चीन के साथ-साथ चिली, ब्राजील, इंडोनेशिया, मेक्सिको, थाईलैंड और तुर्की समेत कई देशों में पहले से ही यह वैक्सीन दी जा रही है। वैक्सीन बनाने वाली कंपनी सिनोवैक का कहना है कि उसने मई महीने के अंत तक देश और विदेश में करीब 60 करोड़ से अधिक खुराक की आपूर्ति की है।
सिनोवैक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे एक स्टैंडर्ड रेफ्रिजरेटर में दो-आठ डिग्री सेल्सियस पर स्टोर किया जा सकता है। इसका सीधा मतलब यह है कि यह वैक्सीन विकासशील देशों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है, जो दूसरी बहुत सी वैक्सीन के लिए मानक तापमान (बेहद कम) पर वैक्सीन स्टोर कर पाने में अक्षम हैं।
यह मंजूरी ऐसे समय में मिली है जब डब्ल्यूएचओ, विश्व व्यापार संगठन, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक के प्रमुखों ने महामारी को समाप्त करने के लिए मदद के तौर पर 50 अरब डॉलर निवेश की अपील की है। एक संयुक्त बयान में इन सभी अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने कहा है कि दुनिया एक खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है और टीकों की पहुंच में असमानता ने महामारी को और बढ़ाया है और इसकी कमी के कारण कइयों ने अपनी जान गंवाई है।
इन संस्थाओं ने वैक्सीन उत्पादन, ऑक्सीजन आपूर्ति और कोविड के उपचार के लिए वित्तीय निवेश का आह्वान किया है। उन्होंने इस बात का आश्वासन भी दिया है कि यह मदद समान रूप से वितरित की जाएगी। उन्होंने अमीर देशों से विकासशील और गरीब देशों को तुरंत टीकों के खुराक का दान देने भी आह्वान किया है।