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झारखंड के गिरिडीह में मिला तांबे का विशाल भंडार: सर्वे रिपोर्ट सरकार को सौंपी, खनन की आगे की तैयारी

Wed, 30 Sep 2026 02:00 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

गिरिडीह के डुमरी प्रखंड के बरगंडा क्षेत्र में तांबा अयस्क के भंडार को लेकर भूगर्भीय सर्वेक्षण पूरा हो गया है और एमईसीएल ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। बरगंडा कॉपर ब्लॉक की जी-2 स्तर की एक्सप्लोरेशन रिपोर्ट भी एमईसीएल के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज है। अब राज्य सरकार सर्वे रिपोर्ट का अध्ययन कर आगे की कार्ययोजना तैयार करेगी।
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सांकेतिक फोटो - फोटो : Social Media
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विस्तार
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गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड अंतर्गत बरगंडा क्षेत्र में भूगर्भीय सर्वेक्षण के दौरान उच्च गुणवत्ता वाले तांबा अयस्क के विशाल भंडार की पुष्टि हुई है। राज्य सरकार के भूतत्व विभाग और भारत सरकार के उपक्रम एमईसीएल ने सर्वेक्षण पूरा करके अपनी विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। भूवैज्ञानिकों ने बरगंडा के आसपास लगभग एक वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में इस खजाने की खोज की है। एमईसीएल के रिकॉर्ड में भी गिरिडीह के बरगंडा ब्लॉक के लिए कॉपर की जी-2 स्तर की जनरल एक्सप्लोरेशन रिपोर्ट दर्ज है।
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सर्वेक्षण और खोज की प्रक्रिया
वर्ष 2018 में भूवैज्ञानिकों को गिरिडीह के बरगंडा समेत चार गांवों की जमीन के नीचे तांबा अयस्क होने की जानकारी मिली थी। हजारीबाग स्थित प्रयोगशाला ने प्रारंभिक जांच में सतह के नमूनों से तांबा, जस्ता और सीसा के अंश खोज निकाले। परियोजना प्रमुख तथा छोटानागपुर के उप निदेशक कुणाल कौशल के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने तीन स्थानों पर गहरी ड्रिलिंग की। उच्च कोटि का तांबा अयस्क मिलने पर राज्य सरकार ने भारत सरकार के उपक्रम एमईसीएल को अंतिम सर्वेक्षण का जिम्मा सौंपा। हाल ही में एमईसीएल ने अपनी विस्तृत सर्वे रिपोर्ट राज्य सरकार को दे दी है। एमईसीएल की आधिकारिक रिपोर्ट सूची में बरगंडा कॉपर ब्लॉक की G2 स्तर की रिपोर्ट भी उपलब्ध है।

मुसाबनी खनन का ऐतिहासिक संदर्भ
ब्रिटिश सरकार ने वर्ष 1923 में पूर्वी सिंहभूम के मुसाबनी में तांबे की खदान खोजी थी। स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने अपने सार्वजनिक उपक्रम हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड को मुसाबनी में खनन तथा मऊभंडार में उसके प्रसंस्करण की जिम्मेदारी सौंपी। अंग्रेजों ने औपनिवेशिक काल में गिरिडीह के बरगंडा में भी तांबा मिलने के शुरुआती संकेतों के बाद काम शुरू किया था, लेकिन वे इसे पूरा नहीं कर सके। देश में मध्य प्रदेश के बालाघाट और राजस्थान के खेतरी के बाद अब गिरिडीह में तांबे का भंडार मिलना राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि है।
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तांबे की कीमत में 75 प्रतिशत का उछाल
वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डेटा सेंटर और इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण के कारण तांबे की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ी है। विशेषज्ञ संस्थाओं के अनुसार, एक उन्नत एआई डेटा सेंटर बनाने में लगभग 50,000 टन तांबे की खपत होती है। भारी मांग के कारण पिछले तीन वर्षों में तांबे की कीमत में 75 प्रतिशत का उछाल आया है। अक्तूबर 2023 में एक लाख रुपये में मिलने वाला तांबा अब पौने दो लाख रुपये में मिल रहा है। भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में तांबे की कीमत करीब 1,400 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। हालिया बाजार आंकड़ों में भी एमसीएक्स पर तांबे का भाव करीब 1,400 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास दर्ज हुआ है। झारखंड सरकार के भूतत्व निदेशक कुमार अमिताभ के अनुसार, विभाग सर्वे रिपोर्ट का अध्ययन करके आगे की कार्ययोजना तैयार करेगा।
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