जब कोई व्यक्ति आपके सामने मुंह से तरह तरह की आवाजें निकालते हुए खाना खा रहा हो तो निश्चित ही आपको चिढ़ होगी। हो सकता है आप उसको टोक भी दें या वहां से उठकर चल दें। खाने से जुड़े मैनर्स या एटिकेट्स के अनुसार भी इस तरह खाने को बुरा ही माना जाता है। लेकिन एएसएमआर यानी ऑटोनोमस सेंसरी मेरिडियन रिस्पॉन्स का चलन इसके बिल्कुल उलट है। इस तकनीक में खाने पीने की आवाजों को मन के सुकून के लिए अच्छा माना जाता है।
केवल खाने पीने की आवाजें ही नहीं, इस तकनीक में चीजों को तोड़ने-फोड़ने, फुसफुसाने, सिर में ब्रश घुमाने आदि जैसी आवाजें भी शामिल हैं। अब चाहे आपको पसंद आए या न आए, दुनियाभर में बड़ी संख्या में इस तकनीक को लोगों का समर्थन मिल रहा है। सोशल मीडिया पर आवाजें सुनाकर खाने का आनंद लेने वाली यह तकनीक धूम मचा रही है। आपको कई सारे वीडियोज मिल जाएंगे, जहां लोग खाने पीने के तमाम सामान को खाते हुए और उन आवाजों को स्पेशली आपको सुनाते हुए दिख जाएंगे।
क्या है एएसएमआर?
एएसएमआर यानी ऑटोनोमस सेंसरी मेरिडियन रिस्पॉन्स। साधारण भाषा में समझें तो दिमाग को शांति या सुकून पहुंचाने वाली आवाजें। इन आवाजों को ट्रिगर के रूप में पहचाना जाता है और हर व्यक्ति के लिए यह ट्रिगर अलग हो सकता है। जैसे किसी को पापड़ चबाने की आवाज सुकूनदायक लग सकती है तो किसी को एक खिलौने पर से गाड़ी के पहिये के निकलने की आवाज। वहीं किसी के लिए फुसफुसाहट की आवाज नींद लाने में मददगार हो सकती है तो किसी के लिए मेटल पर खुरचने की आवाज।
सुनकर अजीब लगता है, लेकिन दुनियाभर में कई लोगों को लगता है कि ये आवाजें उनको दिमागी स्तर पर शांत रहने, अच्छी नींद लाने आदि में मेडिटेशन का काम करती हैं। इन आवाजों में पन्ने पलटना, लिखना, टाइप करना, हमिंग, वाइब्रेशन या बजिंग, नाखूनों से किसी चीज पर टैप करना, पानी की बूंदों के गिरने की आवाज, माइक्रोफोन के पास शहद आदि मे ऊंगली डुबोने की आवाज, किसी तरह की मोटर की आवाज, घड़ी के कांटों की आवाज या बिल्ली की घुरघुराहट आदि भी शामिल हैं। एएसएमआर के अंतर्गत फिजिकल, सिचुएशनल और विजुअल ट्रिगर्स भी आते हैं, जिनमें मेकअप ब्रश से मेकअप लगाना, बालों में कंघी या हाथ फिराना, मसाज करवाना आदि शामिल हैं। लेकिन जिस चीज का क्रेज और ट्रेंड दोनो ज्यादा हैं वह हैं आवाजें।
एएसएमआर की इस तकनीक से पैदा होने वाला झुनझुनी, सिहरन या सुख का अहसास, ज्यादातर लोगों में सिर के ऊपरी हिस्से से शुरू होता है। वहीं कुछ लोगों में यह पैरों या रीढ़ की हड्डी से भी शुरू हो सकता है। यह अहसास वैसा ही अहसास होता है जैसे कोई आपको हल्के हाथों से हेड मसाज दे रहा हो।