क्या लाइफस्टाइल सही न हो तो भी हो सकती है डायबिटीज की समस्या?
उजाला सिग्नस हॉस्पिटल वाराणसी के डॉ नीरज बताते हैं, टाइप 1 डायबिटीज में अग्नाशय में बीटा कोशिकाएं खत्म हो जाती है, इसके कई कारण हो सकते हैं। वहीं टाइप 2 डायबिटीज के कारकों में लाइफस्टाइल को मुख्य माना जाता है। सोने-जागने के समय में अनियमितता, फास्ट फूड, सोडा, अल्कोहल आदि का सेवन और लगातार बैठे रहने की आदत इस प्रकार के डायबिटीज को जन्म दे सकती है।
किन शारीरिक समस्याओं के कारण डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है?
डॉ आबिद बताते हैं, डायबिटीज के कारणों में सबसे पहले मेटाबॉलिक सिंड्रोम को मुख्य माना जाता है। इसमें मोटापा, उच्च रक्तचाप, फास्टिंग ब्लड शुगर का 90-110 के बीच रहना जोखिम कारक हो सकता है। इसके अलावा यदि माता-पिता को डायबिटीज है तो बच्चों में इसका खतरा अधिक होता है। ऐसे लोगों को विशेष सावधानी रहने की आवश्यकता है।
क्या डायबिटीज जीवनभर रहने वाली बीमारी है?
डॉ आबिद बताते हैं, जिन लोगों को टाइप-1 डायबिटीज की समस्या होती है, उनमें इसे ठीक नहीं किया जा सकता है, इसका मुख्य कारण ऐसे लोगों के अग्नाशय में इंसुलिन बनाने की जगह ही प्रभावित हो जाती है। ऐसे लोगों को इंसुलिन देकर इसको नियंत्रित किया जाता है। वहीं जिनको टाइप-2 डायबिटीज होती है, उनमें दवाइयों और इंसुलिन को साथ इसे नियंत्रित किया जाता है। मसलन दोनों ही प्रकार के डायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकता है, जड़ से खत्म नहीं।
------
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।