कोरोना से पूरी तरह से सुरक्षित नहीं हैं फिर भी टीकाकरण ही अभी भी कोरोना के खतरे से बचने का सबसे अच्छा तरीका है। जिन लोगों को नवीनतम बूस्टर नहीं मिला है, विशेषतौर पर जो लोग 65 वर्ष से अधिक उम्र के हैं या रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, उनके लिए कोरोना का बूस्टर शॉट जरूरी हो जाता है।
वैज्ञानिक कहते हैं, यह मानते हुए कि वायरस लगातार विकसित हो रहा है और हमारी प्रतिरक्षा कमजोर भी हो रही है, इसको देखते हुए सुरक्षा की दृष्टि से वार्षिक बूस्टर डोज की भी सिफारिश की जानी चाहिए।
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स्रोत और संदर्भ
Humoral immunogenicity comparison of XBB and JN.1 in human infections
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