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Jharkhand: ममता का किला ढहा, अब झारखंड की बारी? बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत से गठबंधन में बढ़ी हलचल

Tue, 05 May 2026 10:28 AM IST
राँची ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

Jharkhand: पश्चिम बंगाल में बीजेपी की बड़ी जीत ने न सिर्फ राष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचाई है, बल्कि इसका असर पड़ोसी राज्य झारखंड की राजनीति पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है। झारखंड में कांग्रेस के भीतर बढ़ती अंदरूनी कलह और झामुमो-कांग्रेस गठबंधन में आई खटास ने राजनीतिक समीकरणों को और जटिल बना दिया है। ऐसे में आने वाले समय में राज्य की सियासत में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।
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राहुल गांधी और हेमंत सोरेन - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों की मतगणना में तीन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी को मिली बंपर जीत से पार्टी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। खासकर पश्चिम बंगाल में पहली बार बीजेपी के सत्ता में आने को एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। बीजेपी ने ममता बनर्जी के मजबूत गढ़ को भेदते हुए राज्य में सरकार बनाने में सफलता हासिल की। माना जा रहा है कि पार्टी ने हिंदू वोट बैंक को एकजुट कर अपने पक्ष में माहौल बनाया, जिससे यह जीत संभव हो सकी।

झारखंड की राजनीति पर पड़ सकता है असर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बंगाल में इस बदलाव का असर पड़ोसी राज्य झारखंड की राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है। अक्सर यह कहा जाता है कि बंगाल की सियासी हलचल का असर झारखंड तक पहुंचता है, ऐसे में यहां भी राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना जताई जा रही है।

कांग्रेस में अंदरूनी कलह आई सामने
इधर, कांग्रेस (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस) के भीतर अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता और वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने प्रदेश संगठन के कामकाज पर सवाल उठाते हुए झारखंड प्रभारी को पत्र लिखा है। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने भी संगठन के प्रति असंतोष जाहिर किया है।

झामुमो-कांग्रेस रिश्तों में बढ़ी खटास
वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के बीच रिश्तों में भी खटास की चर्चा तेज हो गई है। बंगाल और असम में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के बाद झामुमो का भरोसा कुछ कमजोर पड़ता दिख रहा है। इसके पीछे असम और बिहार चुनावों में सीट बंटवारे को लेकर असंतोष भी एक कारण माना जा रहा है।

गठबंधन में दिखी असहजता
दिलचस्प बात यह रही कि बंगाल चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जहां ममता बनर्जी के समर्थन में प्रचार कर रहे थे, वहीं उनकी ही सरकार में शामिल कांग्रेस कोटे के मंत्री और विधायक कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार में जुटे थे। इसके बावजूद चुनाव परिणाम अपेक्षा के विपरीत रहे, जिससे गठबंधन में असहजता बढ़ी है। हालांकि, गठबंधन को लेकर अब तक किसी बड़े नेता ने खुलकर बयान नहीं दिया है, लेकिन झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने यह जरूर कहा है कि झामुमो के बिना कांग्रेस कुछ भी नहीं है।

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आगे की सियासत पर टिकी नजरें
फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि बंगाल की इस राजनीतिक जीत का झारखंड की राजनीति पर कितना और कैसा असर पड़ता है। आने वाले समय में राज्य की सियासत किस दिशा में जाएगी, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

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