वीकेंड की छुट्टियों और आराम जैसी चीजों का करना पड़ता है त्याग
हॉफमैन का मानना है कि स्टार्टअप की दुनिया में सामान्य वर्क लाइफ बैलेंस संभव नहीं है। उन्होंने 2024 में एक पॉडकास्ट में कहा था कि यदि कोई व्यक्ति एक सफल कंपनी बनाना चाहता है, तो उसे वीकेंड की छुट्टियों और आराम जैसी चीजों का त्याग करना होगा।
लिंक्डइन के शुरुआती दिनों में कर्मचारियों से लंबे समय तक काम करने की उम्मीद की जाती थी, भले ही उनके परिवार और बच्चे हों। हॉफमैन ने कहा कि लिंक्डइन की शुरुआत में, जिन कर्मचारियों के परिवार थे, उन्हें डिनर के लिए घर जाने की अनुमति थी। लेकिन डिनर के बाद, उनसे उम्मीद की जाती थी कि वे लैपटॉप खोलकर फिर से काम में जुट जाएं।
लोग स्टार्टअप कल्चर को ठीक से समझते नहीं: हॉफमैन
जब हॉफमैन से पूछा गया कि आज के समय में काम और जीवन के बीच संतुलन न देना कठोर माना जा सकता है, तो इसपर उन्होंने कि जो लोग ऐसा सोचते हैं, वे स्टार्टअप कल्चर को ठीक से नहीं समझते। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप चलाना आसान नहीं है, इसके लिए पूरा समर्पण चाहिए। अगर कोई कड़ी मेहनत करने को तैयार नहीं है, तो उसे लंबे समय तक अपनी नौकरी बनाए रखने में संघर्ष करना पड़ सकता है।
इन दो स्थितियों में ही काम और जीवन के बीच संतुलन संभव
हॉफमैन के अनुसार, स्टार्टअप में वर्क लाइफ बैलेंस बनाए रखना सिर्फ दो स्थितियों में ही संभव है। पहला, अगर स्टार्टअप बहुत छोटा है और उसका कोई प्रतिस्पर्धी नहीं है। दूसरा, अगर कंपनी इतनी मजबूत हो कि कोई उसे चुनौती न दे सके। लेकिन अधिकांश स्टार्टअप्स में कड़ी प्रतिस्पर्धा होती है, इसलिए मेहनत अनिवार्य है।
पेपाल का दिया उदाहरण
हॉफमैन ने पेपाल का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां कर्मचारियों को ऑफिस में ही डिनर दिया जाता था, ताकि वे घर न जाकर काम जारी रख सकें। बाद में प्रतिस्पर्धा के चलते अन्य कंपनियों ने भी ऐसा करना शुरू कर दिया।
रीड हॉफमैन का कहना है कि स्टार्टअप की दुनिया में सफलता पाने के लिए मेहनत से समझौता नहीं किया जा सकता। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि परिवार के साथ समय बिताना जरूरी है, लेकिन काम के प्रति समर्पण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।