कोई भी व्यक्ति आत्महत्या जैसा कदम क्यों उठा लेता है?
कोई भी अचानक आत्महत्या जैसा बड़ा कदम नहीं उठाता है। कुछ लोगों के लिए बहुत सोची समझी योजना होती है। मानसिक बीमार होने के कारण उन्हें लगता है कि आत्महत्या ही आखिरी समाधान है। ब्रेकअप होना, किसी अपने की मृत्यु होने पर भी व्यक्ति ऐसी स्थिति में पहुंच जाता है। करियर में सफल होने के बावजूद अन्य कारण भी हो सकते हैं।
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किसी को लगता है कि उसके होने, न होने से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है। कई बार व्यक्ति जब लंबे समय से तनाव से गुजर रहा होता है, तो वह कई बार खुदकुशी जैसे गलत कदम उठाने की सोचता है। जब हर ओर उसे नाउम्मीदी दिखती है तो वह ऐसा कदम उठा लेता है। लेकिन उसका कोई अपना, दोस्त, सहकर्मी वगैरह उसपर ध्यान दे तो उसे ऐसा करने से रोका जा सकता है।
कई लोग बड़ी समस्याओं से नहीं घबराते और कुछ लोग छोटी सी दिक्कत में भी अवसादग्रस्त हो जाते हैं? दोनों के मेंटल हेल्थ में क्या अंतर होता है?
- सबके मानसिक स्वास्थ्य का स्तर अलग होता है। कई लोग होते हैं जो परीक्षा के पहले, रिजल्ट के पहले, शादी से पहले घबराए रहते हैं या तनावग्रस्त हो जाते हैं। कई लोग बड़ी समस्याओं से नहीं घबराते। मायने यह भी रखता है कि आपने जीवन में कितना संघर्ष देखा है।
- ओवरथिंकिंग भी बड़ा कारण है। जरूरत से ज्यादा सोचना हमें अवसाद में धकेल सकता है। कई चीजें हमारे हाथ में नहीं होती, उसे समय पर छोड़ देना बेहतर है। हमने अपने हिस्से की मेहनत की, कोशिश की, बस इसे पूरा करें और संतुष्टि बहुत जरूरी है।
अवसाद से बाहर निकलने के क्या उपाय हैं?
किसी व्यक्ति को अवसाद की स्थिति से बाहर निकालने में उसके आसपास रह रहे लोगों, उसके रिश्तेदार, दोस्त, सहकर्मी आदि की भूमिका अहम होती है। इसके जो शुरुआती लक्षण बताए, उनमें से अगर कुछ भी दिख रहा हो तो आप उस व्यक्ति के पास जाएं। उससे बातें करें और उसका मन हल्का करने की कोशिश करें। उसे यह बताएं कि यह एक मानसिक स्थिति है और उसे काउंसिलिंग के लिए राजी करें। साइकोलॉजिस्ट या मनोचिकित्सक के पास लेकर जाएं।
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डिप्रेशन की स्थिति हावी होने पर पीड़ित व्यक्ति की काउंसिलिंग बहुत जरूरी है। उन्हें खासकर समय रहते मदद की जरूरत होती है। मन में गलत ख्याल आए तो मनोचिकित्सक से खुल कर बातें करनी चाहिए। डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति के अभिवावक या किसी अपने को चाहिए कि वे मनोचिकित्सक से पीड़ित के व्यवहार में आए बदलावों के विषय में खुल कर बात करें। मनोचिकित्सक जरूरत के अनुसार, दवाओं और थेरेपी के जरिए पीड़ित का इलाज करते हैं। अगर सही समय पर मदद मिल जाए, तो इस मुश्किल से छुटकारा संभव है।