फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Coronavirus: अब ब्लड टेस्ट बताएगा कोरोना मरीज को कितना है मौत का खतरा, वैज्ञानिकों ने किया दावा

Sun, 09 Aug 2020 11:35 AM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media
कोरोना वायरस का खतरा लगातार गंभीर होता जा रहा है। अब तक इसकी वैक्सीन बाजार में तो नहीं आ पाई है, लेकिन रूस ने दावा किया है कि वो इसी महीने वैक्सीन के लिए पंजीकरण करेगा और अक्तूबर से टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। हालांकि तब तक कोरोना मरीजों का इलाज दवाइयों के जरिए ही किया जा रहा है। जब से कोरोना वायरस का खतरा दुनियाभर में छाया हुआ है, तब से ही इसको लेकर तरह-तरह के शोध सामने आते रहे हैं। अब एक ताजा शोध में यह सामने आया है कि ब्लड टेस्ट के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित मरीज को मौत का खतरा कितना है। आइए जानते हैं इस शोध के बारे में... 
विज्ञापन

2 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • दरअसल, अमेरिका के जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पांच ऐसे बायोमार्कर अणुओं की तलाश की है, जिनका संबंध कोरोना के मरीजों की मौत और क्लीनिकल कंडीशन (नैदानिक स्थिति) को खराब करने से है। ये बायोमार्कर मरीजों के खून में होते हैं, जो मेडिकल इंडिकेटर्स (चिकित्सा संकेतक) का काम करते हैं।  
विज्ञापन

3 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
  • यह शोध जर्नल फ्यूचर मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने कोरोना संक्रमित 299 मरीजों पर यह अध्ययन किया है, जो 12 मार्च से 9 मई के बीच संक्रमित होने के बाद जॉर्ज वाशिंगटन अस्पताल में भर्ती हुए थे। कुल 299 मरीजों में से 200 में पांचों बायोमार्कर अणु पाए गए हैं। ये पांचों बायोमार्कर अणु हैं- सीआरपी, आइएल-6, फेरेटिन, एलडीएच और डी-डिमर। 

4 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
बायोमार्कर अणुओं का शरीर में क्या होता है असर 
  • शोधकर्ताओं के मुताबिक, बायोमार्कर अणुओं की वजह से कोरोना संक्रमित मरीजों के शरीर में जलन, सूजन और रक्तस्राव बढ़ जाता है। इस कारण उन्हें वेंटिलेटर पर रखने की नौबत आ जाती है। ऐसी हालत में कभी-कभी मरीज की मौत भी हो जाती है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
क्यों किया गया यह शोध? 
  • जार्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर और सह-शोधकर्ता जॉन रीस के मुताबिक, चीन में हुए कुछ शुरुआती शोधों में यह पता चला था कि कोरोना संक्रमित मरीजों की खराब स्थिति से बायोमार्कर अणुओं का सीधा-सीधा संबंध है। इस वजह से यह पता करने के लिए अमेरिका में भी शोध किया गया कि क्या यहां भी इसका कारण बायोमार्कर अणु ही हैं। उन्होंने बताया कि चूंकि जब कोरोना मरीज का इलाज किया जाता है तो यह पता नहीं चल पाता था कि किसी की हालत खराब क्यों हो रही है और किसी की हालत में सुधार कैसे हो रहा है।   
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें