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Job Market Report: 86 फीसदी स्टाफ अगले छह माह में नौकरी छोड़ने के मूड में, सर्वे रिपोर्ट में बड़ा दावा

Tue, 07 Jun 2022 10:11 AM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रिपोर्ट के अनुसार कर्मचारियों के इस्तीफों का दौर 2022 में भी बेरोकटोक जारी रहने वाला है। बेहतर जीवन व नौकरी के बीच संतुलन की खातिर भारत के 61 फीसदी कर्मचारी कम वेतन पाने और वेतन वृद्धि या पदोन्नति छोड़ने को तैयार हैं।
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जॉब - फोटो : Source
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विस्तार
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भारत के जॉब मार्केट को लेकर बड़ा दावा किया गया है। एम्प्लॉयमेंट एंड रिक्रूटमेंट एजेंसी माइकल पेज की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश की कंपनियों का 86 फीसदी स्टाफ अगले छह माह में नौकरी छोड़ने की योजना बना रहा है। 

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रिपोर्ट के अनुसार कर्मचारियों के इस्तीफों का दौर 2022 में भी बेरोकटोक जारी रहने वाला है। माइकल पेज की रिपोर्ट में कहा गया है कि बेहतर जीवन व नौकरी के बीच संतुलन की खातिर भारत के 61 फीसदी कर्मचारी कम वेतन पाने और वेतन वृद्धि या पदोन्नति छोड़ने को तैयार हैं। यह सिलसिला बीते दो सालों में कोरोना महामारी के बाद से जारी है और यह 2022 में और तेज हो सकता है। 

रिपोर्ट के अनुसार सभी बाजारों, उद्योगों, वरिष्ठों और विभिन्न आयु समूहों के कर्मचारियों के बीच 2022 में भी यह सिलसिला जारी रहेगा। इसमें कमी के कोई संकेत नहीं हैं। कुल मिलाकर आगामी कुछ माहों में बड़े पैमाने पर प्रतिभा पलायन (talent migration) की संभावना है। 

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11 फीसदी इस्तीफे काम की व्यवस्था व कोविड नीतियों को लेकर 
कंपनियों के काम की व्यवस्था (हाइब्रिड या वर्क फ्रॉम होम, आदि) और कोविड से संबंधित कंपनी की नीतियों को लेकर कर्मचारियों में नाखुशी की खूब चर्चा है।  लेकिन, रिपोर्ट में कहा गया है कि सिर्फ 11 फीसदी कर्मचारी ही ऐसे हैं, जिन्होंने इन कारणों से इस्तीफा दिया है या देने की योजना बना रहे हैं। 

इस्तीफों के ये हैं प्रमुख कारण
माइकल पेज के अनुसार कर्मचारियों के इस्तीफों के मुख्य कारणों में कैरियर में प्रगति, उच्च वेतन, कामकाज की भूमिका में बदलाव और नौकरी से संतुष्टि शामिल हैं। इस्तीफों में आया उछाल कर्मचारियों द्वारा सही मूल्यों और कार्य संस्कृति वाली कंपनी में नौकरी की तलाश भी एक वजह है। 

रिपोर्ट के अनुसार वेतन, बोनस और प्रोत्साहन पुरस्कार कर्मचारियों (EMPLOYER) के लिए सबसे ज्यादा प्रेरक होते हैं। लेकिन, नियोक्ता (EMPLOYEE) कर्मचारियों की तुलना में इस पर 29 फीसदी ज्यादा जोर दे रहे हैं। वहीं, नियोक्ता कंपनी के ब्रांड को कर्मचारियों की मान्यता से 110 तक फीसदी ज्यादा महत्वपूर्ण मान रहे हैं। यानी कंपनी का ब्रांड कर्मचारियों के लिए उतना महत्व नहीं रखता, जितना कि नियोक्ता मानते हैं। रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल जो लोग बेरोजगार हैं, उनमें से 43 फीसदी छह माह से ज्यादा समय से बेरोजगार हैं। 
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