जिस प्रकार प्राणी कोशिका में ऑक्सीजन से ऊर्जा बनाने वाला बैक्टीरिया घुसा, उसी प्रकार वनस्पति कोशिका में ऑक्सीजन बनाने वाला बैक्टीरिया घुसा। क्लोरोप्लास्ट वनस्पति कोशिका के लिए सूरज की रोशनी से फोटोसिंथेसिस कर भोजन बनाता है और इस प्रक्रिया में प्राणियों की प्राणवायु, ऑक्सीजन, उत्सर्ग करता है। क्लोरोप्लास्ट अगर ऑक्सीजन न बनाए, तो प्राणियों का जीवन ही संभव नहीं होगा। इस प्रकार क्लोरोप्लास्ट और माइटोकोंड्रिया के आधार से ही संसार चल रहा है। सारे प्राणी क्लोरोप्लास्ट वेंटीलेटर से ही जीवित हैं।
पिता की पहचान के लिए व्यक्ति के न्यूक्लियर डी.एन.ए. और माता की पहचान के लिए माइटोकोंड्रियल डी.एन.ए का विश्लेषण किया जाता है। संसति में माता के ही माइटोकोंड्रिया पहुंचते हैं, पिता के नहीं। संतति में पिता का डी.एन.ए. शुक्राणु से आता है और शुक्राणु में न्यूक्लियर डी.एन.ए. उसके शीश में ही केंद्रित होता है और फार्टिलाइजेशन पर केवल शीश ही ओवम में प्रवेश पाता है, माइटोकोंड्रिया तो बाहर ही रह जाते हैं।