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Coronavirus test: अब सिर्फ 90 मिनट में पता चल जाएगा आपको कोरोना है या नहीं, यहां होगा नए तरह का टेस्ट

Tue, 04 Aug 2020 12:03 AM IST
सोनू शर्मा बीबीसी हिंदी
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

ब्रिटेन में कोरोना टेस्ट के नतीजे अब सिर्फ 90 मिनट में आ सकेंगे। अगले सप्ताह से ब्रिटेन में कोरोना वायरस और फ्लू के लिए एक नए तरह का टेस्ट किया जाएगा। सबसे पहले केयर होम और लैब में इसका इस्तेमाल होगा। सरकार के अनुसार, स्पॉट पर ही स्वैब और डीएनए टेस्ट किया जाएगा, जिससे कोविड-19 और दूसरे मौसमी बीमारियों में फर्क करने में मदद होगी। ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इससे आने वाले जाडे़ के मौसम में काफी फायदा होगा। 

फिलहाल जो कोरोना टेस्ट किया जाता है, उनमें करीब 75 फीसदी टेस्ट के नतीजे 24 घंटे में आते हैं जबकि बाकी 25 फीसदी टेस्ट के नतीजे आने में दो दिन लग जाते हैं। सरकार ने केयर होम के स्टाफ और वहां रहने वाले लोगों के रेगुलर कोरोना टेस्ट जुलाई से शुरू करने की योजना बनाई थी, लेकिन टेस्ट किट की कमी के कारण ऐसा नहीं हो सका। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI

इस नए रैपिड स्वैब टेस्ट को लैमपोर कहा जाता है और अगले हफ्ते से केयर होम और लैब में करीब पांच लाख टेस्ट किए जा सकेंगे और साल के आखिर तक ऐसे लाखों और टेस्ट किए जाएंगे। इसके अलावा सितंबर से ब्रिटेन के सभी एनएचएस अस्पतालों में हजारों डीएनए टेस्ट मशीन लगाई जाएंगी, जिनसे नाक का स्वैब सैंपल लिया जा सकेगा। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पांच हजार मशीनों से 58 लाख टेस्ट किए जा सकेंगे। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI

टेस्ट कितना सटीक? 

ये नया टेस्ट कितना सटीक और प्रमाणिक है इस बारे में अभी तक कोई सार्वजनिक डेटा मौजूद नहीं है, लेकिन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में मेडिसिन के प्रोफेसर सर जॉन बेल, जो कि कोरोना टेस्ट के मामले में सरकार के सलाहकार हैं, का कहना है कि अभी जो लैब आधारित टेस्ट किए जा रहे हैं, लैमपोर टेस्ट भी उतना ही संवेदनशील है। 

स्वास्थ्य मंत्री मैट हैनकॉक ने इस नए कोरोना टेस्ट को जान बचाने वाला करार दिया है। उनका कहना था, 'लाखों ऑन द स्पॉट टेस्ट के नतीजे हमें 90 मिनट के अंदर मिल जाएंगे, जिससे हमें कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने में मदद मिलेगी।' 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

व्यापार मंत्री नदीम जहावी ने कहा कि स्कूल समेत दूसरी जगहों पर भी ये टेस्ट किए जाएंगे, क्योंकि इसमें मेडिकल विशेषज्ञ की जरूरत नहीं पड़ती है। यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन में संक्रमण रोग के विशेषज्ञ प्रोफेसर डेम एन जॉनसनक कहती हैं कि रैपिड टेस्ट बहुत उपयोगी है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है कि लोग अगर बीमार पड़ें तो सेल्फ आइसोलेशन में रहें।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI

फिलहाल कोरोना वायरस का टेस्ट आमलोगों के लिए सड़कों पर वॉक-इन किया जाता है और अस्पतालों में मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों का टेस्ट होता है। होम टेस्टिंग किट भी आते हैं जिन्हें घर भेजा जाता है कि ताकि लोग खुद अपना टेस्ट कर सकें। स्वैब सैंपल की जांच लैब में होती है और लोगों को उसका रिजल्ट बताया जाता है। अगर टेस्ट में कोरोना पॉजिटिव आता है तो फिर मरीज को 10 दिनों के लिए सेल्फ आइसोलेशन में रहना होता है।  

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक प्रवक्ता का कहना है, कई सारे फैक्टर हैं जिसके कारण केयर होम में जो टेस्टिगं किट इस्तेमाल किए जाते हैं। उनमें से कुछ किट के जरिए वैसे लोगों का दोबारा टेस्ट किया जा रहा है जिन्हें कोई लक्षण नहीं था। हमलोग टेस्ट करने की क्षमता बढ़ाने के लिए रात-दिन काम कर रहे हैं। पिछले महीने केयर होम में इस्तेमाल होने वाले एक टेस्टिंग किट को वापस ले लिया था, क्योंकि वो सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरे थे। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इस बीच शोधकर्ता कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके मरीजों से प्लाज्मा दान करने की अपील कर रहे हैं। डॉक्टर ये जानने के लिए एक बड़ा अभियान चला रहे हैं कि प्लाज्मा से कोरोना से जूझ रहे दूसरे मरीजों की इम्यूनिटी कैसे बेहतर बनाई जा सकती है। रविवार को आठ और लोगों की मौत हो गई और इस तरह ब्रिटेन में अब तक 46,201 लोगों की मौत हो चुकी है। ताजा सरकारी आंकड़े बताते हैं कि पिछले 24 घंटे में 744 नए मामले सामने आए हैं।
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