जब भी पोषक युक्त भोजन की बात होती है, तो हम सिर्फ विटामिन्स, प्रोटीन, कार्बोहाइट्रेड आैर फाइबर की ही बात करते हैं। जबकि सेहतमंद शरीर के लिए मिनरल्स भी जरूरी हैं। पोटैशियम डेफिशिएंसी यानी शरीर में पोटैशियम मिनरल की कमी। इसकी कमी से न सिर्फ मसल्स आैर नर्व्स सिस्टम की कार्यप्रणाली पर प्रभाव पड़ता है, बल्कि यह आपके शरीर में इलेक्ट्राेलाइट और एसिड बेस को भी संतुलित रखने का काम करता है। ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित रखने का काम करता है। यह एक तरह का इलेक्ट्रोलाइट भी है, जो सोडियम, क्लोराइड और मैग्नीशियम के साथ मिलकर शरीर में विद्युत शक्ति का संचालन बनाए रखता है।
दिल को सही तरह से कार्य करने और पाचन क्रिया को दुरुस्त करने और हड्डियों व मांसपेशियों के संकुचन को रोकने के लिए पोटैशियम बहुत जरूरी है। इसकी कमी हो, तो शरीर में एसिड की मात्रा बढ़ जाती है, जिसके कारण शरीर सुस्त होता है। साथ ही कमजोर भी हो जाता है।
थकान लगना और शरीर का कमजोर होना पोटैशियम की कमी के प्रमुख लक्षण हैं। अगर आप चाहती हैं कि शरीर में इन सब में संतुलन बना रहे, तो आपको अपनी थाली में इस मिनरल को शामिल जरूर करना चाहिए। उच्च रक्तचाप की समस्या में लोग सोडियम के सेवन पर तो गहरी नजर रखते हैं, लेकिन बहुत कम लोग अपने आहार में पोटैशियम को बढ़ाने के बारे में सोचते हैं। जबकि पोटैशियम निम्न रक्तचाप को कम कर मदद कर सकता है।
मांसपेशियों में ऐंठन हो, थकावट, मांसपेशियों में कमजोरी का अहसास हो, अनियमित धड़कन, नाजुक हड्डियां, अनिद्रा, अवसाद, भूख न लगना, जैसे लक्षण पोटैशियम की कमी से दिखते हैं। 2006 में हुए एक अध्ययन के मुताबिक, शरीर में पोटैशियम की कमी से लोगों में तनाव पैदा हो सकता है और यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए समस्या भी बन सकती है।
पोटैशियम की कमी का असर त्वचा भी पर दिखता है। इसकी कमी से त्वचा रूखी और खुश्क हो सकती है। इसके अलावा अत्यधिक पसीना निकलना भी इसके कारण हो सकता है। अगर आप पोटैशियम की कमी से जूझ रही हैं, तो आपको दिन के पांचों मील में पोटैशियम की थोड़ी मात्रा जरूर शामिल करनी चाहिए। चाहे आप उसे फल की माध्यम से लें या फिर सब्जी के रूप में।
याद रखें, सोडियम और पोटैशियम शरीर के सबसे महत्वपूर्ण खनिज तत्व हैं। इन्हीं से शरीर की कई महत्वपूर्ण मेटाबॉलिज्म क्रियाएं संपन्न होती हैं। शरीर की हर कोशिका के अंदर और बाहर इन दोनों की सही मात्रा सेहत ही नहीं, बल्कि हर एक क्रिया के लिए जरूरी है। विशेष रूप से गर्मियों में इन दोनों के बीच में संतुलन रहना जरूरी होता है।
पोटैशियम युक्त आहार
जब पोटैशियम की बात होती है, तो खाने में केला ही शामिल करने के बारे में सोचते हैं। यह सही भी है, क्योंकि एक मध्यम साइज के केले में लगभग 450 एमजी पोटैशियम पाया जाता है। लेकिन दूसरे स्रोत की बात करें, तो मध्यम साइज के बेक्ड आलू में 750 एमजी पोटैशियम होता है। अन्य विकल्प की बात करें, तो सब्जियों और फलों में यह भरपूर मात्रा में पाया जाता है, इसके अलावा साबुत अनाज, दुग्ध उत्पाद में भी यह बहुत होता है।
मांस, मछली में भी पोटैशियम की भरपूर मात्रा होती है। केला, संतरा, अखरोट, एवाकोडो , स्ट्राॅबेरी, आलू, टमाटर, खीरा, गोभी, शिमला मिर्च, बैंगन, अजवाइन, पालक, ब्रोकोली, हल्दी आदि में भी पौटेशियम पाया जाता है। इसमें आप मशरूम, बैंगन, टमाटर, पार्सले, खीरा, स्ट्रॉबेरीज, अनार, संतरे का जूस को भी शामिल कर सकती हैं।