डॉ अमन किशोर
मानसिक आरोग्यशाला, ग्वालियर
डॉ बिलाल
चेस्ट मेडिसिन विशेषज्ञ
उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
कोरोना वायरस की दूसरी लहर में हर तरफ नकारात्मकता का माहौल बना हुआ है। रोजाना संक्रमण के मामलों में फिलहाल थोड़ी कमी जरूर आई है, लेकिन हालात अभी बहुत ज्यादा सुधरे नहीं हैं। कोविड-19 के कारण हर तरफ बीमारी और लॉकडाउन की स्थिति ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को काफी प्रभावित किया है। विशेषज्ञ कहते हैं कि कोरोना की दूसरी लहर न सिर्फ इसलिए गंभीर रही है क्योंकि इस बार लोग तेजी से संक्रमित हुए, बल्कि ऐसी विकट समस्या तब वापस लौटी जब ऐसा लगने लगा था कि अब सबकुछ ठीक हो रहा है। इस तरह की परिस्थितियों ने लोगों को कई तरह से प्रभावित किया है जिसका असर स्पष्टतौर पर लोगों में तनाव, अवसाद और चिड़चिड़ेपन के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे समय में लोगों को अपने शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
अमर उजाला फाउंडेशन की पहल के माध्यम से कोरोना महामारी को लेकर गुरुवार को हुई चर्चा में हमने विशेषज्ञों से इसी बारे में जानने की कोशिश की। इस दौरान मानसिक आरोग्यशाला, ग्वालियर के डॉ अमन किशोर और उजाला सिग्नस हॉस्पिटल में चेस्ट मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ बिलाल ने सभी सवालों के जवाब दिए।
कोरोना का मानसिक स्वास्थ्य पर असर
उजाला सिग्नस हॉस्पिटल के डॉ बिलाल बताते हैं कि कोरोना के चलते देश को दो बार लॉकडाउन की स्थिति में जाना पड़ा। इससे संक्रमण को रोकने में जरूर सफलता मिली लेकिन मानसिक और आर्थिक रूप से लोगों को इसने बुरी तरह से प्रभावित किया। घरों में लंबे समय तक बंद रहना, अपने प्रियजनों से न मिल पाने का असर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर स्पष्ट देखा जा रहा है। कई लोगों में ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) की भी समस्या देखने को मिल रही है, जिसमें लोगों को हमेशा लगता है कि कहीं उनके हाथ गंदे तो नहीं हैं, जिससे संक्रमण हो सकता है?