इन आदिवासियों-दलितों को मिलेगा पेंशन का लाभ
रांची के मुरादाबादी मैदान में शुक्रवार को आयोजित एक कार्यक्रम में सोरेन ने कहा, सरकार ने आदिवासियों और दलितों को 50 वर्ष की आयु तक पहुंचने पर पेंशन लाभ प्रदान करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा, उनमें मृत्यु दर अधिक है और उन्हें 60 साल के बाद नौकरी नहीं मिलती है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के प्रमुख ने दावा किया कि 2000 में राज्य के गठन के बाद से केवल 16 लाख लोगों को पेंशन का लाभ मिला था। लेकिन उनके नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने 36 लाख लोगों को पेंशन प्रदान की है। कांग्रेस भी सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा है।
झारखंड राज्य में कोई अव्यवस्था नहीं: सोरेन
उन्होंने कहा, 'हमारी सरकार के चार साल के कार्यकाल में हमने 60 साल से ज्यादा उम्र के 36 लाख लोगों, 18 साल से अधिक उम्र की विधवाओं और शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को पेंशन का लाभ दिया है।' सोरेन ने कहा कि झारखंड देश का सबसे गरीब राज्य है और यह कोविड-19 और सूखे से जूझ रहा है। लेकिन इसके बावजूद राज्य सरकार में कोई अव्यवस्था नहीं है। उन्होंने दावा किया कि झारखंड जैसे गरीब राज्यों ने अन्य राज्यों को ऑक्सीजन की आपूर्ति की। महामारी के दौरान गरीब मजदूरों को बचाया गया। लेकिन दो मंत्रियों की जान चली गई।
पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर साधा निशाना
राज्य की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर निशाना हुए मुसाधतेख्यमंत्री ने कहा कि 'डबल इंजन' वाली सरकार ने 'सब कुछ तबाह' कर दिया। उसके कार्यकाल में किसानों की मौत हुई। उन्होंने अपनी सरकार चुनने के लिए लोगों को धन्यवाद दिया और कहा कि झारखंड दिल्ली या राज्य मुख्यालय से नहीं बल्कि अपने गांवों से शासित होगा।