माना जाता है कि तिब्बत के व्यापारी वहां से मोमोज को काठमांडु में लाए। हालांकि, मोमोज डिश की उत्पत्ति को लेकर सटीक जानकारी मिलना थोड़ा मुश्किल है। दरअसल, तिब्बत की संस्कृति और खान-पान पर चीन और मंगोल प्रभाव रहा है, ऐसे में यह कहा जाता है कि मोमोज भी चीन से ही तिब्बत आए। इस डिश को भांप में बनाया जाता है।
तिब्बज में मोमोज सबसे ज्यादा खाए जाते हैं। शिलांग में मोमोज मांस में तैयार किए जाते हैं और यहां के मोमोज काफी प्रसिद्ध भी हैं। शिलांग के अलावा अरुणाचल में भी मोमोज काफी लोकप्रिय हैं। यहां इस डिश को चाव से खाया जाता है। यहां इसमें सरसों की पत्तियां व दूसरे सब्जियों के साथ बनाया जाता है ताकि यह स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित हो सके। चीन में मोमोज को डिमसिम कहा जाता है। यहां इसे मांस में दूसरी सब्जियां मिलाकर बनाया जाता है। यानी की मोमोज के अंदर ये चीजें भरी जाती हैं। इसके अलावा इनदिनों भांप के अलावा तेल में तले हुए मोमोज खाने का चलन भी बढ़ रहा है। दिल्ली और दूसरे शहरों में फ्राई मोमोज का चलन बढ़ा है।