प्रभजोत कौर
प्रभजोत कौर राजस्थान से हैं। ये अरविंद कालेज में अंग्रेजी साहित्य की शिक्षिका हैं। इनकी रचनाओं में महिला विषयों की प्रधानता होती है। इनकी कविताओं की कुछ पंक्तियाँ हैं-
बेबसी' मेरे बिस्तर पर पड़ा एक अक्षर है
मेरे घर के सामने एक कवि का घर है
उसके घर मे कमरे चार
एक बांसुरी, दो शंख, एक वीणा
और दो सितार
नौ सौ चालीस किताबें
लाखों कवितायेँ
और अनगिनत एहसास
मेरे घर मे बस एक बिस्तर
और एक औरत मेरे पास
( या मैं एक औरत के पास)
ये बेपरवाह सुर जो अपना ठिकाना ढूँढ रहे हैं
ये सब एहसास जो उसके आधे खुले दरवाज़े पर खड़े हैं
मै जब चीनी लेने जाऊंगा
इन सबको अपने घर ले आऊंगा
मेरे घर की चीनी रोज़ ख़त्म हो जाती है
ये औरत मुझसे रोज़ चोरी करवाती है
जो तूने अपने मन की मिट्टी कुरेद कर दी थी
अब मैं उस मिट्टी से अपना घर बनाती हूं
जहाँ तू खुदको ढूंढ़ने जाया करता था
उस दरगाह पर मै तुझे ढूंढने रोज़ जाती हूं
इन तावीज़, तड़प, तसव्वुर, की गलियों में, मैं खुद से ही मिल जाती हूं
फिर खुद से मिलकर कहती हूं की वो होता तो क्या होता ?
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