नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने शहर के ऐतिहासिक ओकनी तालाब के संरक्षण और जीर्णोद्धार के मामले में जिला प्रशासन की ढिलाई पर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने पूर्व में दिए गए आदेश के बावजूद निर्धारित समय पर अनुपालन रिपोर्ट जमा न करने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। इस संबंध में ट्रिब्यूनल ने जिला दंडाधिकारी को नोटिस जारी कर दो महीने के भीतर शपथपत्र के साथ अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का सख्त निर्देश दिया है।
दो महीने में रिपोर्ट जमा करने का निर्देश
कोलकाता स्थित पूर्वी क्षेत्र पीठ में 10 सितंबर को आयोजित सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने पाया कि उसके पूर्व आदेशों का पालन नहीं किया गया। इसके बाद ट्रिब्यूनल ने जिला दंडाधिकारी को नोटिस जारी करते हुए दो महीने की अवधि के भीतर शपथपत्र के रूप में अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही ट्रिब्यूनल ने संबंधित रिकॉर्ड के साथ अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से अथवा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य कर दी है। ट्रिब्यूनल ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 नवंबर की तारीख तय की है।
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पर्यावरण संरक्षण ट्रस्ट की पहल
ओकनी तालाब के संरक्षण से जुड़ा यह मामला हजारीबाग पर्यावरण संरक्षण ट्रस्ट के अध्यक्ष जयगोपाल राय ने ट्रिब्यूनल के समक्ष उठाया था। ट्रिब्यूनल ने 3 जुलाई 2025 के अपने आदेश में जिला दंडाधिकारी को निर्देश दिया था कि वह नगर निगम द्वारा ओकनी तालाब के संरक्षण के लिए तैयार की गई कार्ययोजना को लागू कराएं। ट्रिब्यूनल ने तीन जुलाई 2026 तक तालाब के संरक्षण का कार्य पूरा कराने का निर्देश दिया था। साथ ही ट्रिब्यूनल ने 15 जुलाई 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। तय समय पर रिपोर्ट दाखिल न होने के कारण अब ट्रिब्यूनल ने प्रशासन पर यह सख्ती दिखाई है।