हृदय रोगों के जोखिम कारक
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
इस मॉडलिंग अनुसंधान के लिए ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडी 2021 के डेटा का उपयोग किया गया। इसमें साल 1990 से 2021 के बीच 20 प्रमुख बीमारियों के शिकार और इसके कारण होने वाली मौत के डेटा का अध्ययन किया गया। इसमें उम्र के आधार पर निर्धारित आयु और विकलांगता-समायोजित जीवन वर्ष (डीएएलवाई) के डेटा पर भी ध्यान दिया गया।
डेटा अध्ययन के निष्कर्ष में वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में वरिष्ठ लेखक डॉ. लुइसा सोरियो फ्लोर कहते हैं, महिलाओं में बीमारी और विकलांगता का स्तर अधिक देखा गया क्योंकि वे पुरुषों से अधिक जीवित रहती हैं।
महिला-पुरुषों में होने वाली बीमारियां
हृदय रोग दुनियाभर में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक रहे हैं, हालांकि अध्ययन में लैंगिक आधार पर इनमें भी बड़ा अंतर देखा गया है। इस्केमिक हृदय रोगों में भी पुरुषों और महिलाओं के बीच स्वास्थ्य हानि में बड़ा अंतर रिपोर्ट किया गया है। महिलाओं की तुलना में हृदय रोग से पुरुषों को अधिक स्वास्थ्य हानि हुई।महिलाओं में अल्जाइमर -डिमेंशिया, एग्जाइटी-डिप्रेशन, आर्थराइटिस और हड्डियों-मांसपेशियों से संबंधित दर्द की समस्या अधिक देखी जा रही है।
पुरुषों में बढ़ती बीमारियों और मृत्यदर के क्या कारण हैं?
अध्ययन के निष्कर्ष में शोधकर्ताओं ने बताया पुरुषों के बीमारियों के शिकार होने और मृ्त्युदर बढ़ने के लिए लाइफस्टाइल से संबंधित स्थितियों को प्रमुख माना गया है। धूम्रपान, तनाव, सेंडेंटरी लाइफस्टाइल, अल्कोहल का सेवन इन बीमारियों के प्रति उन्हें अधिक संवेदनशील बनाती हैं। वहीं मेनोपॉज के बाद महिलाओं में हृदय रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम काफी बढ़ जाता है। शरीर में होने वाले हार्मोनल परिवर्तनों को एक उम्र के बाद महिलाओं में होने वाली गंभीर बीमारियों के लिए प्रमुख जोखिम कारक पाया गया है।